Sat11162019

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लेख - दिव्य इंडिया न्यूज़
तौसीफ़ क़ुरैशी  लोकसभा चुनाव में गठबंधन फेल होने के बाद बसपा की सुप्रीमो मायावती ने सपा मुखिया अखिलेश यादव से सियासी नाता तोड़ एकला चलो वाले फ़ार्मूले पर चलने का फ़ैसला लिया था जिसके बाद अखिलेश यादव ने भी मजबूरन एकला चलो पर ही चलने का रोड मैप बनाया जिसमें सपा को कामयाबी और मायावती को नाकामी मिली थी जिसके बाद से क़यास लगाए जा रहे थे कि अब बसपा में बड़े पैमाने पर बदलाव किया जाएगा वही हुआ भी| उपचुनावों में मिली करारी हार से सबक़ लेते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने संगठन में बहुत कुछ बदलाव किए हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान कुंवर दानिश अली को हटाने के फ़ैसले को भी वापस लिया, अब कुंवर दानिश अली लोकसभा…
कई संतों के गैर-लाभकारी कार्यों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता भले ही उनका जुड़ा व्यावसायिक उपक्रमों से ही हो। कई ने गरीब और अमीर लोगों के लिए एक जैसे शैक्षणिक संस्थान खोले हैं और रोजगार सृजन में योगदान दिया है। लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या भगवा वस्त्रधारी संत के लिए उचित है, जिन्होंने आध्यात्मिकता के कष्टप्रद मार्ग पर चलने के लिए भौतिकवादी जीवन को त्याग दिया। योग-गुरु बाबा रामदेव का उदाहरण लें। मेरी सीमित समझ के मुताबिक, आध्यात्मिक गुरू द्वारा उत्पादों को बढ़ावा देना, प्राचीन भारतीय लोकाचार और हिंदू धर्म की भावना के अनुरूप नहीं हैं। किसी भी मामले में, ऐसे प्रोडक्ट्स की धार्मिक ब्रांडिंग और मार्केटिंग आध्यात्मिक गुरुओं के फॉलोवर से आगे नहीं…
-एस.आर.दारापुरी आई.पी.एस (से.नि.)  दो वर्ष पहले जेएनयू में दुर्गा पूजा की अनुमति दिए जाने तथा महिषासुर पूजा की अनुमति न देने तथा लोकसभा में भी महिषासुर का सन्दर्भ आने के कारण महिषासुर का मुद्दा पुनः चर्चा में आया था. हम जानते हैं कि नवरात्र के दौरान दुर्गा के नौ अवतारों की नौ दिन तक बारी बारी पूजा की जाती है. इसी अवधि में दुर्गा की सार्वजानिक स्थलों पर मूर्तियों की स्थापना की जाती है जहाँ पर रात को तरह तरह के गाने व् भजन गाये जाते हैं और माता के भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा करते हैं और चढ़ावा चढाते हैं. नौ दिन के बाद दुर्गा मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है. यह देखा गया है कि पहले सार्वजानिक…
लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी  राज्य मुख्यालय लखनऊ।लोकसभा चुनाव में 12 विधायकों के सांसद बन जाने की वजह से और एक सीट पर विधायक को सजा हो जाने के कारण 13 विधानसभाओ के यूपी में उपचुनाव का बिगुल बज चुका है सबसे दिलचस्प चुनाव सहारनपुर की गंगोह विधानसभा पर देखने को मिलेगा क्योंकि वहाँ पर एक ऐसे परिवार के सियासी भविष्य का फ़ैसला होगा जो वहाँ की सियासत पर पिछले चालीस साल से राज कर रहा है वैसे तो 2012 के विधानसभा चुनाव से लेकर 2014 ,2017 ,2019 , तक इस परिवार को लगातार हार ही हार का सामना करना पड़ रहा है हम बात कर रहे है क़ाज़ी परिवार की जब तक क़ाज़ी रशीद मसूद इस परिवार को कमांड करते…
तौसीफ कुरैशी  राज्य मुख्यालय लखनऊ। बात 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद की है जब सपा के पूर्व मालिक एवं वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह यादव ने अपने लखते जिगर को यूपी जैसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री बनवाया था हालाँकि 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुलायम सिंह यादव ने इस बात की किसी को भनक तक भी नही लगने दी थी कि अगर सत्ता में सपा आती है तो मुलायम सिंह नही अखिलेश यादव के सर सजाया जाएगा ताज ऐसा ही हुआ सपा को सत्ता की चाबी मिली और मुलायम सिंह यादव ने अपना सियासी चरखा दांव चल सबको चौंका दिया चाहे वो उनके छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव हो या अन्य समाजवादी लेकिन फ़ैसला सपा के मालिक का था…
तौसीफ कुरैशी  राज्य मुख्यालय लखनऊ।साम्प्रदायिक सियासत का बोलबाला होने के बाद देश का सियासी परिदृश्य बदल गया है जो नेता या पार्टियाँ धर्मआधारित सियासत के खिलाफ चलती थी या चलते थे वह अब धर्मआधारित सियासत का चोला पहनने से नही हिचकिचा रहे है या रही है सियासी दलों में विचारधारा के कोई मायने नही रहे है सँपेरे की बीन के आगे सभी नाग नाच रहे है और सँपेरा नागों को अपने पिटारे में बंद किए जा रहा है। चाहे किसी भी दल की बात करो सबका यही हाल है कांग्रेस , सपा , वाईएसआर कांग्रेस , टीआरएस , बीजू पटनायक वाला बीजू जनता दल , बिहार के सुशासन बाबू का जनता दल यू व बसपा सहित सभी दल किसी न…
13 अगस्त - महारानी अहिल्या बाई होल्कर पुण्य तिथि पर विशेष लेख   विश्व की समस्याओं का समाधान - प्रदीप कुमार सिंह, लेखक  (1)भारत सांस्कृतिक विविधता के कारण एक लघु विश्व का स्वरूप धारण किये हुए हैं। भारत की सांस्कृतिक विविधता ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का सन्देश देती है अर्थात सारी वसुधा एक विश्व परिवार है। भारत की महान नारी लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर ने लोक कल्याण की भावना से होलकर साम्राज्य का संचालन हृदय की विशालता, असीम उदारता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर बड़ी ही कुशलतापूर्वक किया। 70 वर्ष की आयु में अहिल्याबाई की महान आत्मा 13 अगस्त 1795 को नश्वर देह से निकलकर अखिल विश्वात्मा में विलीन हो गयी। भारत सरकार से मेरी अपील है कि वह लोकमाता अहिल्याबाई…
राजनाथ शर्मा (समाजवादी चिन्तक)  इतिहास के पन्नों में नौ अगस्त का यह दिन महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में जाना जाता है। जबकि यही एक ऐसा दिन है जो देश की जनता को समर्पित है। डाॅ. राममनोहर लोहिया ने मुम्बई के स्वतंत्रता सेनानी जी.जी पारिख को लिखे पत्र में कहा था कि ‘15 अगस्त राज का दिवस है। 9 अगस्त जन दिवस है। कोई एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब नौ अगस्त के सामने पन्द्रह अगस्त फीका पड़ेगा और भारतीय अमेरिका व फ्रांस के 4 और 14 जुलाई, जो जन दिवस है, की तरह 9 अगस्त मानएंगे। यह भी हो सकता है कि हिन्दुस्तानी कभी अपना बंटवारा खत्म करें और उसी के साथ-साथ या उससे पहले 15 अगस्त को भूल जाने…
एक महीने से भी कम समय में दिल्ली ने अपने दो पूर्व मुख्यमंत्रियों और देश ने अपनी दो प्रखर महिला नेताओं को खो दिया को खो दिया . 20 जुलाई को दिल्ली की सबसे लंबे अंतराल तक मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित का निधन हुआ तो महज़ दो हफ़्ते बाद दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज भी चल बसीं. 14 फ़रवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला कैंट में जन्मी सुषमा स्वराज ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1970 के दशक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी. उनके पिता हरदेव शर्मा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख सदस्य थे. अम्बाला छावनी के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और राजनीतिक विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई करने के बाद सुषमा ने…
नरेन्द्र सिंह राणा  छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता और टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता यह बात भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भाजपा के संस्थापक अटल बिहारी बाजपेयी ने अपनी कविता में कहीं है। वह नायक है। अभिभावक है। मन की बात करते हैं। मुदित मन वाले है भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी। भारत की संसद में अपने कर्माें के कारण सिमट चुका विपक्ष हो हल्ला कर रहा था मोदी जी को आना चाहिए सदन में बयान देना चाहिए। हम विदेश मंत्री के बयान से संतुष्ट नहीं है। बताते चले कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सफेद झूठ बोला कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने उनसे काश्मीर मुद्दे पर मध्यस्ता करने की बात…
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