Wed04212021

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लेख - दिव्य इंडिया न्यूज़
- नवेद शिकोह पहले से भी खतरनाक सूरत में कोरोना रिटर्न हो चुका है। करीब आठ सौ लोगों की सहभागिता वाला उ.प्र.राज्य मुख्यालय संवाददाता समिति का चुनाव करवाकर पत्रकार झेल रहे हैं। पछता रहे हैं कि जब कोरोना ने दुबारा दस्तक दे दी थी तो क्यों चुनाव करवाया। इस चुनाव को थोड़ी समय अवधि के लिए और आगे बढ़ा दिया जाता तो साथी पत्रकार की जिन्दगी नहीं जाती। ये चुनाव देर से होता तो कौन सा काम रुक जाता ! देश की रफ्तार और पत्रकारिता का सिलसिला भी नहीं रुक जाता। पत्रकारों के चुनाव के तुरंत बाद एक दर्जन से अधिक जर्नलिस्ट और उनके परिजन कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं और एक पत्रकार की मौत हो चुकी है। अंदाजा…
देविंदर शर्मा, खाद्य और कृषि विशेषज्ञ (अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद: एस आर दारापुरी, राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट) मार्च 2018 में, ऑस्ट्रेलिया की आबादी से अधिक अनुमानित 2.5 करोड़ लोगों ने भारतीय रेलवे में लगभग 90,000 पदों के लिए आवेदन किया था। 2015 में, 22 लाख इंजीनियरों और 255 पीएचडी धारकों सहित 23 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने उत्तर प्रदेश राज्य सचिवालय में चपरासी के 368 पदों के लिए आवेदन किया था। उम्मीद की किरण: कृषि, जो 50 प्रतिशत से अधिक आबादी को रोजगार देती है, भारतीय अर्थव्यवस्था को फिर से संगठित करने की क्षमता रखती है।) मार्च 2018 में, ऑस्ट्रेलिया की आबादी से अधिक अनुमानित 2.5 करोड़ लोगों ने भारतीय रेलवे में लगभग 90,000 पदों के लिए आवेदन…
एस आर दारापुरी राज्यसभा सदस्य सैयद नासिर हुसैन ने यह जानने की कोशिश की कि क्या देश की जेलों में अधिकांश कैदी दलित और मुसलमान हैं, उनकी संख्या पर एक श्रेणी-वार ब्रेक-अप और सरकार उन्हें पुनर्वास और शिक्षित करने के लिए क्या प्रयास कर रही है। राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, ओबीसी, एससी और ‘अन्य’ श्रेणियों के कैदियों की अधिकतम संख्या उत्तर प्रदेश की जेलों में थी, जबकि मध्यप्रदेश की जेलों में एसटी समुदाय की। देश के कुल 4,78,600 जेल कैदियों में से 3,15,409 या 65.90 प्रतिशत अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणियों के हैं, जो सरकारी आँकड़े बुधवार को संसद में प्रस्तुत किए गए हैं। गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी द्वारा…
अशोक भाटिया किसान आंदोलन से जुड़े मुद्दों को वार्ता के जरिए हल करने के प्रयासों को उस वक्त धक्का पहुंचा जब किसान नेताओं और सरकार के बीच 11वें दौर की बातचीत भी बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। बैठक की अगली तारीख का ऐलान भी नहीं किया गया।बैठक के बाद किसान नेताओं ने कहा कि सरकार चाहती थी कि कानून में संशोधन और उनके अमल पर एक-डेढ़ वर्ष के लिए रोक लगाने संबंधी पेशकश पर चर्चा की जाए। जबकि, किसान संगठन कानूनों की वापसी पर कायम थे।किसान नेताओं के अनुसार बैठक में कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि कृषि कानूनों में कोई कमी नहीं है। सरकार ने किसानों का सम्मान करते हुए उनके सामने पेशकश की थी।…
तौसीफ़ क़ुरैशी सबका ख़ुलूस सबकी इनायत हमें मिली हम ख़ुश नसीब है कि मोहब्बत हमें मिली और वो मुसलमान थे जिन्हें CAA के विरोध करने पर आतंकवाद से जोड़ दिया गया था हम तो किसान है हमारे साथ यह खेल नहीं चलेगा हमने बहुत सरकारें बनाईं है और बहुत सरकारें हटाईं है सरकारें हम से है हम सरकारों से नहीं हमें बड़े-बड़ों को सीधा करना आता है।देश का किसान आर-पार लड़ाई लड़ने की तैयारी में क्या मुक़ाबला कर पाएगी मोदी सरकार या पीछे हटेंगी ?।अड़ानी अंबानी समूहों के हक में किसानों के लिए बने तीनों विवादित क़ानूनों के बाद आंदोलनरत किसान शायद इन्हीं अल्फ़ाज़ों से अपनी बात कहना चाह रहे हैं हालाँकि मोदी सरकार एवं RSS ने बहुत कोशिश की…
धमेन्द्र सिंह अभी हाल ही में मोदी जी ने वाराणसी दौरे के समय अपनी सरकार द्वारा लाए कृषि कानूनों पर बात रखते हुए वाराणसी से अलग होकर बने चंदौली जनपद के किसानों द्वारा काला चावल प्रजाति के चावल की खेती के अनुभव बताते हुए कहा कि इसके निर्यात से चंदौली के किसान मालामाल हो गए. पीएम मोदी के दावे को जमीनी हकीकत खारिज करती है. जिस चंदौली जनपद के किसानों के विकास के कसीदे मोदी जी पढ़ रहे थे वह जनपद नीति आयोग के अनुसार देश के सर्वाधिक पिछले जनपदों में एक है. प्रदेश सरकार ने जब वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट की बात शुरू की तो चंदौली जनपद में शुगर फ्री चावल के नाम पर चाको हाओ यानि काला चावल…
कमलेश सिंह   आज जहां दुनिया टेक्नोलॉजी / साइंस, व्यवसाय आदि में  कामयाबी हासिल कर रही है वही हमारी सरकार सिर्फ सिर्फ लव जिहाद (कथित धर्म परिवर्तन) को रोकने पर आतुर है. किसी अन्य क्षेत्र पर क्यों कोई बात नहीं हो रही, हमारे पास शिक्षा पर काम करने के लिए कोई मुद्दा नहीं है, रोजगार, स्वास्थ्य पर बात करने का समय नहीं है. पर आरएसएस के प्रोजेक्ट पर काम कर रही सरकार नए धर्मांतरण विरोधी कानून को लाकर लव जिहाद पर समाज में बात करा रही है. सरकार यह दिखा रही है कि हम सिर्फ धर्म बचाने का ठेका लेकर पैदा हुए हैं.  धर्म जो व्यक्ति का निजी मामला है और हर कोई इसे मानने या न मानने के लिए…
एस आर दारापुरी आईपीएस (सेवानिवृत्त) राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट   लेखक, स्टीवन लेविट्स्की और डैनियल ज़िब्लाट ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “हाउ डेमोक्रेसीज़ डाई: व्हाट हिस्ट्री रिवीलज़ फ़ॉर फ्यूचर” में कहा है कि “डेमोक्रेसी तख्तापलट के साथ मर सकती हैं- या वे धीरे-धीरे मर सकती हैं। यह एक भ्रामक रूप में धीरे धीरे होता है, एक तानाशाह नेता के चुनाव के साथ, सरकारी सत्ता का दुरुपयोग और विपक्ष का पूर्ण दमन। ये सभी कदम दुनिया भर में उठाए जा रहे हैं- कम से कम डोनाल्ड ट्रम्प के चुनाव के साथ- और हमें समझना चाहिए कि हम इसे कैसे रोक सकते हैं। ” अब अगर हम अपने देश को देखें तो यह उतना ही सत्य प्रतीत होता है जितना कि…
-विनोद बंसल   किसी राष्ट्र को समझना हो तो उसकी संस्कृति को समझना आवश्यक है. उसकी संस्कृति को समझने हेतु वहां की भाषा का ज्ञान भी आवश्यक है. विश्व के लगभग सभी देशों की अपनी अपनी राजभाषाएँ हैं जिनके माध्यम उनके देशवासी परस्पर संवाद, व्यवहार, लेखन, पठन-पाठन इत्यादि कार्य करते हैं. स्वभाषा ही व्यक्ति को स्वच्छंद अभिव्यक्ति, सोचने की शक्ति, विचार, व्यवहार, शिक्षा व संस्कार प्रदान करते हुए उसके जीवन को सुखमय व समृद्ध बनाती है. हम जितना अपनी मात्र भाषा में प्रखरता व प्रामाणिकता से अपने विचारों की अभिव्यक्ति कर सकते हैं उतना किसी अन्य भाषा में नहीं. हमें गर्व है कि विश्व की सर्वाधिक बोले जाने वाली भाषाओं में हिंदी का तीसरा स्थान हैं. तथा इसे बोलने वाले…
लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी जहाँ कोरोना वायरस देश भर में अपना क़हर बरपा रहा है और यूपी को अपनी ज़बरदस्त चपेट में लिए है वहीं यूपी के सियासी संग्राम का पारा भी सातवें आसमान पर है मुद्दा है ब्राह्मण।यूपी में एक बार फिर जातिवाद का माहौल बनाने का सियासी रहनुमाओं द्वारा प्रयास किया जा रहा उसको हवा सरकार भी दे रही है अब ज़मीन पर इसका क्या इफेक्ट होगा या हो रहा है इसी को रेखांकित करने का प्रयास हम भी कर रहे है।सियासी दलों में होड़ मची है अलग-अलग पार्टियों के नेता हर रोज़ मोदी की भाजपा की ठाकुर आदित्यनाथ योगी सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे है, देखते है वह कहाँ तक कामयाब होते है या योगी…
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