Wed06032020

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लेख - दिव्य इंडिया न्यूज़
ज़ीनत क़िदवाई भारत और नेपाल के बीच सम्बन्ध अनादिकाल से हैं | दोनों पड़ोसी देश हैं और इसके साथ ही दोनों देशों की धार्मिक, सांस्कृतिक, भाषाई और ऐतिहासिक स्थिति में बहुत अधिक समानता है | भारत और नेपाल ने अपने विशेष संबंधों को 1950 में शान्ति एवं मैत्री संधि से नई दिशा दी | परन्तु इस समय भारत और नेपाल के बीच लिपियाधुरा, लिपुलेख और काला पानी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है | यह विवाद 8 मई को देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा एक सड़क के निर्माण के उद्घाटन के बाद और बढ़ गया | अब नेपाल ने अपना नया नक्शा बनाया है जिसमें इन तीनों क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा बताया है जो पहले से…
स्वच्छ हवा के लिए देशव्यापी आंदोलन, 12 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता ने सालभर साफ हवा के लिए उठाई आवाज़ दिल्ली: लॉकडाउन खुलते ही देशभर में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है. कुछ दिन राहत की सांस लेनेवाले भारतीय एक बार फिर घुटन वाले माहौल में जीने के लिए विवश हो रहे हैं. हाल ही में आईआईटी दिल्ली के एक अध्ययन में कहा गया है कि अगर लॉकडाउन के दौरान भारत के कम प्रदूषण के स्तर को बनाए रखा जाता है, तो यह देश की मृत्यु दर में 6.5 लाख की कमी ला सकता है. यही वजह है कि पर्यावरण को लेकर चिंतित आम आदमी और संस्थाएं आगे आ रही हैं. साफ हवा को बनाए रखने के लिए वह भारत सरकार से…
ज़ीनत क़िदवाई  रमज़ान के पवित्र माह में उपवास के बाद उपहार स्वरुप ईद मनाई जाती है | महीना भर लोग खुदा की इबादत करते हैं | इसबार कोरोना के कारण ईद भी महामारी से उपजे नियमों और क़ानून के बंधन में जकड गयी है | मस्जिदें बंद हैं , इफ्तार पार्टियां बंद हैं और लोग सामूहिक रूप में कोई कार्य नहीं कर रहे  इसलिए तरावीह भी घरों में पढ़ी गयी है और सोशल डिस्टेंसिंग कानून के चलते ईद की नमाज़ भी घरों में ही पढ़ी जाएगी | पहले लोग इकठ्ठा होकर ईदगाह और मस्जिदों में ईद की नमाज़ पढ़ते थे और नमाज़ पढ़ने के बाद गले मिलकर एक दूसरे को ईद की बधाई देते थे थे जो अब सोशल डिस्टैन्सिंग…
राजेश सचान कोविड-19 महामारी के जारी प्रकोप के बीच मोदी सरकार ने विगत 17 अप्रैल 2020 को इलिकट्रीसिटी संशोधन बिल 2020 का ड्राफ्ट पब्लिक ओपिनियन के लिए पेश किया है। पावर सेक्टर में जारी सुधार की प्रक्रिया को गति प्रदान करना इसका प्रमुख उद्देश्य बताया जा रहा है। इस बिल में कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं: टैरिफ दर का युक्तिसंगत, उर्जा नवीनीकरण पर जोर, बिजली वितरण क्षेत्र में डिस्ट्रीब्यूशन सब-लाइसेंस और फ्रेंचाइजी, बिजली का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, सब्सिडी और क्रास सब्सिडी को खत्म करने जैसे हैं। अगर इसे सामान्य भाषा में कहें तो इसका मतलब यह होगा कि यह बिल डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनी) के निजीकरण के लिए प्रक्रिया आसान करेगा। अभी जो डिस्कॉम में पब्लिक सेक्टर का एकाधिकार है…
ज़ीनत शम्स मदर्स डे मनाने का विचार सन 1870 में अमेरिका की जूलिया होव को आया था| हर वर्ष वह मदर्स डे मनाकर महिलाओं को प्रोत्साहित करती थीं| दस वर्षों तक जूलिया अपने खर्च से मदर्स डे मनाती रहीं | 8 मई 1914 से अमेरिका में मदर्स डे मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाने लगा, आज यह पूरे विश्व में मनाया जाता है| आज के युग की महिलाऐं 19 वीं सदी की महिलाओं से बहुत आगे हैं| पहले महिलाओं को सिर्फ घर संभालना होता था, अब घर और बाहर दोनों संभालना पड़ता है | पहले दौर की महिलाऐं नौकरी या रोज़गार नहीं करती थीं या बहुत कम करती थी इसलिए उनके लिए बच्चों की परवरिश करना आज के…
**सवाल किससे होने चाहिए? क्या मीडिया को अधिकार है कि वह भाषाई शालीनता भी लांघ जाए?** **(पवन सिंह)** सवाल अलबत्ता पूछे ही कहां जा रहे हैं? महालेखाकार परीक्षक की रिपोर्ट के एक एक पन्ने पर रिपोर्टिंग करने व सवाल करने वाले पत्रकार या तो सुपारी एंकर/रिपोर्टर हो गये और फिर सवाल कुछ यूं हो गये- १-मैं तो थक जाती हूं आप क्यों नहीं थकते?  २- आप ऊर्जा कहां से लाते हैं? 3-आपको आम पसंद हैं? 4-चूस कर खाते हैं या काट कर? 5-आप इतना सब कुछ कैसे कर लेते हैं? ...... मीडिया सवाल किससे कर रहा है विपक्ष से....उल्टा जनता से ही...? यह तो गंगा पंश्चिम बंगाल से निकल कर हिमालय की ओर बह चली है और वोल्गा में समा…
ज़ीनत शम्स मौजूदा वक़्त में कोरोना नाम के वायरस से दुनिया के 193 देश लड़ रहे हैं | WHO के अनुसार इस वायरस का अभी कोई टीका नहीं बना है और अभी तक यह इंसान से इंसान के संपर्क से फैल रहा है | इससे बचने का अभी तक जो सबसे अच्छा तरीका सामने आया है वह है अपने को दूसरे के संपर्क से जितना दूर रखा जा सके रखे और इसीलिए दुनिया भर के देश लॉकडाउन का तरीक़ा अपना रहे हैं| लेकिन सबसे बड़ा सवाल इस समय यह है कि गतिमान दुनिया की गति को आखिर कब तक थामा जा सकता है और यही इस समय लोगों की सबसे बड़ी चिंता है| कोरोना की महामारी ने हमें आर्थिक नुक्सान…
ज़ीनत शम्स आगामी 24 या 25 अप्रैल से मुसलमानों के सबसे पवित्र महीने रमज़ान की शुरुआत हो रही है| वैसे तो दुनिया भर के लगभग 180 करोड़ मुसलमान रमज़ान की तैयारियां बड़े ज़ोरशोर से करते आये हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं है| दुनिया इस वक़्त कोरोना वायरस के शिकंजे में जकड़ी हुई है| चीन के वुहान शहर से निकला यह वायरस पूरी दुनिया के 24 लाख से ज़्यादा लोगों पर वार कर चूका है और इस महामारी से अबतक डेढ़ लाख से ज़्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है | इस वायरस के फैलने से ख़ौफ़ज़दा दुनिया के लगभग सभी देशों को लॉकडाउन की घोषणा करनी पड़ी है| लॉकडाउन ने दुनिया को समेटकर उनके घरों में क़ैद कर…
अखिलेन्द्र प्रताप सिंह, स्वराज अभियान    लाकडाउन के दूसरे दौर में देश ने प्रवेश कर लिया है। इस बार भी कुछ आर्थिक गतिविधियों को छोड़ दिया जाए तो आम आदमी की राहत के लिए सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में कुछ खास नहीं दिख रहा है। तर्क चाहे जो भी दिए जाएं, सच्चाई यही है कि बिना किसी तैयारी के पिछली बार लाकडाउन की घोषणा प्रधानमंत्री जी ने की थी और इस बार भी इस महामारी से उत्पन्न लोगों की कठिनाईयों से निपटने का कोई रोडमैप नहीं दिख रहा है। लाकडाउन जरूरी होते हुए भी यह बीमारी से बचने के लिए कोई इलाज नहीं है। उपचार के लिए हॉटस्पॉट्स को चिन्हित करके अधिक से अधिक लोगों की टेस्टिंग और उनका इलाज…
- रेजी लारेंस राॅस    ये कहाँ आ गये हम! जहाँं विज्ञान के अनन्त रास्ते खुलते हैं और फिर भी एक नये बंधन में जकड़ गये हैं। अजब है ये आधुनिक बेबसी, जहाँ बड़े से बड़ा ज्ञानी-पुजारी, धनी-ध्यानी, चिंतक-दार्शनिक, बुद्धिजीवी, कवि, गायक-नायक, महानायक, आम ओ ख़ास सब कोरोना का ही राग अलाप रहे हैं। तो ऐसे समय में हमने भी सोचा चलो, कुछ बातें रोने रुलाने के अलावा भी कर ली जाए। एक तरफ विचार हैं, सोच है दूरदर्षिता है तो दूसरी तरफ है महज एक भेड़चाल। मजे की बात यह है कि क्या बड़ा- क्या छोटा, क्या अमीर क्या गरीब, सब एक समान, एक कतार में, कमोबेष लगभग एक ही ख्वाहिश के साथ रोज दिन काट रहे हैं कि…
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