Mon09242018

ताज़ा खबरें :
Back You are here: Home ब्लाग
ब्लाग - दिव्य इंडिया न्यूज़
लोकल से लेकर अब राज्य मुख्यालय लखनऊ की पत्रकारिता के सफ़र में पत्रकारिता के अपने पच्चीस साल के जीवन में कभी ऐसी पत्रकारिता नही देखी जिसमें सच को झूठ और झूठ को सच बनाकर पेश किया जाता हो देश की अमन पसंद जनता को हिन्दु-मुसलमान में बाँटने का षड्यंत्र रचा जाता हो, बेरोज़गारी महँगाई बढ़ते अपराध व महिलाओं की लूटती अस्मत को पीछे धकेला जाता हो और ऐसी पत्रकारिता के कार्य को अंजाम देने वाला अपनी इस बेशर्मी पर ख़ुद छाती पीटता हो| लानत हो ऐसी पत्रकारिता और उन पर जो इस पवित्र कार्य को गंदा करने का काम कर रहे हैं ...हमने कभी इसका सर झुकने नही दिया चाहे इसके लिए क़ुर्बानी कुछ भी चुकानी पड़ी पर उसके उसूलों…
मृत्युंजय दीक्षित  आजादी के 70 साल बाद एक बार फिर भारतीय राजनीति में भारतीय राजनीति के महाखलनायक जिन्ना का जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। जिन्ना के इस जिन्न का वहीं स्वरूप है जो आजादी से पहले और बंटवारे के समय था। बस अंतर यह है कि उस समय जिन्ना जिनका पूरा नाम मोहम्मद अली जिन्ना था जीवित तथा और उसने अपनी मौजमस्ती के लिये अंग्रेज शासकों के बहकावे में आकर दो दिलों के बीच बेहद गहरी और अंतहीन खाई को पैदा करते हुए 10 लाख हिंदुओं की लाशों पर चलते हुए भारत का विभाजन करा दिया था और अपनी जिदद के चलते एक कटटर मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान का निर्माण करा दिया था। यही पाकिस्तान आज भी भारत व…
रविश अहमद **इक आह भरी होगी, तुमने न सुनी होगी** **जाते जाते उसने आवाज़ तो दी होगी।।** मशहूर ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह की गायी ग़ज़ल का यह मिसरा आज  एक मासूम बच्ची के लिये न्याय की मांग कर रहे लोगों की तख़्तियों का स्लोगन बना है। वाकई क्या गुज़री होगी सिर्फ 8 साल की बच्ची पर। मासूमियत की उम्र में किसका गुस्सा झेला है उस बच्ची ने, कौन लोग असल ज़िम्मेदार हैं उस छोटी बच्ची पर हुए ज़ुल्म के? क्या सिर्फ वो हैवान जिन्होने यह बर्बर कुकृत्य अन्जाम दिया है या फिर वो लोग जो लगातार समाज में नफरतों के बोये बीजों को सींच रहे हैं। याद रखिये यह किसी के साथ भी हो सकता है वो तो मर गयी…
रविश अहमद  गत वर्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभिभावकों एवं शिक्षकों का हित ध्यान में रखते हुए एक निर्देश जारी किया था जिसके क्रम में जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा दिनांक 01-04-2017 को सभी प्राइवेट स्कूल संचालकों को आदेश जारी किये जिसमें लगभग क्रमवार वही सभी बिन्दु थे जो हाल के योगी सरकार कैबिनेट निर्णय में हैं लेकिन किसी एक भी संस्थान द्वारा न तो इन निर्देशों का पालन किया गया न ही किसी अधिकारी द्वारा इस आदेश पर कोई मॉनिटरिंग या कोशिश ही की गयी। यहां तक कि शिक्षा विभाग सहारनपुर के एक सक्षम अधिकारी ने तो गत वर्ष के आदेश के सम्बन्ध में यहां तक कहा कि ये स्कूल हमारे अंडर नही आते हैं और निर्देश तो ऐसे ही…
रविश अहमद  उत्तर प्रदेश के 1.72 लाख रोज़गार प्राप्त नौजवान अब योगी सरकार की मेहरबानी के चलते 10,000 रू प्रतिमाह लेकर काम कर रहे हैं, जबकि इसी पौने दो लाख शिक्षकों की संख्या से विशिष्ट बीटीसी कराकर समायोजित किये गये करीब 1 लाख 35 हजार शिक्षा मित्र सहायक अध्यापक नियुक्त किये गये थे और सहायक अध्यापक के बराबर ही तनख़्वाह भी मिल रही थी कि इलाहबाद हाईकोर्ट के आदेश ने उनकी पटरी पर दौड़ती गाड़ी को उतार दिया। उन सबके लिये यह ज़िन्दगी से हुए खिलवाड़ से कम नही कहा जा सकता। सभी उलझे हुए आस लगाये हैं कि सुप्रीम कोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिका शायद इन सबको संजीवनी दे और यें सब फिर से अपना वह सम्मान प्राप्त कर…
-आशीष वशिष्ठ   यूपी में राज्यसभा के लिए हुए चुनाव में बीजेपी ने बसपा और सपा की नयी नवेली दोस्ती केा जोर से झटका देने का काम किया है। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में हार के झटके के बाद बीजेपी के लिए राज्यसभा चुनाव के नतीजे राहत का सबब माने जा रहे हैं। बसपा ने सपा, कांग्रेस और रालोद विधायकों के भरोसे अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा था। बीजेपी को आठ सीटें मिलना तो पहले से तय था। वहीं सपा की भी एक सीट पक्की थी। 10वीं सीट के लिए ही पूरा महाभारत हुआ था। यहां बीजेपी के अनिल अग्रवाल और बसपा के भीमराव अंबेडकर में खिताबी मुकाबला था। क्रॉस वोटिंग और विधायकों के पाला बदलने की वजह से…
-फ़िरदौस ख़ान  देश की राजधानी दिल्ली में जिस तेज़ी से आबादी बढ़ रही है, उस हिसाब से बुनियादी सुविधाओं को जुटाना कोई आसान काम नहीं है। इस आबादी में देश के अन्य राज्यों से आए लोगों की भी एक बड़ी संख्या है। आबादी को रहने के लिए घर चाहिए, रोज़गार चाहिए, बिजली-पानी चाहिए, शैक्षिक, स्वास्थ्य व परिवहन की सुविधाएं चाहिएं। यानी घर-परिवार के लिए सभी बुनियादी सुविधाएं चाहिएं। जनता को ये सब सुविधाएं मुहैया कराने की ज़िम्मेदारी सरकार की है, प्रशासन की है। इसके लिए एक योजना की ज़रूरत होती है, एक मास्टर प्लान की ज़रूरत होती है। किसी भी शहर के सतत योजनाबद्ध विकास का मार्गदर्शन करने के लिए एक योजना होती है। इस मास्टर प्लान को बनाते वक़्त…
-फ़िरदौस ख़ान  उत्तर प्रदेश और बिहार में लोकसभा और विधानसभा के उपचुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा और बिहार की अररिया लोकसभा सीटों के लिए 11 मार्च को मतदान होना है। इसी दिन बिहार की जहानाबाद और भभुआ विधानसभा सीटों के लिए भी वोट डाले जाएंगे। चुनाव नतीजे 14 मार्च को आएंगे। सियासी दलों ने इन चुनावों में जीत हासिल करने के लिए कमर कस ली है। ये उप चुनाव जहां प्रतिष्ठा का सवाल बने हुए हैं, वहीं अगले साल होने वाले आम चुनाव के लिहाज़ से भी अहम माने जा रहे हैं। सियासी दलों का मानना है कि ये चुनाव साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव का रुख़…
फ़िरदौस ख़ान  वक़्त कैसे बीतता है, पता ही नहीं चलता। कल की ही सी बात लगती है। अब फिर से आम चुनाव का मौसम आ गया। अगले ही बरस लोकसभा चुनाव होने हैं। सभी सियासी दलों ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। अवाम में भी सरग़ोशियां बढ़ गई हैं। सबकी ज़ुबान पर यही सवाल है कि अगली बार किसकी सरकार आएगी। क्या भारतीय जनता पार्टी वापसी करेगी? अवाम ने जिन अच्छे दिनों की आस में भाजपा को चुना था, वो तो अभी तक नहीं आए और न ही कभी आने की उम्मीद है। ऐसे में क्या अवाम भाजपा को सबक़ सिखाएगी और देश की बागडोर एक बार फिर से कांग्रेस को सौंपेगी? अवाम कांग्रेस को चुनेगी, तो कांग्रेस…
फ़िरदौस ख़ान केन्द्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अगले साल होने वाले आमसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। वह पिछली बार की तरह 2019 के लोकसभा चुनाव में भी अच्छा प्रदर्शन करना चाहती है। इसके लिए पार्टी चुनावी रणनीति भी बना रही है, लेकिन उसके लिए आम चुनाव की राह उतनी आसान नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह है भारतीय जनता पार्टी सरकार की वादा ख़िलाफ़ी। साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने जो लोक लुभावन नारे दिए थे, जिनके बूते पर उसने लोकसभा चुनाव की वैतरणी पार की थी, अब जनता उनके बारे में सवाल करने लगी है। जनता पूछने लगी कि कहां हैं, वे अच्छे दिन जिसका इंद्रधनुषी सपना भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें दिखाया…
Page 1 of 4