Wed04012020

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धर्मकर्म - दिव्य इंडिया न्यूज़
लखनऊ: गुरूद्वारा आलमबाग में नानक शाही कैलेन्डर के अनुसार सिक्ख धर्म में मान्य नव वर्ष मनाया गया। यू तो गुरमति में सभी दिन एक होते है किन्तु सामाजिक रूप से एक जुटता को दृष्टिगत रखते हुये कुछ कार्यक्रम आवश्यक प्रतीत होते है चूकि आज संक्राति भी थी। अतः भारी संख्या में श्रुद्धालुओ ने कीर्तन, कथा का आन्नद प्रान्त किया और लगंर भी छका। सोई दिवस सुहावा जित प्रभु आवै चित। जिे दिन विसरै पारबृहम फिर भलेी रूत।। मीडिया प्रभारी हरजीत सिंह ने बताया कि प्रधान जोगिन्दर सिंह एवं कमेटी के सभी सदस्यो ने साध-संगत को नव-वर्ष एवं संक्राति की बधाई दी। आज के कार्यक्रम में निर्मल सिंह, हरजीत सिंह, रतपाल सिंह गोल्डी, त्रिलोचन सिंह, कृपाल सिंह, तरनजीत सिंह, प्रभजोत सिंह,…
लखनऊ: हैल्प यू एजुकेशनल एवं चैरिटेबल ट्रस्ट ने आज  हनुमान मन्दिर, हनुमान सेतु, लखनऊ विश्वविद्यालय के सामने ”हेल्प यू संजीवनी भजन संध्या” का आयोजन किया। यह कार्यक्रम हेल्प यू जलोटा अकादमी आॅफ स्प्रिचुअल म्यूजिक की तरफ से प्रत्येक शनिवार को प्रस्तुत किया जाता है। ”हेल्प यू संजीवनी हनुमान भजन संध्या” में भजन सम्राट पद्मश्री श्री अनूप जलोटा जी के अनुयायी गायक अल्का निवेदन, चाहत मल्होत्रा, कमाल खाॅान,  यामिनी सिंह, कीर्ति मिश्रा, प्रदीप अली, जया श्रीवास्तव, प्रीतीलाल, सुनील जयसवाल, सतीष चन्द्र गुप्ता, विवेक वर्मा, संगीता श्रीवास्तव, ने अपने भजनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अल्का निवेदन होली खेले रघुवीरा अवध में, चाहत मल्होत्रा सत्यम षिवम सुन्दरम, कमाल खाॅान जय गिरधारी सुन्दर ष्याम हरि / तेरे तन में राम मन मे…
लेखक: मंज़ूर परवाना, अनुवादक: तौकीर अहमद सिदीकी वर्तमान काल को  विकास का दौर कहा जा रहा है। इस संबंध में भौतिक पदोन्नति का सन्दर्भ दिया  जा रहा है लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। क्योंकि विकास के इस दौर में नैतिक मूल्यों का जितना पतन हुआ है वह पहले कभी नहीं था। आज हर व्यक्ति परेशान है। उसकी ज़बान पर जमाने का शिकवा है। वास्तव में यह दौर  न केवल असाधारण और विचित्र है बल्कि अत्यंत पीड़ादायक भी है। इस काल में हम अपने जीवन को बिना सोचे समझे इस तरह गज़ार रहे हैं जिस तरह बेजान गुब्बारे हवा के रुख पर उड़ते हैं। हालांकि हम अपने को गर्व से मुसलमान कहते हैं, लेकिन हमारे क्रिया कलाप इसके खिलाफ गवाही…
हेल्प यू जलोटा अकादमी आॅफ स्प्रिचुअल म्यूजिक की तरफ से भजन संध्या का आयोजन  लखनऊ: हैल्प यू एजुकेशनल एवं चैरिटेबल ट्रस्ट ने आज  हनुमान मन्दिर, हनुमान सेतु, लखनऊ विश्वविद्यालय के सामने ”हेल्प यू संजीवनी भजन संध्या” का आयोजन किया। यह कार्यक्रम हेल्प यू जलोटा अकादमी आॅफ स्प्रिचुअल म्यूजिक की तरफ से प्रस्तुत किया गया। इस ”हेल्प यू संजिवनी भजन संध्या” में  भजन गायिका पूनम बाजपेई की विशेष प्रस्तुति रही, भजन संध्या में बाजपेई ने अपने भक्ति गीतों से भक्त गणों को भजन में डूबो दिया। श्रीमती पूनम बाजपेई जी ने- बोलो सदा जयकार पवन पुत्र महाबली की, जरा चलकर वृन्दावन देखो, प्रभु आपकी कृपा से सब काम हो रहा है, मैं तो खेलुंगी श्याम संग होली तथा आज बृज में…
नई दिल्ली| अआपने नवरात्रि व गणेश चतुर्थी पर देखा होगा कि लोग देवी देवताओं की मूर्तियां बड़े ही आदर के साथ अपने घर लाते हैं और उसकी पूजा करते हैं बाद में किसी नदी या तालाब में ले जाकर विसर्जित कर देते हैं| क्या कभी आपने यह सोंचा है कि आखिर देवी देवताओं की प्रतिमा को लोग जल में ही क्यों विसर्जित करते हैं? इसको लेकर हमारे ज्योतिषाचार्य विजय कुमार बताते हैं कि इसका उत्तर शास्त्रों में है। शास्त्रों के अनुसार, जल को ब्रह्म का स्वरुप माना गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि सृष्टि के आरंभ में और अंत में संपूर्ण सृष्टि में सिर्फ जल ही जल होता है। जल बुद्घि और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इसके देवता गणेश…
लखनऊ: विद्या, बुद्धि और संगीत की देवी सरस्वती की पूजा पूरे शहर में मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ की जा रही है। महिलाएं पारंपरिक पीले रंग की साड़ी में नजर आईं, जबकि बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। लोगों ने देवी को फूल अर्पित किया और एकदूसरे को प्रसाद बांटे। शहर में देवी की मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिसमें वह हंस और कमल पर सवार हैं, उन्हें फल, फूल और मिठाइयां अर्पित की जा रही हैं। लखनऊ में अलग-अलग स्थानों में छोटे-छोटे शामियानों में देवी की प्रतिमाएं बिठाई गई हैं और यहां श्रद्धालु उमड़ आए हैं।पूजा की शुरुआत सुबह से ही हो गई है और यह स्कूल, कालेजों, सामुदायिक क्लबों और घरों में दोपहर तक चलेगी।…
  बसंत पंचमी का पर्व हिंदू धर्म का  एक बहुत ही महान पर्व है। इस पर्व का हिंदू संस्कृति व धर्म में विषेष महत्व है। यह पर्व अपने आप में कई मनोहारी प्राकृतिक परिवर्तनों को तो संजोए हैं ही साथ ही यह पर्व अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए भी प्रसिद्ध है। बसंत पंचमी पर जहां ऋतु परिवर्तन होता है वहीं धर्मप्राण जनता मां सरस्वती की आराधना करती है। वहीं अन्य लोग वीर हकीकत राय व रामसिंह कूका को नमन करते है। साहित्य प्रेमी जनता इस पर्व को निराला जयंती के रूप मे भी मनाती है। बसंत पंचमी पर्व पर होलिका दहन के लिए स्थान- स्थान पर हालिकाएं भी स्थापित हो जाती हैं जिससे यह संकेत प्राप्त होता है कि अब होली…
4 फरवरी : वसंत पंचमी, स्वामी स्वरूपा आनंद जी की जयंती (श्री निजात्म प्रेमधाम आश्रम हरिद्वार), मेला वसंत पंचमी (बिलासपुर-हिमाचल); 5 बुधवार : सूर्योदय से पहले प्रात: 4 बजकर 28 मिनट पर पंचक समाप्त, दरिद्र हरण षष्ठी व्रत. 6 वीरवार : रथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी, भानु (सूर्य) सप्तमी, पुत्र सप्तमी, अचला सप्तमी, मर्यादा महोत्सव (जैनपर्व); 7 शुक्रवार: श्री दुर्गा अष्टमी, श्री भीष्म अष्टमी व्रत (श्री भीष्म पितामह का श्राद्ध, तर्पण); 8 शनिवार : श्री महानंदा नवमी व्रत; 9 रविवार : रवि दशमी पर्व, दामोदर प्राकट्य उत्सव वृंदावन; 10 सोमवार : जया एकादशी व्रत, भक्त श्री पुंडरीक जी का उत्सव (पंढरपुर, महाराष्ट्र), शहीदी दिवस मेला बाबा दीप सिंह जी शहीद (सोलखियां, रोपड़), सतगुरु श्री राम सिंह जी का जन्म उत्सव (नामधारी…
हाथ में तानपूरा, होठों पे नारायण - नारायण और वही खबरनवीसी का काम।जाने कहां से टहलते-घूमते आपके चरन भारत मैया की धरती पर आटिके। तनिक देर में हीनारायनी शक्ति केबल पर आपने खबरनवीसी के  हायटेक टेक्नोलॉजी की महत्ता समझली। इस टेक्नोलॉजी की महत्तासे घबराकर बेचारे पतली गली ढूंढ़ ही रहे थे कि एक उपकरणों से लैस पत्रकार के हाथों धरे गये। देखते ही पत्रकार मुस्कराकर बोला, क्या हल है तानपुरा मास्टर ? बेचारे नारद जी पत्रकार की स्टाइल से सिटपिटा गए। संभल के बोले अरे बोलने की गरिमा रखो। गरिमा को बांधो, कंधे पर पड़े अंगोछे में मिस्टर जानते नहीं हमारे सर पे किसका हाथ है। अब तो नारद और सिटपिटाये, सोचा कहीं इसने भोले की भक्ति करके कोई वरदान - सरदान का मालिक न बन बैठा हो।डरते - सहमते पूछा किसका हाथ है आपके सर पर ? 2 मिमी. के मूछ के बाल को सहलाते हुए बोला पत्रकार दिल्ली की नई नवेली सरकार का। दिल्ली का नाम सुनकर नारद जी कि बची-खुची हवा भी निकल गई।  भागने की जुगत में बोले अच्छा चलता हूं। पर पत्रकार तो अपने नशे में था, इसी नशे में डोलता बोला। अरे यहां आये तो कुछ मांग लो। बेचारे नारद जी, पिंड छुड़ाने की गरज़ से बोले, अब  क्या मांगू साहब, आप तो महाज्ञानी हैं जो उचित समझें, दे दें।  नारद की बात सुनकर वो तनिक सोचकर बोला, कुछ  भी तुमने खबर नवीसी का काम किया, सो आप  हमारी बिरादरी के ठहरे इसलिए हम आपको पत्रकारिता का आशुतोष सम्मान प्रदान करते हैं। शाल, प्रशस्ति पत्र और नोटों का लिफाफा लेकर नारद…
मकर संक्रांति से रथ सप्तमी तक का काल पर्वकाल होता है। इस पर्वकाल में दान एवं पुण्य के कर्म विशेष फलदायी होते हैं। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक संक्रांति में तीर्थ स्नान पुण्यकाल होता है। मकर संक्रांति के काल में तीर्थ स्नान का विशेष महत्व है। गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा व कावेरी नदियों के तीर पर बसे क्षेत्रों में स्नान करने से महापुण्य का लाभ मिलता है। मकर संक्रांति के समय तीर्थ क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती हैं। ऐसा माना जाता है कि संक्रांति देवी जिसे स्वीकार करती हैं, उसके पापों का नाश होता है। इस दिन तिल का तेल व उबटन शरीर पर लगाना, तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल मिश्रित पानी पीना, तिल होम, तिल का…