Wed09182019

ताज़ा खबरें :
Back You are here: Home राज्य बल्क दवाओं पर भारी मुनाफा के पीआईएल में प्रतिवादी बढाने के निर्देश
Monday, 10 September 2012 15:22

बल्क दवाओं पर भारी मुनाफा के पीआईएल में प्रतिवादी बढाने के निर्देश Featured

Rate this item
(1 Vote)

लखनऊ: सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में कोरपोरेट मामले मंत्रालय द्वारा अपने स्तर पर कराये गए एक अध्ययन के आधार पर कई बल्क तथा जेनेरिक दवाओं में भारी मुनाफा रोके जाने के लिए दायर जनहित याचिका संख्या 7596/2012 में आज चीफ जस्टिस अमिताव लाला एवं जस्टिस अनिल कुमार की बेंच के समक्ष कोरपोरेट मामले मंत्रालय एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को भी रिट याचिका में प्रतिवादी बनाए जाने के निर्देश दिये गए जिनका तत्काल अनुपालन किया गया.  मामले की अगली सुनवाई 17 सितम्बर को नियत की गयी. 

नूतन ठाकुर ने इस रिट याचिका में कहा है कि कोरपोरेट मामले मंत्रालय द्वारा कतिपय चोटी के बिकने वाले फार्मुलेशन एवं एम्लोडीपन, मेटफोर्मिन, सिप्रोफ्लोजेसिन तथा एजिथ्रोमाईसीन नामक चार चोटी के जेनेरिक दवाओं के सम्बन्ध में अध्ययन कराये जाने पर यह पाया गया कि तमाम बड़े दवा निर्माताओं द्वारा 203% से 1123%  तक मुनाफा लिया जा रहा है. इसमें रैनबैक्सी ग्लोबल, डॉ रेड्डी कैब, ग्लाक्सो स्मिथकिल्ने, फाईजर, सिप्ला, जाईडस जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं. इस पर कोरपोरेट मामले के मंत्रालय ने 12 जून 2012 को रसायन एवं खाद मंत्रालय को इन दवाओं के विक्रय मूल्य पर आवश्यक प्रतिबन्ध लगाये जाने हेतु पत्र प्रेषित किया. ये सभी दवाएं नॉन-शेड्यूल दवाएं हैं जिनमे केन्द्र सरकार को ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर के अंतर्गत शेड्यूल दवाओं की तरह मूल्य निर्धारण का सीधा अधिकार नहीं है. लेकिन इस कंट्रोल ऑर्डर के ऑर्डर 5 तथा 10 में नॉन-शेड्यूल दवाओं के मूल्य पर उन स्थितियों में प्रतिबन्ध के लिए प्रावधान दिये गए हैं जब केन्द्र सरकार को यह महसूस हो कि इनके मूल्य बहुत अधिक निर्धारित किये गए हैं.

ठाकुर ने अपनी रिट याचिका में कहा है कि हज़ार प्रतिशत तक का मुनाफा पूर्णतया अनुचित है और इसके मद्देनज़र उच्च न्यायालय द्वारा केन्द्र सरकार की  नेशनल फार्मास्युटीकल प्राइसिंग ऑथोरिटी को इन दवाओं के मूल्यों पर आवश्यक प्रतिबन्ध लगाए जाने हेतु निर्देश देने की प्रार्थना की है.

Read 25509 times Last modified on Tuesday, 11 September 2012 18:02