Fri05242019

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लेख - दिव्य इंडिया न्यूज़
लोकसभा चुनावों की गतिविधियों में काफी तेजी आ गयी है और मैनपुरी संसदीय क्षेत्र से सपा -बसपा महागठबंधन की संयुक्त रैलियों का आगाज हो चुका है। आज से 24 साल पूर्व जो लोग अभी तक एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे और जनता के बीच जाकर एक दूसरे को जेल भेजने की धमकी देते रहते थे आज वही लोग एक बार फिर एक मंच पर आकर एक दूसरे के लिये वोट मांग रहे हंै। 2019 की रानजीति का यह वास्तविक महापरिवर्तन तो है लेकिन क्या यह राष्ट्रवाद  और विकासवाद की लहर के आगे कितना टिक पायेगा, यह तो आने वाला समय बतायेगा । क्या जनमानस इन लोगों के पुराने कारनामे  माफ कर देगा अभी कई सारे यक्ष…
लखनऊ।पहले चरण के बाद 18 अप्रैल को होने जा रहे दूसरे चरण के मतदान में भी बसपा-सपा व रालोद का गठबंधन मोदी की भाजपा को ख़ून के आँसू रूला रहा साथ ही दो सीटें फ़तेहपुर सीकरी और मथुरा पर बड़े चेहरे मैदान में है फ़तेहपुर सीकरी से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष फ़िल्मी स्टार राजबब्बर तो मथुरा सीट से फ़िल्मी एक्ट्रस डीर्मगल शोले फ़िल्म की बसंती मोदी की भाजपा से चुनाव मैदान में है मथुरा में अगर देखा जाए तो इस बार बसंती ने सिर्फ़ जय को छोड़कर पूरी शोले फ़िल्म को बुला लिया है लगता है इस बार बसंती का चुनाव गठबंधन की वजह से फँस गया।अमरोहा , अलीगढ़ , बुलंदशहर , नगीना  आगरा व हाथरस पर दूसरे दौर में…
चुनाव नजदीक आते ही विविध राजनैतिक दलों व नेताओं में वाकयुद्ध प्रारम्भ हो जाता है। एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए अनेक बार, शब्दों की सीमाएं, न सिर्फ संसदीय मर्यादाएं बल्कि, सामान्य आचार संहिता का भी उल्लंघन कर जाती हैं। राजनैतिक दलों के सिद्धांतों, कार्यों व कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाना तथा एक दूसरे की कमियों को उजागर करते हुए स्वयं को सर्वश्रेष्ठ सिद्ध करने की चेष्टा तो ठीक है किंतु उनकी शब्द रचना भारतीय संस्कृति, संवैधानिक व्यवस्थाओं व लोकाचार के भी परे, जब भारत की एकता व अखंडता के साथ उसकी संप्रभुता पर भी हमला करने लग जाए तो पीडा का असहनीय होना स्वाभाविक ही है। यूँ तो कश्मीर से सम्बंधित अलगाववादी संवैधानिक धारा 370 व 35 A को हटाने की मांग दशकों पुरानी…
लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी  राज्य मुख्यालय लखनऊ।देशभर में मोदी की भाजपा के लिए कड़ी चुनौती बनने की कोशिश कर रही कांग्रेस यूपी में गठबंधन को भी हराने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है उसके लिए पार्टी ने पूरे ज़ोर लगा दिए है लगता है कांग्रेस ने तय कर लिया है मैं जीत पाऊँ या न जीत पाऊँ लेकिन गठबंधन की हवा निकाल कर ही रहूँगी।इस सूरत में मोदी की भाजपा विरोधी वोटर को बहुत ही समझदारी से वोटिंग करनी होगी अगर वोटर ज़रा भी विचलित हुआ तो कांग्रेस का मक़सद पूरा हो जाएगा अब ये तो बाद में पता चलेगा जब सब पार्टियों के पत्ते खुलकर सामने आएँगे कि कौन सब पर भारी है अभी तक तो गठबंधन यूपी…
लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी राज्य मुख्यालय लखनऊ।जहाँ यूपी को देश की सियासत में अहम माना जाता है और है इसमें कोई सक भी नही है देखा जाए तो देश के सबसे ताक़तवर निवास 7 रेस कोर्स रोड पर जाने का रास्ता यूपी से ही होकर जाता है यही वजह है कि यूपी ने बहुत से सियासी योद्धा दिए जिन्होंने यूपी से सांसद बनकर देश की सियासत को अपने इर्दगिद बनाए रखा इसमें कोई सक नही है।जब यूपी के इन सियासी योद्धाओं पर नज़र दौड़ाई जाएगी तो इन सियासी योद्धाओं के सियासी रिकार्ड बोलते दिखाई देंगे। उनमें सपा के मुलायम सिंह यादव यूपी की सात लोकसभा सीटों से संसद पहुँचने वाले ऐसे पहले सांसद है जिन्होंने यूपी सियासत में कई रिकार्ड…
लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी  राज्य मुख्यालय लखनऊ।आमचुनाव की घोषणा होने के बाद भी सरकारी तोता लगा है मोदी की भाजपा की मदद करने में कि किसी तरह यूपी में मोदी की भाजपा को कोई नुक़सान न हो जबकि गठबंधन ने मोदी की भाजपा को यूपी के लोकसभा चुनाव में ज़मींदोज़ करने की तैयारी कर ली है गठबंधन की वजह से ही केन्द्र की सत्ता में वापिस नही होने जा रही मोदी की भाजपा लेकिन सरकारी तोता लगा है नुक़सान न हो और अगर हो भी तो कम से कम हो उसी को ध्यान में रखते हुए बसपा और सपा के बीच हुए गठबंधन को रोकने के लिए बी चन्द्रकला आईएएस को निशाना बनाया गया था जिसकी जद में सपा के…
मृत्युंजय दीक्षित आगामी लोकसभा चुनावों के लिये चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार व सभी राजनैतिक दलों , राज्य सरकारों के साथ तथा देषभर के तमाम राजनैतिक दलों के साथ लम्बी चर्चायें करने के बाद अंततः चुनाव तारीखों का ऐलान कर दिया है और इसके साथ ही अगली सरकार चुनने के लिये अब राजनैतिक गहमागहमी खूब जोरों से षुरू हो गयी है । चुनाव आयोग सभी लोगों के साथ लम्बे विचार विमर्ष के बाद चुनावों की तारीखों का ऐलान करता है। इस बार भी उसी प्रकार हुआ है। लेकिन भारत के तथाकथित बयान बहादुर राजनेता और सभी राजनैतिक दलों ने चुनावों की तारीखों को लेकर जिस प्रकार की मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने के लिये रमजान के पवित्र माह को आधार…
(मुश्ताक़ अली अन्सारी)  जब हम गावों के हालात पर नजर डालते हैं तो देखते हैं कि गांवो में मुख्यतया दो ही काम हैं एक किसानी दूसरा मजदूरी कुछ लोग फेरी लगाकर धनिया मिर्चा कपड़े आदि बेंच कर जीवन यापन करते हैं सत्तर फीसदी किसान दो एकड़ से कम जमीन के मालिक हैं और एक एकड़ या उससे कम जमीन वाले किसान और भूमिहीन मजदूर गांवों में खेती किसानी के काम के बाद बेरोजगार ही रहते थे उनमें से कुछ भवन निर्माण के कार्य में जुड़े होते हैं 2006 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना आयी तो गांवों के सीमांत किसानोंऔर भूमिहीन मजदूरों के लिये लाइफ लाइन का काम किया भृष्टाचार की तमाम बुराइयों के बावजूद अब तक कि सबसे कामयाब…
लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी  राज्य मुख्यालय लखनऊ।सियासत भी क्या-क्या करने पर मजबूर कर देती है जिसका अंदाज़ा भी नही लगाया जा सकता है पिछले एक दशक से हमारे देश में एक ऐसी सियासत ने जन्म लिया है जिसकी शुरूआत गुजरात के गोधरा से हुई जहाँ घिनौनी सियासत का वो रूप देखने को मिला कि सोचने भर से ही रूह काँप जाए महिलाओं की आबरू को तार-तार किया गया अजन्मे बच्चों को माँओं के पेट चीरकर निकाल लिया गया मासूम बच्चों को आग के हवाले कर दिया गया पूरी की पूरी बस्तियों को आग के हवाले कर दिया गया दंगाइयों को खुली छूट दी गई कोई भी कानून काम नही कर रहा था कानून के रखवाले हाथ पर हाथ धरे बैठे…
भाव से कार्य करना, जिसकी चिंता के केंद्र में ‘व्यक्ति’, ‘सत्ता’ और ‘सरकार’ के बजाय समाज के “अंतिम-आदमी” को होना चाहिए, जबकि वर्तमान में भारत का अधिकाँश मीडिया जनसमस्याओं, आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं को उपेक्षित करके प्रायोजित एजेंडे को प्रचारित करने का कार्य करता दिखाई पड़ रहा है l विगत वर्षों में भारतीय मीडिया ने जहां एक तरफ संवेदनशील विषयों को उपेक्षित किया वहीँ दूसरी तरफ ऐसे विषयों को जो सामाजिक समरसता में उन्माद उत्पन्न करने वाले थे, उनको तोड़-मरोड़ कर बहुत ही आक्रामकता एवं उत्तेजित करने वाली शैली में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया l दर्शकों के सामने तथ्यों को मीडिया द्वारा इस प्रकार से प्रस्तुत करने का कारण यही रहा होगा कि मीडिया पूर्व अवधारित उद्देश्यों पर जनमत…
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