Sat06062020

ताज़ा खबरें :
Back You are here: Home मनोरंजन रोमांटिक हीरो की छवि से कहीं आगे थे ऋषि कपूर, अपने अभिनय से सबको किया चकित
Thursday, 30 April 2020 15:32

रोमांटिक हीरो की छवि से कहीं आगे थे ऋषि कपूर, अपने अभिनय से सबको किया चकित

Rate this item
(0 votes)

ऋषि कपूर (1952-2020) सत्तर के दशक से पर्दे पर बेहद रोमांटिक कलाकार के रूप में जाने जाते रहे। जिन्होंने एक्शन- मल्टीस्टार्स के दौर में प्रेम कहानियों को बॉलीवुड में जिन्दा रखा। यह सफलता उन्हें एक फिल्मी घराने से आने की वजह से नहीं मिली, बल्कि उन्होंने एक अभिनेता के रूप में अपनी वास्तविक क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए अपने करियर की शुरुआत के साथ काफी संघर्ष किया।

जाने-माने अभिनेता राज कपूर के बेटे ऋषि ने अपने पिता द्वारा बनाई, 1973 में आई लव स्टोरी फिल्म बॉबी से हीरो के रुप में अपना करियर शुरू किया और काफी प्रसिद्धि हासिल की। जिसके बाद लव स्टोरी वाली फिल्मों के साथ रोमांटिक संगीत की दुनिया में वो छा गए। उनकी छवि फिल्मी दुनिया में एक रोमांटिक हीरो के रूप में चस्पा हो गई। लेकिन, उनके मेनहत का ही नतीजा रहा कि एक खास किरदार निभाने के बावजूद भी वो अपने करियर में सफल रहे। 

फिल्म बॉबी में अभिनय करने के वक्त वो महज 21 साल के थे, जब उन्हें एक अलग पहचान मिली। लेकिन एक्शन वाली फिल्मों की बॉलीवुड की दुनिया में एक बाढ़ सी आने के बाद उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा और उन्हें यह भी साबित करना पड़ा कि फिल्म बॉबी में मिली सफलता अचनाक से मिलने वाली सफलता नहीं थी।

बॉलीवुड लड़के-लड़कियों की मुलाकात वाली कहानियों से थक गया था और दर्शक मार-धाड़ से भरपुर (एक्शन) वाली फिल्मों की तरफ रूख करना शुरू कर दिए थे। जिस वक्त बॉबी रिलीज हुई थी उसके कुछ महीने पहले ही प्रकाश मेहरा के निर्देशन में सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की फिल्म जंजीर (1973) में आई थी, जिसने बड़ी सफलता के साथ खुद को हिंदी सिनेमा में एंग्री यंग मैन के रूप में स्थापित किया। जिसके बाद अमिताभ  दीवार (1975), शोले (1975) सरीखे कई अन्य एक्शन वाली फिल्मों के साथ सुपरस्टार बन गए।

उस समय के सबसे बड़े रोमांटिक हीरो राजेश खन्ना के करियर के खत्म होने का संकेत मिलने लगा था। पर्दे के इस दौर में पूरी तरह से बच्चन ही दिख रहे थे, जिसकी वजह से ऋषि जैसे अभिनेता एक अलग कतार में नजर आ रहे थे। फिर भी उन्होंने इन सभी चुनौतियों के बावजूद 1975 में आई खेल-खेल जैसी हिट फिल्में दी, जिसमें एक्शन नहीं था। उन्होंने अमिताभ बच्चन जैसे अभिनेताओं के होते हुए भी कभी-कभी (1976), अमर अकबर एंथोनी (1977) और नसीब (1981) जैसी फिल्मों के साथ मल्टी-स्टार्स कलाकारों के समूह में अपनी उपस्थिति दर्ज कर लोहा मनवाया।

क्योंकि वो फिल्मी घराने से आते थे, इसलिए कपूर परिवार को अपने पूर्वजों से भी अभिनय का गुण मिला और जिन्हें जहां अवसर मिला, उन्होंने खुद को साबित किया। अपने पिता की फिल्म मेरे नाम जोकर (1970) में एक छोटा सा किरदार निभाने के बाद ऋषि ने लैला मजनू (1976), सरगम (1979), प्रेम रोग (1982), सागर (1985) जैसी फिल्मों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा को साबित किया। इसके अलावा तवायफ (1985), एक चादर मैली सी (1986) में अभिनय किया। उन्होंने कभी अपने रोमांटिक नायक की छवि को खत्म नहीं होने दिया।

1990 के दशक में आमिर खान, सलमान खान और शाहरुख खान जैसे सितारों का रूपहले पर्दे पर बोलबाला था, इसके बाद भी उन्होंने दीवाना (1992) और बोल राधा बोल (1991) में रोमांटिक संगीत के साथ "चॉकलेटी" नायक की भूमिका निभाई, जबकि इन फिल्मों की अभिनेत्री की उम्र ऋषि से आधी थी। भले ही इन फिल्मों में काम करने से पहले उन्होंने खोज (1989) जैसी फिल्म में अभिनय कर अपने रोमांस वाले नायक की छवि से निकलने की कोशिश की, लेकिन उस वक्त तक वो बॉलीवुड के सबसे रोमांटिक नायक बन चुके थे।

Read 20 times