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Friday, 08 January 2021 17:49

दो वयस्कों के जीवन में कोई भी दखल नहीं दे सकता: उच्च न्यायालय Featured

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प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार को अंतरधार्मिक विवाह करने वाले दम्पत्तियों से संबंध में कहा कि जब दो वयस्क अपनी इच्छा से साथ रह रहे हों, तो उनके जीवन में कोई अन्य व्यक्ति हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

शाइस्ता परवीन उर्फ संगीता और उसके मुस्लिम पति द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने कहा, “इस अदालत ने कई बार यह व्यवस्था दी है कि जब दो बालिग व्यक्ति एक साथ रह रहे हों, तो किसी को भी उनके शांतिपूर्ण जीवन में दखल देने का अधिकार नहीं है।”

इस याचिका के मुताबिक, प्रथम याचिकाकर्ता शाइस्ता परवीन उर्फ संगीता ने मुस्लिम धर्म अपनाने का निर्णय किया और धर्म परिवर्तन के बाद उसने एक मुस्लिम व्यक्ति से शादी की जो द्वितीय याचिकाकर्ता है।

दोनों ही याचिकाकर्ताओं ने वयस्क होने का दावा किया है और उनका आरोप है कि उनके परिजनों से उनकी जान को खतरा है। दोनों ने ही अपनी शादीशुदा जिंदगी में परिजनों के लिए हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश जारी करने की अदालत से गुहार लगाई है। उनका दावा है कि वे वयस्क हैं और अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं।

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