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Monday, 18 May 2020 15:25

डायबिटीज मरीजों में कोविड-19 का खतरा 50 प्रतिशत अधिक: विशेषज्ञ

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नई दिल्ली: कोविड-19 जैसे घातक वायरस का खतरा मधुमेह वाले मरीजों में 50 प्रतिशत तक अधिक है। विशेषज्ञों ने बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए ब्लड ग्लूकोज संतुलित रखने और घरों में नियमित रूप से व्यायाम करने की सलाह दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक मधुमेह के अलावा उच्च रक्तचाप, किडनी समस्या और दिल से संबंधित बीमारी वाले मरीजों के लिए यह महामारी अत्यधिक जोखिमभरा साबित हो सकती है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. निखिल टंडन ने ये बाते कही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कोरोना की वजह से हुई कुल मौत में 70 प्रतिशत से अधिक जान गंवाने वाले लोगों में इन बीमारियों के लक्षण पाए गए हैं। 

उन्होंने कहा कि खासतौर से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस लॉकडाउन के दौरान मधुमेह मरीजों को अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। उनमें कोविड-19 के गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए यदि वो अपने मेटाबोलिज्म यानी की ब्लड शुगर, रक्तचाप और वसा को नियंत्रण में नहीं रखते हैं तो उनकी स्थिति खराब हो सकती है।

उन्होंने सुझाव दिया है कि इंसुलिन ऐसी परिस्थितियों में एक सुरक्षित विकल्प है। यह टाइप-1 डायबिटीज मेलिटस (जिसमें मरीज के शरीर का रक्त, शर्करा की मात्रा को नियंत्रित नहीं कर पाता है) वाले लोगों के लिए एकमात्र उपचार है। जबकि टाइप- 2 डायबिटीज मेलिटस (जब इंसुलिन का उत्पादन शरीर नहीं कर पाता है) वाले लोग मेटाबोलिज्म को नियंत्रण में रखकर इसमें राहत पा सकते हैं। 

मैक्स हेल्थकेयर हॉस्पिटल के एंडोक्रिनोलॉजी और मधुमेह विभाग के अध्यक्ष डॉ अंबरीश मित्तल ने भी कहा है कि मधुमेह मरीजों को मेटाबोलिज्म को नियंत्रण में रखना चाहिए। कोरोना वायरस से संक्रमण से बचाव के लिए यह प्राथमिक रोकथाम है। मित्तल के मुताबिक किसी भी तरह की दिक्कत महसूस होने पर मरीज को टेलीमेडिसिन का उपयोग करते हुए कोरोना के संकट में किसी के संपर्क में आने से बचना चाहिए।

अंबरीश मित्तल ने मधुमेह के रोगियों को सलाह देते हुए कहा कि इन्हें  ब्लड ग्लूकोज का नियमित रूप से टेस्ट करवाना चाहिए और डॉक्टरों की सलाह से दी जाने वाली दवाओं को बंद नहीं किया जाना चाहिए। यदि ब्लड ग्लूकोज अधिक होता है तो इंसुलिन का उपयोग तत्काल नियंत्रण के लिए किया जा सकता है।

बता दें, भारत में इस वक्त 7 करोड़ 70 लाख से अधिक मधुमेह के मरीज हैं। पिछले महीने स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन में कहा गया कि सरकार उच्च रक्तचाप, मधुमेह, सीओपीडी और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित मरीजों को आशा कार्यकर्ता और एसएचसी द्वारा तीन महीने के लिए दवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।

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