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Monday, 30 July 2018 19:01

जो आत्मा का ज्ञान कराए वही असली गुरू: आचार्य किरीट

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 कानपुर: जीवन में गुरु कोई भी हो सकता है। वह चाहे माता-पिता, भाई बहन या अन्य हों। गुरु वह है, जो आत्मा का ज्ञान कराए और ईश्वर प्राप्ति का मार्ग दिखाए। यह बात सोमवार को आचार्य किरीट भाई ने किदवई नगर स्थित अग्रसेन भवन में श्रद्धालुओं से कहीं।

राधामाधव तुलसी सेवा समिति की ओर से गुरु पूर्णिमा महोत्सव पर सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें सबसे पहले संस्था के अध्यक्ष राम किशन अग्रवाल और अखिेलश मिश्रा ने आचार्य किरीट भाई का गुरु पूजन किया। इसके बाद सत्संग शुरू हुआ। आचार्य ने कहा कि गुरु की विचार धारा से अभिन्नता ही गुरु सेवा है। तन बल, धन बल और आत्मबल से भी बड़ा परमात्मा के नाम का बल है। मानुष्य की सज्जनता और दुर्जनता उसके व्यवहार से ही पता लगती है। दान देने में पात्र को नहीं, बल्कि सेवा भाव देखनी चाहिए। क्योंकि सेवा में ही परमात्मा है। गुरु, गाय, गंगा, श्रीमद्भागवत गीता और गायत्री मनुष्य को भवसागर से पार कराते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरों को सुख देना और परिवार में सबकी भावनाओं का आदर करना भी पुण्य है।  इस मौके पर राम कृष्ण तुलस्यान, विनोद मुरारका, संजय बाजपेई, ज्ञानेंद्र विश्नोई मौजूद रहे। 

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