Tue01192021

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लेख - दिव्य इंडिया न्यूज़
तौसीफ़ क़ुरैशी सबका ख़ुलूस सबकी इनायत हमें मिली हम ख़ुश नसीब है कि मोहब्बत हमें मिली और वो मुसलमान थे जिन्हें CAA के विरोध करने पर आतंकवाद से जोड़ दिया गया था हम तो किसान है हमारे साथ यह खेल नहीं चलेगा हमने बहुत सरकारें बनाईं है और बहुत सरकारें हटाईं है सरकारें हम से है हम सरकारों से नहीं हमें बड़े-बड़ों को सीधा करना आता है।देश का किसान आर-पार लड़ाई लड़ने की तैयारी में क्या मुक़ाबला कर पाएगी मोदी सरकार या पीछे हटेंगी ?।अड़ानी अंबानी समूहों के हक में किसानों के लिए बने तीनों विवादित क़ानूनों के बाद आंदोलनरत किसान शायद इन्हीं अल्फ़ाज़ों से अपनी बात कहना चाह रहे हैं हालाँकि मोदी सरकार एवं RSS ने बहुत कोशिश की…
धमेन्द्र सिंह अभी हाल ही में मोदी जी ने वाराणसी दौरे के समय अपनी सरकार द्वारा लाए कृषि कानूनों पर बात रखते हुए वाराणसी से अलग होकर बने चंदौली जनपद के किसानों द्वारा काला चावल प्रजाति के चावल की खेती के अनुभव बताते हुए कहा कि इसके निर्यात से चंदौली के किसान मालामाल हो गए. पीएम मोदी के दावे को जमीनी हकीकत खारिज करती है. जिस चंदौली जनपद के किसानों के विकास के कसीदे मोदी जी पढ़ रहे थे वह जनपद नीति आयोग के अनुसार देश के सर्वाधिक पिछले जनपदों में एक है. प्रदेश सरकार ने जब वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट की बात शुरू की तो चंदौली जनपद में शुगर फ्री चावल के नाम पर चाको हाओ यानि काला चावल…
कमलेश सिंह   आज जहां दुनिया टेक्नोलॉजी / साइंस, व्यवसाय आदि में  कामयाबी हासिल कर रही है वही हमारी सरकार सिर्फ सिर्फ लव जिहाद (कथित धर्म परिवर्तन) को रोकने पर आतुर है. किसी अन्य क्षेत्र पर क्यों कोई बात नहीं हो रही, हमारे पास शिक्षा पर काम करने के लिए कोई मुद्दा नहीं है, रोजगार, स्वास्थ्य पर बात करने का समय नहीं है. पर आरएसएस के प्रोजेक्ट पर काम कर रही सरकार नए धर्मांतरण विरोधी कानून को लाकर लव जिहाद पर समाज में बात करा रही है. सरकार यह दिखा रही है कि हम सिर्फ धर्म बचाने का ठेका लेकर पैदा हुए हैं.  धर्म जो व्यक्ति का निजी मामला है और हर कोई इसे मानने या न मानने के लिए…
एस आर दारापुरी आईपीएस (सेवानिवृत्त) राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट   लेखक, स्टीवन लेविट्स्की और डैनियल ज़िब्लाट ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “हाउ डेमोक्रेसीज़ डाई: व्हाट हिस्ट्री रिवीलज़ फ़ॉर फ्यूचर” में कहा है कि “डेमोक्रेसी तख्तापलट के साथ मर सकती हैं- या वे धीरे-धीरे मर सकती हैं। यह एक भ्रामक रूप में धीरे धीरे होता है, एक तानाशाह नेता के चुनाव के साथ, सरकारी सत्ता का दुरुपयोग और विपक्ष का पूर्ण दमन। ये सभी कदम दुनिया भर में उठाए जा रहे हैं- कम से कम डोनाल्ड ट्रम्प के चुनाव के साथ- और हमें समझना चाहिए कि हम इसे कैसे रोक सकते हैं। ” अब अगर हम अपने देश को देखें तो यह उतना ही सत्य प्रतीत होता है जितना कि…
-विनोद बंसल   किसी राष्ट्र को समझना हो तो उसकी संस्कृति को समझना आवश्यक है. उसकी संस्कृति को समझने हेतु वहां की भाषा का ज्ञान भी आवश्यक है. विश्व के लगभग सभी देशों की अपनी अपनी राजभाषाएँ हैं जिनके माध्यम उनके देशवासी परस्पर संवाद, व्यवहार, लेखन, पठन-पाठन इत्यादि कार्य करते हैं. स्वभाषा ही व्यक्ति को स्वच्छंद अभिव्यक्ति, सोचने की शक्ति, विचार, व्यवहार, शिक्षा व संस्कार प्रदान करते हुए उसके जीवन को सुखमय व समृद्ध बनाती है. हम जितना अपनी मात्र भाषा में प्रखरता व प्रामाणिकता से अपने विचारों की अभिव्यक्ति कर सकते हैं उतना किसी अन्य भाषा में नहीं. हमें गर्व है कि विश्व की सर्वाधिक बोले जाने वाली भाषाओं में हिंदी का तीसरा स्थान हैं. तथा इसे बोलने वाले…
लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी जहाँ कोरोना वायरस देश भर में अपना क़हर बरपा रहा है और यूपी को अपनी ज़बरदस्त चपेट में लिए है वहीं यूपी के सियासी संग्राम का पारा भी सातवें आसमान पर है मुद्दा है ब्राह्मण।यूपी में एक बार फिर जातिवाद का माहौल बनाने का सियासी रहनुमाओं द्वारा प्रयास किया जा रहा उसको हवा सरकार भी दे रही है अब ज़मीन पर इसका क्या इफेक्ट होगा या हो रहा है इसी को रेखांकित करने का प्रयास हम भी कर रहे है।सियासी दलों में होड़ मची है अलग-अलग पार्टियों के नेता हर रोज़ मोदी की भाजपा की ठाकुर आदित्यनाथ योगी सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे है, देखते है वह कहाँ तक कामयाब होते है या योगी…
देश में अगले 50 वर्षों में किस तरह की शिक्षा होनी चाहिए, इसको लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) ने व्यापक दृष्टिकोण रखा है। एनईपी 2020 में अधिकांश बातें प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के शिक्षण, सीखने और नियामक ढांचे में कई बदलावों पर केंद्रित किए गए है। जहां तक उच्च शिक्षा का संबंध है, केंद्रीय स्तर पर नियामकों का केंद्रीकरण, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के लिए अधिक शैक्षणिक और प्रशासनिक स्वतंत्रता और अधिक उदार शिक्षा प्रणाली में सुधारों का स्वागत किया गया है। हालाँकि, भारत में शिक्षा के बारे में सबसे बड़े और शायद सबसे बुनियादी सवाल का जवाब देने से विशेषज्ञ और एनपीई बच रही है कि इस नीति में फंड कहां से दिया जाएगा?  1968 में लाए गए राष्ट्रीय…
ज़ीनत क़िदवाई 31 जून को लॉकडाउन 4 समाप्त हुआ और 8 जून से अनलॉक 1 शुरू होने की घोषणा हुई, बीच का एक हफ्ता इसकी तैयारियों के लिए रखा गया और लोगों को काफी छूट मिली| इस घोषणा के साथ ही हमारी अपनी ज़िम्मेदारी भी बढ़ गयी है क्योंकि अब सरकार ने नियम बता दिए हैं कि आपको कैसे रहना है भले वह संभव हो या न हो लेकिन आपको उनका पालन करना है वरना मरना है| सरकार आपके संक्रमित होने की ज़िम्मेदार नहीं होगी | इसलिए सावधानी के साथ नियमों का पालन करें | सरकार ने 25 मार्च को लॉकडाउन किया, सबकुछ बंद होने के बाद भी कोरोना के केस, जिनकी संख्या 25 मार्च को 564 थी आज बढ़कर…
ज़ीनत क़िदवाई भारत और नेपाल के बीच सम्बन्ध अनादिकाल से हैं | दोनों पड़ोसी देश हैं और इसके साथ ही दोनों देशों की धार्मिक, सांस्कृतिक, भाषाई और ऐतिहासिक स्थिति में बहुत अधिक समानता है | भारत और नेपाल ने अपने विशेष संबंधों को 1950 में शान्ति एवं मैत्री संधि से नई दिशा दी | परन्तु इस समय भारत और नेपाल के बीच लिपियाधुरा, लिपुलेख और काला पानी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है | यह विवाद 8 मई को देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा एक सड़क के निर्माण के उद्घाटन के बाद और बढ़ गया | अब नेपाल ने अपना नया नक्शा बनाया है जिसमें इन तीनों क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा बताया है जो पहले से…
स्वच्छ हवा के लिए देशव्यापी आंदोलन, 12 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता ने सालभर साफ हवा के लिए उठाई आवाज़ दिल्ली: लॉकडाउन खुलते ही देशभर में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है. कुछ दिन राहत की सांस लेनेवाले भारतीय एक बार फिर घुटन वाले माहौल में जीने के लिए विवश हो रहे हैं. हाल ही में आईआईटी दिल्ली के एक अध्ययन में कहा गया है कि अगर लॉकडाउन के दौरान भारत के कम प्रदूषण के स्तर को बनाए रखा जाता है, तो यह देश की मृत्यु दर में 6.5 लाख की कमी ला सकता है. यही वजह है कि पर्यावरण को लेकर चिंतित आम आदमी और संस्थाएं आगे आ रही हैं. साफ हवा को बनाए रखने के लिए वह भारत सरकार से…
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