Fri05242019

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कला और साहित्य - दिव्य इंडिया न्यूज़
ग़ज़ल -----   निगाहे शौक़ से जब जब भी  आसमां देखा, बस  एक  रंग  में ठहरा  हुआ  धुआं  देखा।   ख़ुद अपने  दर्द  से नाआशनाई  जो  रखते,  वो  कहते  दर्द में हर शख़्स को नेहां देखा।   तसव्वुरात  में  इक  अक्स  साथ  रहता  है, नज़र  में  होता  वही  है  जहाँ  जहाँ देखा।   सितारे  टूट  के  धरती  पे   आ  गए   जैसे, तड़पते  जुगनू को जब ज़ेरे  आसमां देखा।   हर  एक सफ़हे पे  ख़ूने जिगर की लाली है,   कोई  किताब  हो बस  एक सा  बयां देखा।   वो  झूठ  मूठ  की  बातें  बनाता   रहता है, जो माशरे  को  कहे  हंसता  शादमां देखा।   किसे पता है कहाँ पर किसी की मंज़िल है, भटकता  शहरे   तमन्ना  में   कारवां  देखा।   चुरा…
लखनऊ: रिजर्व बैंक के सामने संगीत नाटक अकादमी परिसर गोमतीनगर में एक फरवरी से चल रहा लखनऊ पुस्तक मेला व अंकुरम शिक्षा महोत्सव कल रविवार को समाप्त जायेगा। यहां सूबे के 11 जिलों से आई बाल प्रतिभाओं के कार्यक्रम कर रहे हैं तो साहित्य-संस्कृति प्रेमियों के लिए विविध आयोजन लगातार चल रहे हैं। ‘समापन की दहलीज पर महापर्व कुम्भ’ थीम पर आधारित पुस्तक मेले में आज खासी भीड़ रही। मेले में कलकुंज, जीवन पब्लिशिंग, सुभाष पुस्तक भण्डार और प्रकाशन संस्थान व अन्य स्टालों पर पुस्तक प्रेमी मनपसंद पुस्तक छांटते दिखाई दिए। सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत यहां परिवहन विभाग की ओर आयोजित समारोह में केजीएमयू के डा.संदीप तिवारी, बीबीएयू के डा.वेंकटेष दत्ता, सूचना आयोग के रजिस्ट्रार जितेन्द्र मिश्रा ने लोगों…
पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से अरुण तिवारी सम्मानित भोपाल:  साहित्यिक पत्रकारिता का कार्य है- ठहरे हुए समाज को सांस और गति देना। जो समाज बनने वाला है, उसका स्वागत करना। नयी रचनाशीलता और नयी प्रतिभाओं को सामने लाना साहित्यिक पत्रकारिता की जरूरी शर्त है। यह विचार वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विजय बहादुर सिंह ने 11वें पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान समारोह में व्यक्त किए। गांधी भवन के मोहनिया हॉल में मीडिया विमर्श की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में साहित्यिक पत्रिका 'प्रेरणा' के संपादक एवं वरिष्ठ साहित्यकार अरुण तिवारी को ग्यारह हजार रुपये, शाल, श्रीफल, प्रतीक चिह्न और सम्मान पत्र से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार डॉ. सुधीर सक्सेना,…
नई दिल्ली: हिंदी साहित्य की मशहूर लेखिका कृष्णा सोबती का निधन हो गया। कृष्णा सोबती 93 साल की थी। लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार की सुबह एक निजी अस्पताल में निधन हो गया है। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित लेखिका कृष्मा सोबती का जन्म 18 फरवरी 1925 को वर्तमान पाकिस्तान के एक कस्बे में हुआ था। कृष्णा सोबती के उपन्यास ऐ लड़की और मित्रो मरजानी को हिन्दी साहित्य की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में शुमार किया जाता है। कृष्णा सोबती हिंदी की सुप्रसिद्ध लेखिकाओं में से एक हैं। उन्हें 1980 में साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1996 में साहित्य अकादमी अध्येतावृत्ति से सम्मानित किया गया है। साल 2017 में कृष्णा सोबती को साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ…
“उच्चारण की शुद्धता” पर आकाशवाणी लखनऊ में आयोजित कार्यशाला संपन्न  लखनऊ: आकाशवाणी लखनऊ के उद्घोषकों एवं कार्यक्रम कर्मियों के दैनन्दिन क्रिया-कलापों में परिष्कार लाने के लिए आकाशवाणी एवं तल्हा सोसाइटी, लखनऊ द्वारा चार-दिवसीय कार्यशाला का आयोजन, आकाशवाणी लखनऊ के सभागार में किया गया। 04 जनवरी से प्रारम्भ इस कार्यशाला में उर्दू और हिन्दी के विद्वानों ने प्रतिभागियों को सम्बोधित किया। कहानीकार डाॅ0 आयशा सिद्दीक़ी ने बताया कि किसी भी शब्द का सही उच्चारण जानने के लिए आवश्यक है कि हम शब्दों के मूल स्रोत का अध्ययन करें। एक ही शब्द से बहुत सारे शब्दों की उत्पत्ति होती है। जैसे - ‘शाद‘ शब्द का अर्थ खुशी होता है। इससे नाशाद भी बनता है और शादमानी भी बनता है। लखनऊ विश्वविद्यालय के…
लखनऊ: एथेंस इंस्टीट्यूट फ़ॉर एजुकेशन एंड रिसर्च, जो कि एक विश्व एसोसिएशन ऑफ एकेडमिक्स एंड रिसर्चर्स है , एथेंस, ग्रीस मे स्थित है ने डॉ धीरज मेहरोत्रा, अकादमिक इंजीलवादी और नेशनल टीचर अवार्डी को भारत से आमंत्रित किया है, जो "क्लासरूम में गुणवत्ता बनाने के लिए अभिनव प्रशिक्षण" पर एक सत्र प्रदान करेंगे। 20-23 मई, 2019 से स्लेटेड एथेंस इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेशन एंड रिसर्च के अध्यक्ष डॉ ग्रेगरी टी पापनिकोस से प्राप्त एक निमंत्रण में, डॉ मेहरोत्रा को क्लाउड और सोशल के माध्यम से "हाई अचीविंग एकेडमिक्स" पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत करना है। डॉ मेहरोत्रा ने 60 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया है और लगभग 175 देशों के 2,00,000 से अधिक छात्रों के साथ 160 से अधिक उद्यमी पाठ्यक्रम…
नई दिल्ली: भारतीय फिल्मों के मशहूर निर्माता व निर्देशक मृणाल सेन का रविवार (30 दिसंबर) को निधन हो गया है। उनकी उम्र 95 साल की थी। बताया गया है कि सेन का निधन उनके निवास पर ही हुई है। निधन के बाद फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। बता दें, मृणाल सेन का जन्म 14 मई, 1923 में फरीदपुर नामक शहर (जो अब बंगला देश में है) में हुआ था।   बताया जाता है कि मृणाल सेन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद फरीदपुर को अलविदा कह दिया था। इसके उन्होंने कोलकाता में पढ़ाई की। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की। वह भौतिक शास्त्र के विद्यार्थी थे। उन्होंने 1955 में हली फीचर फिल्म 'रातभोर'…
लखनऊ : अपनी लेखनी से हिंदी फ़िल्म जगत में अपना लोहा मनवा चुके उत्तर प्रदेश के अमेठी वासी, कलम के बाहुबली मनोज मुंतशिर की पहली किताब ‘मेरी फितरत है मस्ताना’ का लोकार्पण सेंसर बोर्ड के निदेशक पदमश्री प्रसून जोशी ने किया। 'मेरी फितरत है मस्ताना' गीतकार, डायलॉग राइटर मनोज मुंतशिर का पहला काव्य संकलन है, जिसमें मनोज की बेहतरीन नज़्में और शायरी पिरोई गयी है। मनोज कहते हैं इस किताब में वो सब है जो मैं फ़िल्मों में नहीं लिख सका। मनोज मुंतशिर ने बुक लॉन्च करते हुए कहा कि मेरा काव्य संकलन ख़ासतौर से उन नौजवानों के लिए है, जो हिंदी कविता और शायरी से मुँह मोड़ चुके हैं। मनोज मानते हैं कि इसमें पढ़ने वालों से ज़्यादा दोष…
लखनऊ: एक पूर्व सीएमएस शिक्षक, एक राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता और नेक्स्ट एजुकेशन इंडिया के अकादमिक प्रचारक, डॉ धीरज मेहरोत्रा द्वारा लिखी गयी एक पुस्तक "डॉ जगदीश गांधी, द क्वालिटी एजुकेशन आइकॉन", छात्रों के 6 वें क्वालिटी कंट्रोल सर्किल (एनसीएसक्यूसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान ' सनसिटी स्कूल, गुड़गांव में आयोजित की गई। इसे मुख्य अतिथि प्रसिद्ध अभिनेता, निदेशक और पटकथा लेखक श्री राहुल बोस, , डॉ जगदीश गांधी, कुल गुणवत्ता और शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए विश्व परिषद की अध्यक्षा  डॉ विनीता कामरान, कार्यकारी निदेशक, डब्ल्यूटीसीक्यूईई और प्रिंसिपल, सिटी मोंटेसरी स्कूल, लखनऊ, श्री मधुकर नारायण-अध्यक्ष, मॉरीशस छात्र गुणवत्ता नियंत्रण मंडल और श्रीमती रूपा चक्रवर्ती, प्रिंसिपल, सनसीटी स्कूल, गुड़गांव की उपस्थिति में लॉन्च किया गया था। पुस्तक नोशन प्रेस, चेन्नई द्वारा…
लखनऊ। ‘जिस देश में हर रहे हैं, वहां के बिगड़ते सौहार्द को ठीक करने का दायित्व भी हमारा ही है। आतंकवाद का दंश जिस तरह देश के कई हिस्से झेल रहे हैं, वहां ये जख्म गहरे होते जा रहे हैं। ‘रिफ्युजी कैम्प’ में बस इतना ही मैंने कहना चाहा है।’- यह कहना है लेखक आशीष कौल का। एक समारोह में मुलाकात के दौरान बरसों कारपोरेट सेक्टर में अपनी सेवाएं दे चुके आशीष ने ये बात प्रभात से हाल में प्रकाशित व आतंकवाद के समाधान सामने रखती पुस्तक रिफ्यूजी कैम्प के बारे में कही। आनलाइन बिक्री में ये किताब सर्वत्र सराही जा रही है। रिफ्यूजी कैम्प की कहानी एक साधारण लड़के अभिमन्यु के नेतृत्व में पांच हजार लोगों के अपने आप…
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