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Tuesday, 15 September 2020 18:12

प्याज पर नई तकरार! महंगाई रोकने के लिए निर्यात पर रोक

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भारत में प्याज न केवल किचन का एक अहम हिस्सा है, बल्कि यह राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील कमोडिटी है. प्याज की कीमतों में जब-जब भी तेज उछाल होता है, तब-तब न केवल आम आदमी के किचन का बजट बिगड़ जाता है बल्कि सरकारें भी हलकान होने लगती हैं. बीते 2 हफ्ते से घरेलू बाजार में प्याज की खुदरा कीमतों को देखकर सरकार ने आनन-फानन में सोमवार रात प्याज के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध का फैसला किया. हालांकि, इस फैसले से प्याज उत्पादक किसान, ट्रेडर्स खुश नजर नहीं आ रहे हैं. उनका मानना है कि बाजार में आवक बहुत है, ऐसे में निर्यात रूक गया तो उनका बहुत नुकसान होगा. जानकार मान रहे हैं कि सरकार ने पिछले साल की स्थिति से सबक लेते हुए, इस बार जल्द ही यह कदम उठाया है. निश्चित रूप से ट्रेडर्स और किसान नाखुश होंगे, लेकिन आगे कीमतों में स्थिरता देखने को मिल सकती है, जिससे आम आदमी को राहत रहेगी. बीते साल दिसंबर में प्याज के भाव 100 रु/किलो तक पहुंच गए थे.

देश में प्याज आवश्यक कमोडिटी है. खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय प्याज की कीमतों की नियमित निगरानी करता है. मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राजधानी दिल्ली में 14 सितंबर को प्याज के खुदरा भाव 41 रुपये/किलो तक पहुंच गए थे. खासबात यह है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने सिर्फ तीन महीने पहले ही पुराने आवश्यक कमोडिटी अधिनियम, 1955 में बदलाव कर अनाज, खाद्य तेल, आलू, प्याज, टमाटर और अन्य आवश्यक कमोडिटीज के स्टॉक लिमिट और निर्यात पर प्रतिबंध के बारे में जरूरी बदलाव किया था. बदलाव के अनुसार, स्टॉक लिमिट या निर्यात प्रतिबंध अत्यंत गंभीर स्थिति जैसे युद्ध या प्राकृतिक आपदा के समय ही लगाया जा सकता है.

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