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Friday, 24 April 2020 16:36

एक बहस....... पत्रकारिता अब भी शेष है क्या?

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**सवाल किससे होने चाहिए? क्या मीडिया को अधिकार है कि वह भाषाई शालीनता भी लांघ जाए?**

**(पवन सिंह)**

सवाल अलबत्ता पूछे ही कहां जा रहे हैं? महालेखाकार परीक्षक की रिपोर्ट के एक एक पन्ने पर रिपोर्टिंग करने व सवाल करने वाले पत्रकार या तो सुपारी एंकर/रिपोर्टर हो गये और फिर सवाल कुछ यूं हो गये-

१-मैं तो थक जाती हूं आप क्यों नहीं थकते? 

२- आप ऊर्जा कहां से लाते हैं?

3-आपको आम पसंद हैं?

4-चूस कर खाते हैं या काट कर?

5-आप इतना सब कुछ कैसे कर लेते हैं?

...... मीडिया सवाल किससे कर रहा है विपक्ष से....उल्टा जनता से ही...? यह तो गंगा पंश्चिम बंगाल से निकल कर हिमालय की ओर बह चली है और वोल्गा में समा जाएगी....और विपक्ष से सवाल करेगा पत्रकार तो भाषाई शालीनता को अपने तलुए से रौंद डालेगा और जब प्रतिक्रिया होगी तो आपको पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की आजादी का गीत और मुक्तक याद आएगा? किस चैनल ने अर्थ व्यवस्था पर सवाल उठाए? बेरोजगारी पर सवाल खड़े किए? मध्यम और छोटे कारोबारियों की तबाही पर सवाल खड़े किए? तबाह बैंकिंग सेक्टर पर सवाल उठाए? पूरे एक दर्जन लोग अरबों रूपए बैंकिंग लोन डकार के विदेश निकल गये और सबके सब गुजराती...किसने सवाल पूछे? रिजर्व बैंक का रिजर्व मनी निकाल लिया गया क्यों मेन स्ट्रीम मीडिया ने सवाल नहीं खड़े किए, विश्लेषण नहीं किया? किसी ने नोटबंदी के जो लाभ गिनाए गए थे वो धूलधूसरित हो गए, उस पर सवाल क्यों नहीं हुए? कहा गया था कि इन चूरनछाप नोटों के सिक्योरिटी फीचर्स की नकल नहीं हो सकती अब तक करोड़ों रुपए नकली कैसे बाजार में आ गये, कहां गया सवाल? 2014 से अब तक 16 हजार किसानों ने आत्महत्याएं कीं, लोकसभा में कृषि मंत्री के आंकड़े हैं, क्यों मीडिया ने इन मौतों पर मौत सी खामोशी ओढ़ ली? अरूणाचल प्रदेश के भाजपा सांसद का लोकसभा में बयान कि चीन 60 किलोमीटर अंदर तक घुस गया है, हमारी पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी अगर हम संसद में ये मामला नहीं रखते हैं तो...किसने इस पर खबर की? जाहिल जमातियों ने कोरोना के मामले में नर्क किया और उनकी संख्या आज 3000 हजार है तो आज 20 हजार के ऊपर देश में जो मरीज हैं उनमें से 17 हजार कहां से आए? मार्च तक कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित देशों से करीब 17 लाख भारतीय लौटे क्या रही उनकी भूमिका और सरकार ने क्या किया? ये सवाल क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए कि ट्रंप के 2000 सुरक्षा अधिकारियों को अहमदाबाद में दस लाख लोगों की भीड़ जुटाकर, नमस्ते ट्रंप हुआ ...आज अहमदाबाद और गुजरात महाराष्ट्र के बाद सबसे ज्यादा संक्रमित राज्य है, इस पर सवाल क्यों नहीं? लोकसभा में फरवरी में विपक्ष के कोरोनावायरस से लड़ने की तैयारियों के सवालों पर मसखरी पर सवाल किसने पूछे? ......सवाल कौन करेगा सुभाषचन्द्रा का जी न्यूज, जिसका मालिक खुद बैंकों का 13 हजार करोड़ रूपए दबाए हुए है और सत्ता सहयोग से राज्यसभा में है? या आर भारत चैनल जो सत्ता पक्ष के सांसद का है?  टीवी 18 पूछेगा जिसका मालिक अंबानी है? सबसे "तेज" पूछेगा जिसे विज्ञापन चाहिए......सवाल टीओआई ने खड़े किए थे कि मोटा भाई के सुपुत्र की कमाई पर थूंक कर चाटना पड़ा था वेबसाइट तक से खबर हटाई गई थी..? और सवाल जब यही मीडिया विपक्ष से करेगा तो भाषाई शालीनता का ख्याल भी नहीं रखेगा क्यों साहेब? 

चिंता मत करिए और मेरी टिप्पणी नोट कर के रख लीजिए वह दिन दूर नहीं है जब चैनलीय ओबी वैन और कैमरा सड़कों पर देखते ही भीड़ टूट पड़ेगी....प्रतीक्षा करें....

परिधान मंत्री जी तो प्रेस कॉन्फ्रेंस से और सवालों से ऐसे भागते हैं जैसे रात में भूत देख लिया हो? सवाल किससे करेंगे चाय की रेहड़ी वालों से? भूखे मजदूरों से? बेरोजगारों से? दो जून की रोजी रोटी से जूझती जनता से.....सत्ता से नहीं क्योंकि मीडिया अब माफिया है और वह न्यूज ट्रेड के धंधे में बरक्कत कर रहा है।

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