Mon05212018

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लेख - दिव्य इंडिया न्यूज़
-रविश अहमद  राजनीतिज्ञों की राह भारत में बेहद आसान है, जनप्रतिनिधियों को जवाबदेही का डर नही है, विशेषतः सत्तासीन लोगों को साम-दाम-दंड-भेद करने में स्वतः मदद मिलने लगती है क्योंकि उच्च स्तर पर कुछ लोग हमेशा सत्ता के बाहर से सत्ता पक्ष के लोगों के लिये कार्य करते हैं। आम आदमी की समझ से यह बाहर है लेकिन आप क्रान्तियों या आन्दोलनों का पिछले 15 वर्षों का आंकलन करें और स्वयं उस आन्दोलन या क्रान्ति के विषय में सोचें जो कामयाब रही हो। ज़्यादा पीछे न जाते हुए केवल 5-6 वर्षों के भीतर हुए अन्ना के आन्दोलन से आंकलन करते हैं, यूपीए सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के विरूद्ध लोकपाल की नियुक्ति को लेकर अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में आन्दोलन…
मृत्युंजय दीक्षित  बंगाल का राजनैतिक परिदृश्य आंतरिक रूप से बदलाव की ओर अग्रसर हो रहा है। जिस समय पूरे देश की नजर कर्नाटक के रण पर लगी हुयी थी ठीक उसी समय पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव भारी हिंसा के बीच संपन्न हो रहे थे। मीडिया चैनलों में कर्नाटक को लेकर दिन भर खबरंें और बहसें चलतीं रही लेकिन बंगाल में जिस प्रकार लोकतांत्रिक मर्यादाओं का घोर हनन हुआ तथा हिंसा का नंगा नाच हुआ तब वहां की हृदय विदारक घटनाओं के प्रति किसी भी दल ने निंदा के प्रस्ताव पारित नहीं किये । पंचायत चुनावों के दौरान पूरा का पूरा बंगाल राजनैतिक कार्यकर्ताआंें की हत्याओं से थर्रा उठा। बंगाल का राज्य निर्वाचन आयोग सरकार का अंधभक्त बना रहा था…
आशीष वशिष्ठ  धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं कम होने की बजाय बढ़ती जा रही हैं। पिछले दिनों पत्थरबाजों ने पत्थरबाजी करते हुए कश्मीर घूमने आए एक पर्यटक की जान ले ली। पर्यटक की मौत के बाद पत्थरबाजों पर नकेल कसने और सख्ती करने की मांग चारों ओर से उठ रही है। इन सबके बीच प्रदेश सरकार की ढुलमुल नीति और कार्यप्रणाली से हालात बेकाबू होते दिख रहे हैं। पर्यटक की हत्या गंभीर मसला है। वही यह घटना प्रदेश सरकार को भी कटघरे में खड़ा करती है। ऐसे में अहम प्रश्न यह है कि जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और केंद्र की मोदी सरकार इन पत्थरबाजों पर नकेल कसने के लिए सख्त कदम क्यों नहीं…
आशीष वशिष्ठ  विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट भारत में तेजी से बढ़ते प्रदूषित शहरों की संख्या ंिचंता का बड़ा कारण है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार वायु प्रदूषण के मामले में भारत के 14 शहरों की स्थिति बेहद खराब है। इस सूची में उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा शहर कानपुर पहले स्थान पर है। कानपुर के बाद फरीदाबाद, वाराणसी, गया, पटना, दिल्ली, लखनऊ, आगरा, मुजफ्फरपुर, श्रीनगर, गुड़गांव, जयपुर, पटियाला और जोधपुर शामिल हैं। पंद्रहवें स्थान पर कुवैत का अली सुबह अल-सलेम शहर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जेनेवा में दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची जारी की गई। इनमें भारत के 14 शहर शामिल हैं जिनमें कानपुर पहले पायदान पर है। वर्ष 2010 की विश्व स्वास्थ्य…
मृत्युंजय दीक्षित  सुपंीम कोर्ट से एस सी एसटी एक्ट पर आये फैसले व प्रदेश में सपा- बसपा गठबंधन के बाद  बन रहे कठिन समीकरणों को साधने के लिए प्रदेश भाजपा सहित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व पूरी सरकार ने अपनी कार्यशैली को ही बदल दिया है। भाजपा सरकार व नेताओं के दलित प्रेम के कारण प्रदेश के सभी विरोधी दल खासे बैचेन हो उठे है। दलितांे व पिछड़ों के बीच छवि को चमकाने के लिये एक विशेष रणनीति पीएम नरेंद्र मोदी व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में तैयार की गयी है। अपनी नयी कार्यशैली में मुख्यमंत्री ने अपने कड़े तेवर अपना लिये है। प्रदेश सरकार ने पीएम मोदी के निर्देशों के बाद राज्य में गाम स्वराज अभियान के सहारे…
-एस.आर.दारापुरी, आई.पी.एस.(से.नि.) एवं संयोजक जन मंच उत्तर प्रदेश हाल में 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती के अवसर पर आंबेडकर महासभा, लखनऊ के अध्यक्ष लालजी प्रसाद निर्मल द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ को महासभा के आयोजन में “दलित मित्र” का सम्मान दिया गया है जिसका दलित समाज द्वारा व्यापक विरोध तथा निंदा की जा रही है. यह ज्ञातव्य है कि आंबेडकर महासभा दलितों की एक विख्यात संस्था है जिसकी स्थापना 1991 में आंबेडकर शताब्दी समारोह के अंतर्गत की गयी थी. महासभा का मुख्य उद्देश्य बाबासाहेब की विचारधारा का प्रचार प्रसार करना तथा दलितों के हित को सुरक्षित करने तथा उसे बढ़ाने का है. वरिष्ठ आई.ए.एस., पी.सी.एस., आई.पी.एस.तथा अन्य सेवाओं के सेवारत तथा सेवा निवृत अधिकारी, बुद्धिजीवी तथा…
मृत्युंजय दीक्षित  18 मई 2007 को हैदरबाद में स्थित मक्का मस्जिद में एक बम धमाका हुआ था जिसमें नौ लोगों की मौत हुई थी और 58 लोग घायल हो गये थे। इस मामले में 11 साल बाद आये फैसले मेें एनआईए की विशेष अदालत ने स्वामी असीमानंद सहित पंाच अभियुक्तों को बरी कर दिया है। जब यह धमाका हुआ था तब वहां पर जुम्मे की नमाज अदा की जा रही थी तथा भीड़ को नियंत्रित करने के लिये पुलिस ने गोलियां चलाई थीं जिसमें पंाच लोगों की और मौत हो गयी थी।शुरूआत में इस मामले में हरकतुल- जमात- ए इस्लामी पर शक जताया गया था। पर 2010 में अचानक से अभिनव भारत संगठन के स्वामी असीमानंद को गिरफ्तार किया गया…
सल्लू और छल्लू के बीच वैसे तो कोई रिशता और बराबरी नहीं है, लेकिन एक मामले में दोनों एक प्लेटफार्म पर खड़े दिखाई देते हैं। दोनों काला हिरण मारने के दोषी हैं। दोनों को अदालत ने गुनाहगार मानते हुए सजा सुनाई है। और यह भी कि, सल्लू और छल्लू दोनों जमानत की जिंदगी बसर कर रहे हैं। यहां बात हो रही है बाॅलीवुड के सल्लू यानी सलमान खान और हरियाणा के कुरूक्षेत्र जिले के किसान छल्लू राम की। मुंबई और कुरूक्षेत्र में भले ही तकरीबन डेढ हजार किलोमीटर का फासला हो, लेकिन गुनाह के मामले में सल्लू और छल्लू में गहरा रिशता है। अदालत से सल्लू की पेशी से लेकर जमानत मिलने तक ‘नेशनल मीडिया’ ने ऐसा माहौल बनाया मानो…
-तारकेश्वर मिश्र  2 अप्रैल के बाद बीती 10 तारीख को भारत बंद से क्या हासिल हुआ ये सवाल कई मायनो में अहम है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में किये गये मामूली फेरबदल के बाद से जिस तरह की प्रतिक्रियाएं व आंदोलन दोनों ओर से देखने को मिल रहा है, वो सोचने को मजबूर करता है। दोनों बन्द अपने-अपने ढंग से प्रभावशाली रहे। फर्क केवल इतना था कि दलितों के आंदोलन में तो नेतृत्व नजर आया तथा जिन लोगों ने बाहर से समर्थन दिया वे भी खुलकर सामने आ गए किन्तु कहा जा रहा है गत दिवस आयोजित बन्द सोशल मीडिया के नेतृत्व में हुआ जिस वजह से किसी व्यक्ति अथवा संगठन को उसके लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।…
2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में एक साल का समय बाकी है। हाल ही में यूपी और बिहार में हुए उपचुनाव में विपक्ष को मिली जीत ने राजनीतिक माहौल गर्माया है। विपक्ष लगातार सरकार के खिलाफ हमलावर मुद्रा में है। देश में संसद से लेकर सड़क तक जो राजनीतिक माहौल दिख रहा है उससे साफ हो जाता है कि 2019 से पहले बहुत कुछ होगा। फिलवक्त देश की राजनीति जिस दिशा में बह और बढ़ रही है उसके महीन तार कहीं न कहीं लोकसभा चुनाव से ही जुड़े हैं। सरकार और विपक्ष के बीच नोक-झोंक, आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी का दौर उफान पर है। हर दिन बीतने के साथ-साथ राजनीतिक पारा ऊपर चढ़ रहा है। अगर पिछले छह महीने की…
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