Tue06192018

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कला और साहित्य - दिव्य इंडिया न्यूज़
लखनऊ: कथाकार-उपन्यासकार बादशाह हुसैन रिजवी के उपन्यास ‘मै मुहाजिर नहीं हूं’ के उर्दू संस्करण का आज यहां यूपी प्रेस क्लब में विमोचन हुआ। इस उपन्यास का हिन्दी संस्करण 2011 में आ चुका है। इसका उर्दू अनुवाद डाॅ वजाहत हुसैन रिजवी ने किया है। इप्टा व प्रलेस द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सदारत उर्दू के मशहूर अदीब शारिब रुदौलवी ने किया। उन्होंने कहा कि इस उपन्यास में जिस हल्लौर की कथा है, वह पूरे हिन्दुस्तान का प्रतीक है। हमारी मिली-जुली विरासत को यह सामने लाता है। उर्दू में इसका संस्करण आना जरूरी था। आज नफरत का जिस तरह का माहौल, यह उपन्यास रचनाकार का प्रोटेस्ट है। जरूरी है कि हिन्दी अदब को उर्दू में तथा उर्दू अदब को हिन्दी में लाया…
इससे बड़ी बदकिस्मती और क्या होगी कि जिस अजीम शख्स और गीतकार की वजह से हिंदुस्तान ही नहीं गैर मुल्कों में उसके इलाके की पहचान हो, वहीं के लोग आज उस शख्स को भूलते जा रहे हैं. इतना ही नहीं जिला प्रशासन भी लापरवाह बना हुआ है. जी हां, हम बात कर रहे हैं दादा साहब फाल्के समेत दर्जनों अवार्ड हासिल करने वाले प्रसिद्द गीतकार और शायर मजरूह सुल्तानपुरी की. 24 मई 2000 को दुनिया को अलविदा कहने वाले इस गीतकार की आज 18वीं पुण्य तिथि है. चौंकाने वाली बात यह है कि तकरीबन पांच दशकों तक अपने गीतों और गजलों के जरिये लोगों के दिलों पर राज करने वाले मजरूह की सुलतानपुर में कोई भी निशानी मौजूद नहीं है.…
मेरठ। देश की पहली जासूसी महिला उपन्यासकार गज़ाला करीम ने 9 वर्षो बाद उपन्यास की दुनिया में दुबारा से तहलका मचाने आ गई है। प्राची डिजिटल पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित गज़ाला का नया उपन्यास ‘आई एम बैक’ आज गूगल प्ले बुक्स और अमेज़न किंडल पर रिलीज हो गया है। गज़ाला का नया उपन्यास एक ऐसे शख्स पर आधारित है जिसने मजहब की सुरक्षा हेतु मुखौटा पहना और अपने कुछ खौफनाक व सनसनीखेज कारनामों से मानवता को तार-तार कर सिद्ध किया कि वह मानवता का सर्वश्रेष्ठ पुजारी है। इस राक्षस के सनसनीखेज खुलासे के साथ इसके खौफनाक अन्जाम व कारनामे उपन्यास में खूबसूरती से सजाये गये हैं। यह एक पारिवारिक उपन्यास है। मेरठ की रहने वाली गज़ाला ने अब तक लगभग 36…
नई कलम के रचनाकार और कवयित्रियां उतरीं मंच पर लखनऊ। भागमभाग भरी जिन्दगी में किताबें पढ़ना थोड़ा चित्त को शांत और एकाग्र करता है तो शरीर को भी कुछ सुकून मिलता है। संगीत नाटक अकादमी गोमतीनगर परिसर में चल रहे लखनऊ पुस्तक मेले में सजे किताबों के संसार में अध्यात्म की राह सिखाती किताबें तो जैसे आने वाले पाठकों के लिए सोने पर सुहागा साबित हो रही हैं।  पुस्तक मेले में आने वालों की एक बड़ी तादाद अध्यात्म विषयक किताबों के पाठकों की हमेशा से रही है। यहां रामकृष्ण मिशन के स्टाल पर रामकृष्ण परमहंस, मां सारदा और विवेकानन्द के साहित्य के संग ही स्वामी अमत्र्यानन्द की प्रभावी जीवन प्रबंधन जैसी नई पुस्तकें भी हैं। ईशा इंस्टीट्यूट कोयम्बटूर के स्टाल…
लखनऊ, 30 अप्रैल। हर तरह के भूभण्डारों के दोहन और विसंगतियों की बदौलत हम पर्यावरण प्रदूषण की किन विस्फोटक स्थितियों के मुहाने पर खड़े हैं, इसका आकलन व आभात भी यहां संगीत  नाटक अकादमी गोमतीनगर परिसर में चल रहा लखनऊ पुस्तक मेला कराता है।  पुस्तक मेले के 72 स्टालों में लगभग हर विषय की किताबें हैं लेकिन सेंटर फार साइंस एण्ड इन्वायर्नमेण्ट दिल्ली के स्टाल नम्बर सात पर उपलब्ध हिन्दी-अंग्रेज़ी की किताबें और डाउन टू अर्थ पाक्षिक व मासिक के ‘क्या हम इलेक्ट्रानिक कचरे को सम्भालने को तैयार हैं’, ‘पैदावार बढ़ाने में मददगार यूरिया से नाइट्रोजन प्रदूषण खतरनाक स्तर पर...’, ‘वनवासियों से टकराव क्यों हो रहा ह़ै’ जैसे बहुत से लेख हमें सकारात्मक दिशा में सोचने को मजबूर करते हैं।…
मेले की थीम ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’, हुआ पोस्टर लांच  लखनऊ, 11 अप्रैल। शीरोज़ हैंगआउट गोमतीनगर में आयोजित पत्रकार वार्ता में लखनऊ पुस्तक मेला के संयोजक मनोज सिंह चंदेल ने प्रिंट एवं इलेक्ट्राॅनिक मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि इस वर्ष लखनऊ पुस्तक मेंला, अंकुरम शिक्षा महोत्सव के साथ संयुक्त रूप से 27 अप्रैल से 6 मई तक संगीत नाटक अकादमी, गोमतीनगर में आयोजित होगा। थीम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ थीम पर हो रहे पुस्तक मेले के साथ ही इस बार अंकुरम शिक्षा महोत्सव भी होगा। शीरोज़ हैंगआउट गोमतीनगर में आयोजित पत्रकार वार्ता में पुस्तक मेले का पोस्टर लांच करते हुए आयोजक मनोज सिंह चंदेल ने पत्रकारों को बताया कि नयी जगह नये कलेवर में छह मई तक चलने…
लखनऊ : उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा इंडिया ग्लाइकाल लिमिटेड एवं हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट्स के सहयोग से फाउंरूमीडेशन, लखनऊ चैप्टर द्वारा प्रस्तुत 5वां वार्षिक वाजिद अली शाह फेस्टिवल, "यमुना - दरिया प्रेम का" : मुजफ्फर अली द्वारा कल्पित एवं निर्देशित एक कत्थक नृत्य 25 मार्च को दिलकुशा पैलेस मे धूमधाम से मनाया जाएगा इसकी घोषणा आज आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान मुजफ्फर अली द्वारा की गयी । उन्होने बताया कि विषय यमुना - दरिया प्रेम का: यमुना खुसरो के जीवन का हिस्सा थी और खुसरो यमुना का हिस्सा थे। नदी बहती थी तथा खुसरो ने इसके किनारे पर अपने बदलते हुए लय-ताल को परिकल्पित किया। उसने उन्हें सुंदरता का वर्णन करने के लिए शब्द दिए। प्रेम की सुंदरता। उन्होने अपनी…
‘हस्तशिल्पी‘ कैसरबाग बारादरी में 6 दिवसीय सिल्क इंडिया प्रदर्शनी शुरू  लखनऊ: ‘हस्तशिल्पी‘ द्वारा शहर में 6 दिवसीय सिल्क इंडिया 2018 का शुभारंभ हुआ। इस प्रदर्शनी में पाकिस्तान की बार्डर पर बनने वाले अजरग प्रिंट के साथ ही बनारसी साडियों पर कच्छ का बंधेज प्रदर्शित किया गया हैै। इसके साथ ही एक ही धागे को 5 बार बल देकर बनने वाली बलकलम साडी भी लोगों को अपनी ओर खींच रही है। प्रदर्शनी के आयोजक हस्तशिल्पी के प्रबंधक टी अभिनंद ने बताया कि इस सिल्क इंडिया 2018 का आयोजन 28 फरवरी से 5 मार्च तक कैसरबाग बारादरी , लखनऊ में किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी में भारत के विभिन्न प्रांतो के सिल्क बुनकरो ने सहभागिता कर अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया…
मुंबई: सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने आज मुंबई के जुहू स्थित अपने निवास "जनक" में कॉफ़ी टेबुल बुक गीतों के दरवेश : गोपाल दास नीरज का विमोचन किया I कॉफ़ी टेबुल बुक का प्रकाशन लखनऊ स्थित हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया गया है I हिंदी के प्रसिद्ध कवि और मुंबई की फिल्म नगरी के मशहूर गीतकार डॉ. गोपाल दास नीरज की जीवन यात्रा और लगभग गत 78 वर्षों से जारी उनके कविता रचना धर्म को इस पुस्तक में समाहित करने का प्रयास किया गया है I हिंदी कविता के कवि सम्मेलनों में एकछत्र राज करने वाले प्रसिद्द छायावादी कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन को यह पुस्तक सादर समर्पित की गयी है I डॉ. बच्चन महानायक अमिताभ…
मेरठ।अब तक आपने प्रिन्ट प्रकाशन में कई लेखकों का कहानी संग्रह तो सुना होगा और पढ़ा भी होगा, लेकिन प्राची पब्लिकेशन द्वारा डिजिटल कहानी संग्रह पंखुड़ियाँ : 24 लेखक और 24 कहांनियाँ (कहानी संग्रह) राष्ट्रीय व अन्तराष्ट्रीय ई-बुक स्टोर्स पर 24 जनवरी को रिलीज हो गई है। जिनमें Google Play, Kobo, Kindle, iBooks, Smashwords, Scibd, Playster, Readwhere प्रमुख ई-बुक स्टोर्स है। यह संग्रह अपने आप में विशेष है क्योंकि ये डिजिटल होने के साथ ही कई लेखकों द्वारा डिजिटल प्रकाशन के लिए एक मंच पर लाने में काफी समय लगा है। जुलाई 2017 में लेखकों से रचनाएं आमंत्रित की गई थी, यह प्रक्रिया अक्टूबर 2017 में समाप्त हुई। आमंत्रित रचनाओं में से प्रकाशन द्वारा मात्र 24 रचनाओं का ही चयन…
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