Wed12112019

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Displaying items by tag: income - दिव्य इंडिया न्यूज़

नई दिल्ली: बजट 2019 में इनकम टैक्स स्लैब में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है. फरवरी में अंतरिम बजट में ऐलान किया गया था कि पांच लाख से कम आए वालों को इनकम टैक्स से छूट दी गई थी. वहीं दूसरी ओर इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को लेकर लिये गये कर्ज पर ब्याज भुगतान में 1.5 लाख रुपये की आयकर छूट दी जाएगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए ऐलान किया कि दो करोड़ से पांच करोड़ रुपये और पांच करोड़ रुपये से अधिक की कर योग्य आय वाले करदाताओं पर अधिभार बढ़ाया गया. इस वृद्धि से उनकी प्रभावी कर दर क्रमश: तीन प्रतिशत और सात प्रतिशत बढ़ जायेगी. इसके अलावा बैंकों से एक साल में एक करोड़ रुपये की अधिक की निकासी पर अब दो फीसदी टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) लगेगा. यानी, बैंकों से एक करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी करने पर दो फीसदी कर चुकाना पड़ेगा. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को संसद में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश करते हुए एक साल में एक करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी पर दो फीसदी टीडीएस लगाने की घोषणा की. वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को 400 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाली कंपनियों पर 25 प्रतिशत की दर से कॉरपोरेट कर लगाने का प्रस्ताव किया. अभी तक 250 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाली कंपनियों पर 25 प्रतिशत की दर से कर लगता था. वित्त मंत्री ने लोकसभा में बजट पेश करते हुए कहा कि कंपनियों की कारोबार सीमा बढ़ने से अब 99.3 प्रतिशत कंपनियां घटे हुए दर (25 प्रतिशत) के दायरे में आ जाएंगी. उन्होंने कहा कि नयी दर लागू होने के बाद केवल 0.7 प्रतिशत कंपनियां ही 25 प्रतिशत से ऊपर के कॉरपोरेट कर के दायरे में रह जाएंगी. सालाना 400 करोड़ रुपये से ऊपर का कारोबार करने वाली कंपनियों को 30 प्रतिशत की दर से कॉरपोरेट कर लगेगा. इसके साथ ही प्रावधान किया गया है कि जिन लोगों के पास पैन नहीं है, वे आधार के जरिये आयकर रिटर्न भर सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने उक्त प्रस्ताव किया. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय पासपोर्ट रखने वाले प्रवासी भारतीयों को भारत पहुंचने के के बाद आधार कार्ड जारी किया जाएगा. इसके लिये उन्हें 180 दिनों का अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि का इंतजार नहीं करना होगा. सीतारमण ने कहा कि गिफ्ट सिटी में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिये सरकार ने कई कर लाभ का प्रस्ताव किया है.

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नई दिल्ली: आयकर के नियमों के अनुसार सबसे अधिक नौकरीपेशा वर्ग ही पिस रहा है। जबकि बिजनेसमैन और कंसल्टेंट हर महीनें विभिन्न मदद में खर्च के तहत छूट हासिल कर लेते हैं। जबकि वेतनभोगी का नियोक्ता उसके वेतन से टीडीएस काट लेता है। इससे उसके हाथ में आने वाला वेतन महत्वपूर्ण रूप से कम हो जाता है।

स्थिति यह है कि नौकरीपेशा वर्ग को कंसल्टेंट की तुलना में तीन गुना अधिक टैक्स देना पड़ता है। TOI  की खबर के अनुसार इसे ऐसे आसानी से समझा जा सकता है। यदि नौकरीपेशा और कंसल्टेंट की सालाना आय 30 लाख है तो कंसल्टेट को सीधे-सीधे 50 फीसदी यानी की 15 लाख रुपये की आय कर मुक्त हो जाती है। जबकि नौकरी पेशा वर्ग के खाते में सिर्फ प्रोफेशन टैक्स और स्टैंडर्ड डिडक्शन के रूप में क्रमशः 2400 रुपये और 40 हजार रुपये की छूट मिलती है।

इसके अलावा दोनों वर्ग सेक्शन 80 सी और 80 डी के तहत क्रमशः 150000 और 25 हजार की छूट हासिल करते हैं। इन सब के बाद नौकरीपेशा वर्ग की टैक्सेबल इनकम जहां 27,82600 रुपये होती है वहीं कंसल्टेंट को 13,25,000 रुपये की आय पर ही कर देना होता है। इस राशि पर नौकरीपेशा वर्ग जहां 6,73,171 रुपये टैक्स देता है वहीं कंसल्टेंट को 2,18,400 रुपये टैक्स बनता है। इस तरह कंसल्टेंट की तुलना में नौकरीपेशा वर्ग की तरफ से अदा किया जाने वाला कर 200 फीसदी अधिक है।

इस स्थिति में नौकरीपेशा वर्ग इस बार बजट में सरकार और वित्त मंत्री से स्टैंडर्ड डिडक्शन में इस बार अधिक छूट चाहता है। इससे पहले 2019 के अंतरिम बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन की राशि को 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया गया था। डेनमार्क और दक्षिण कोरिया जैसे कुछ देश नौकरी पेशा वर्ग को निश्चित आय पर छूट देते हैं।

इससे पहले ट्रैवल और मेडिकल रिइंबर्समेंट जैसे महत्वपूर्ण छूट वाले अलाउंसेस की लिमिट में लंबे समय से कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। महंगाई के बढ़ने के बावजूद यह पहले की तरह ही बने हुए हैं। उदाहरण के लिए बच्चों का एजुकेशन अलाउंसेस (100 रुपया प्रति महीना, दो बच्चों तक) और हॉस्टल अलाउंसेस(300 रुपये प्रतिमाह, अधिकतम दो बच्चों तक) में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

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नई दिल्ली: आयकर विभाग ने बीजेपी नेता के यहां छापामार कर करोडों की संपत्ति जब्त की है। आयकर विभाग ने बीजेपी नेता के नोएडा, गाजियाबाद और मोदीनगर के ठिकानों पर मारा था। आयकर विभाग की ये छापेमारी आय से अधिक संपत्ति की खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई है। आयकर विभाग ने बीजेपी नेता के अलावा कई दूसरी हस्तियों के यहां भी छापेमारी की है। इनमें एक डॉक्टर कपल, एक पेट्रोल पंप मालिक भी शामिल है। आयकर विभाग के मुताबिक दो दिन की छापेमारी में कुल 50 करोड़ की संपत्ति का पता चला है। इसमें जायदाद, और ज्वैलरी भी शामिल है। आईटी विभाग ने कुल एक करोड़ की ज्वैलरी और कैश जब्त की है। रिपोर्ट के मुताबिक ये छापेमारी गुरुवार (28 जून) सुबह से ही चल रही थी। आयकर विभाग ने मोदीनगर इलाके में बीजेपी नेता के यहां 30 घंटे तक दस्तावेजों को खंगाला। इसके बाद इन संपत्तियों का खुलासा हुआ। बीजेपी नेता के घर छापे में पता चला है कि इस नेता की एक महिला मित्र भी है, जिसके नाम से कई फ्लैट और जमीन के प्लॉट रजिस्टर्ड हैं। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी का ये नेता 2012 में विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुका है। छापे की कार्रवाई के दौरान इस शख्स के दो फैक्ट्रियों से भी दस्तावेज जब्त किये गये हैं। इस शख्स की नोएडा में भी फैक्ट्रियां हैं, आयकर विभाग इसकी भी जांच कर रहा है। आयकर विभाग ने हाथ में आए दस्तावेजों के आधार पर इन लोगों से कमाई का ब्यौरा मांगा है। इनकम टैक्स सूत्रों के मुताबिक यहां पर कई लोगों ने टैक्स चोरी की है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में जिस डॉक्टर का नाम आया है, उसने ओपीडी में किये गये मरीजों से हिए कमाई का ब्यौरा नहीं दिया है। इस डॉक्टर ने पिछले 10 साल से ओपीडी पेशेंट के इलाज से होने वाले कमाई का ब्यौरा नहीं दिया है। उसके अलावा अस्पताल में भी इसने कम मरीजों का इलाज दिखाया है। आयकर विभाग के अधिकारियों का आकलन कहता है कि डॉक्टर ने पिछले 10 साल में लगभग 20 करोड़ रुपये की रकम पर टैक्स नहीं दिया है। इस डॉक्टर को अब इस पूरी कमाई पर टैक्स सूद समेत देनी पड़ेगी।

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नई दिल्ली: आयकर मामलों में हल्के-फुल्के मुद्दों पर कानूनी विवाद बढ़ाने की प्रवृत्ति पर रोक के लिए सीबीडीटी ने अपील के मामलों के लिए मौद्रिक सीमा बढ़ा दी है। इसके तहत आयकर अधिकारी अब आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण में 10 लाख रुपये या उससे अधिक के विवाद पर ही मामला ले जा सकेंगे। इसी तरह हाईकोर्ट में न्यूनतम 20 लाख या उससे ऊपर के मामले में अपील की जा सकेगी।

इससे पहले, अधिकारियों को अनुमति थी कि वे 4 लाख रुपये या उससे ऊपर के मामलों में न्यायाधिकरण में तथा 10 लाख रुपये या उससे ऊपर के मामलों में हाईकोर्ट में अपील कर सकते थे। आयकर विभाग की नीति नियामक संस्थान केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने 10 दिसंबर को जारी दिशा-निर्देशों में सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने के लिए मौजूदा 25 लाख रुपये की मौद्रिक सीमा को बरकरार रखा है।

अपील के लिए अधिकारियों की मौद्रिक सीमा को पिछले साल मध्य में संशोधित किया गया था। अधिकारिक सूत्रों ने कहा कि मौद्रिक सीमा में फिर से संशोधन किया गया है, ताकि विभाग कर संबंधी मामलों में मुकदमेबाजी का प्रबंध बेहतर ढंग से कर सके। मुकदमों के प्रबंध को लेकर संसद की समितियों और सरकारी अंकेक्षक कैग ने विभाग की कई बार आलोचना की है।

करदाता आयकर अधिकारी के आकलन के खिलाफ सबसे पहले आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष मामला ले जा सकते हैं। उसके बाद विवाद अपीलीय प्राधिकरण, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जाता है। सीबीडीटी ने अधिकारियों से कहा है कि राजस्व संबंधी मामलों में ये अधिसूचित न्यूनतम मौद्रिक सीमाएं केवल एक पथ संकेत हैं, पर किसी मामले में गुण-दोष सबसे महत्वपूर्ण विषय वस्तु है, जिसका अनुसरण किया जाना चाहिए।

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नई दिल्ली: देश के सिर्फ 4.6 प्रतिशत ग्रामीण परिवार आयकर देते हैं, जबकि वेतनभोगी ग्रामीण परिवारों की संख्या 10 प्रतिशत है। यह बात शुक्रवार को पिछले आठ दशक में पहली बार जारी सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना में कही गई।

सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना 2011 में कहा गया कि आयकर देने वाले अनुसूचित जाति के परिवारों की संख्या 3.49 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जनजाति के ऐसे परिवारों की संख्या मात्र 3.34 प्रतिशत है। यह जनगणना जारी करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इस आंकड़े से सरकार  बेहतर नीति नियोजन में मदद मिलेगी।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, योजनाओं की विशालता और हर सरकार की पहुंच को देखते हुए इस दस्तावेज से हमें नीति नियोजन के लिहाज से लक्षित समूह को सहायता पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज से भारत की वास्तविकता जाहिर होगी और यह सभी नीति निर्माताओं, केंद्र और राज्य सरकार दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।

गौरतलब है कि 1932 के बाद यह पहली जनगणना है, जिसमें क्षेत्र विशेष, समुदाय, जाति एवं आर्थिक समूह संबंधी विभिन्न किस्म के ब्योरे हैं और भारत में परिवारों की प्रगति का आकलन किया गया है।

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