Sun07212019

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नई दिल्ली : बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती के भाई आनंद कुमार की 400 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति इनकम टैक्स विभाग ने जब्त कर ली। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मायावती के भाई और उनकी पत्नी की नोएडा स्थित 400 करोड़ रुपए के बेनामी प्लॉट को जब्त कर लिया है। आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्र लता की स्वामित्व वाली 7 एकड़ जमीन को जब्त कर ली है। दिल्ली स्थित बेनामी निषेध यूनिट के विभाग ने 16 जुलाई को आदेश जारी किया। मायावती ने हाल ही में आनंद कुमार को बहुजन समाज पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया। 

आदेश, बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम, 1988 की धारा 24 (3) के तहत जारी किया गया है। विभाग ने कुमार और उनकी पत्नी की जब्त संपत्ति को 'बेनामी' संपत्ति माना। यह बेनामी संपत्ति 28,328.07 वर्ग मीटर या करीब 7 एकड़ है। इस संपत्ति का मूल्य 400 करोड़ रुपए आंका गया है।

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लखनऊ:  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने देश में मॉब लिन्चिंग की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार पर निशाना साधा है। मायावती ने कहा है कि मॉब लिंचिंग के मामलों का शिकार न केवल दलित, आदिवासी और धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के लोग बन रहे हैं बल्कि सर्वसमाज और पुलिस के लोग भी इसका शिकार बन रहे हैं।

ट्विटर के जरिए अपना बयान जारी करते हुए मायवाती ने कहा, 'माब लिन्चिग एक भयानक बीमारी के रूप में देश भर में उभरने के पीछे वास्तव में खासकर बीजेपी सरकारों की क़ानून का राज स्थापित नहीं करने की नीयत व नीति की ही देन है जिससे अब केवल दलित, आदिवासी व धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के लोग ही नहीं बल्कि सर्वसमाज के लोग व पुलिस भी शिकार बन रही है।'

अपने अगले ट्वीट में मायावती ने कहा, 'माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केन्द्र को गम्भीर होकर माब लिन्चिग पर अलग से देशव्यापी कानून अबतक जरूर बना लेना चाहिये था लेकिन लोकपाल की तरह माब लिंचिग के मामले में भी केन्द्र उदासीन है व कमजोर इच्छाशक्ति वाली सरकार साबित हो रही है। ऐसे मे यूपी विधि आयोग की पहल स्वागतोग्य है।' मायवती ने कहा कि मॉब लिंचिंग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और सरकार को इसके लिए कानून बनाना चाहिए। 

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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने कर्नाटक और गोवा में विधायकों के कथित तौर पर पाला बदलने की पृष्ठभूमि में दलबदल पर एक सख्त कानून बनाए जाने की मांग की है। उन्होंने गुरुवार को एक ट्वीट में भाजपा पर कर्नाटक और गोवा में विधायकों को अपने पक्ष में करने का आरोप लगाते हुए कहा ‘‘समय आ गया है जब दलबदल करने वालों की सदस्यता समाप्त करने वाला सख्त कानून देश में बने।'' बीजेपी ईवीएम में गड़बड़ी व धनबल आदि से केन्द्र की सत्ता में दोबारा आ गई लेकिन सन् 2018 व 2019 में देश में अबतक हुए सभी विधानसभा आमचुनाव में अपनी हार की खीज अब वह किसी भी प्रकार से गैर-बीजेपी सरकारों को गिराने के अभियान में लग गई है जिसकी बीएसपी कड़े शब्दों में निन्दा करती है। बीजेपी एक बार फिर कर्नाटक व गोवा आदि में जिस प्रकार से अपने धनबल व सत्ता का घोर दुरुपयोग करके विधायकों को तोड़ने आदि का काम कर रही है वह देश के लोकतंत्र को कलंकित करने वाला है। वैसे अब समय आ गया है जब दलबदल करने वालों की सदस्यता समाप्त हो जाने वाला सख्त कानून देश में बने। मायावती ने दूसरे ट्वीट में आरोप लगाया कि भाजपा ईवीएम में गड़बड़ी और धनबल जैसी तिकड़मों के जरिये केन्द्र की सत्ता में दोबारा आ गई लेकिन 2018 और 2019 में देश में हुए विधानसभा चुनावों में हुई अपनी हार की खीझ निकालते हुए वह अब गैर भाजपा सरकारों को गिराना चाह रही है। ‘‘बसपा इसकी कड़ी निंदा करती है।’’

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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने शनिवार को कहा कि वर्षों से केन्द्र व राज्य में दोनों जगह बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बावजूद यूपी में थोड़ा भी आवश्यक सुधार नहीं हो पाने से यह स्पष्ट हो जाता है कि आम जनता के हित में मजबूत नहीं बल्कि मजबूर सरकार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए कि सरकार के दिल-दिमाग में जनता की भलाई का खौफ लगातार बना रहे तथा ना तो सरकार निरंकुश हो सके और ना ही सत्ताधारी पार्टी के लोग अपने आपको कानून से ऊपर समझकर हर स्तर पर व हर प्रकार की अराजकता व भ्रष्टाचार फैलाकर जनता का जीवन त्रस्त करते रहें। मायावती ने अवध व पूर्वांचल क्षेत्र के नौ मण्डलों के समस्त वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक में पार्टी संगठन व कैडर की तैयारियों, सर्वसमाज में पार्टी जनाधार बढ़ाने की गतिविधियों आदि की समीक्षा की। उन्होंने उसमें कमियों को देखते हुये पार्टी में ज़रूरी फेरबदल करते हुए नये दिशा-निर्देश दिये। इस पर सख्ती से अमल करने की चेतावनी भी दी गयी। बाद में जारी एक बयान में कहा गया कि समीक्षा बैठक में पाया गया कि यूपी के पूर्वांचल क्षेत्र में गाँव, गरीब, किसान सभी का बुरा हाल है व इन क्षेत्रों का मजबूरी में पलायन भी लगातार जारी है जबकि प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री दोनों यहीं से आते हैं। बयान के अनुसार केन्द्र व यूपी में बीजेपी की सरकार होने के बावजूद उनके दिन-प्रतिदिन के जीवन में कोई भी उल्लेखनीय बदलाव नहीं आ पाया है। यह बीजेपी सरकार के तमाम् वादों व दावों को खोखला साबित करता है। बयान में आरोप लगाया गया है कि आमजनता को दिन-प्रतिदिन के जीवन में मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं का दायरा भी लगातार सिमटता जा रहा है। कानून-व्यवस्था के साथ-साथ बिजली, सड़क, पानी, चिकित्सा, शिक्षा, यातायात आदि का बहुत ही बुरा हाल है। बैठक में मायावती ने कहा, ''वर्षों से केन्द्र व राज्य में दोनों जगह बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बावजूद यू.पी. में थोड़ा भी आवश्यक सुधार नहीं हो पाने से यह स्पष्ट हो जाता है कि आमजनता के हित में मजबूत नहीं बल्कि मजबूर सरकार की जरूरत है, ताकि सरकार के दिल-दिमाग में जनता की भलाई का खौफ लगातार बना रहे तथा ना तो सरकार निरंकुश हो सके और ना ही सत्ताधारी पार्टी के लोग अपने आपको कानून से ऊपर समझकर हर स्तर पर व हर प्रकार की अराजकता व भ्रष्टाचार फैलाकर जनता का जीवन त्रस्त करते रहें।'' संसद में पेश बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये मायावती ने कहा कि बीजेपी की सरकार ‘‘कल्याणकारी‘‘ सरकार होने के बजाय ‘‘व्यवसायिक मानसिकता वाली सरकार‘‘ बनती चली जा रही है।

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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने सोमवार को कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 17 जातियों को OBC से हटाकर अनुसूचित जाति श्रेणी में डाल दिया है, जिससे इन्हें OBC का लाभ नहीं मिलेगा. ये बड़ा धोखा है, उन्हें अब OBC का लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि उन्हें सूची से हटा दिया गया है और उनको अनुसूचित जाति में डालने से भी अनुसूचित जाती का लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि ये ससंवैधानिक है और गैर कानूनी है.

उन्होंने कहा कि जब योगी सरकार ये जानती है तो उनकी मंशा क्या है, ये साफ़ है की OBC जाति को धोखा देने के लिए किया गया है. हमारी पार्टी ने जब पूर्व में सपा की सरकार की ओर से इसी प्रकार के आदेश जारी किये गए थे तब इसका विरोध किया था. 

साथ ही कांग्रेस की सरकार को पत्र लिखा था की इन जातियों को अनुसूचित जाति में जोड़ दिया जाए. ये मांग मेरे और मेरी पार्टी की ओर से संसद में कई बार की गई है, लेकिन दुःख की बात है की न ही पूर्व की कांग्रेस सरकार और न ही बीजेपी सरकार ने इस पर अमल किया. अब योगी सरकार ने दोबारा ऐसा आदेश जारी करके 17 जातियों के साथ धोखा किया ही है. इस आदेश में संविधान की धज्जियां उड़ाने का भी काम किया है. यह फैसला उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनाव के मद्देनजर राजनीतिक लाभ के लिए किया है.

योगी सरकार पर निशाना साधते हुए बीएसपी सुप्रीमो ने कहा कि जब सरकार जानती है कि इन 17 जातियों को अनुसूचित जाति का लाभ नहीं मिल सकता है तो सरकार ने ऐसा फैसला क्यों किया? इससे साफ है कि योगी सरकार ने सपा सरकार की तरह इन 17 जातियों को धोखा देने के लिए ये आदेश जारी किया है.

बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने कहा कि योगी सरकार का फैसला 17 ओबीसी जातियों के लोगों के साथ धोखा है. ये लोग किसी भी श्रेणी का लाभ प्राप्त नहीं कर पाएंगे, क्योंकि यूपी सरकार उन्हें ओबीसी नहीं मानेंगी.

मायावती  ने आगे कहा कि इन जातियों के लोगों को अनुसूचित जाति कैटेगरी से संबंधित लाभ नहीं मिल पाएंगे. कोई भी राज्य सरकार इन लोगों को अपने आदेश के जरिए किसी भी श्रेणी में डाल नहीं सकती है और न ही उन्हें हटा सकती है.

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अब सभी चुनाव अकेली लड़ेगी बसपा 

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायवाती ने ट्वीट कर समाजवादी पार्टी के साथ अपना गठबंधन आधिकारिक रूप से खत्म कर लिया है। इससे पहले रविवार को मायावती के आवास पर हुई बैठक में पार्टी के लोकसभा सांसदों सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की थी। बैठक में भी उन्होंने अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव की सपा के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा। मायवाती ने कहा कि लोकसभा परिणाम घोषित होने के बाद अखिलेश ने मुझे फोन तक नहीं किया। सोमवार को मायावती ने सपा के साथ गठबंधन को खत्म करने का ऐलान करते हुए लगातार तीन ट्वीट किए। अपने पहले ट्वीट में बसपा सुप्रीमो ने कहा 'बीएसपी की आल इण्डिया बैठक कल लखनऊ में ढाई घण्टे तक चली। इसके बाद राज्यवार बैठकों का दौर देर रात तक चलता रहा जिसमें भी मीडिया नहीं था। फिर भी बीएसपी प्रमुख के बारे में जो बातें मीडिया में फ्लैश हुई हैं वे पूरी तरह से सही नहीं हैं जबकि इस बारे में प्रेसनोट भी जारी किया गया था।' अपने अगले ट्वीट में मायावती ने कहा, 'वैसे भी जगजाहिर है कि सपा के साथ सभी पुराने गिले-शिकवों को भुलाने के साथ-साथ सन् 2012-17 में सपा सरकार के बीएसपी व दलित विरोधी फैसलों, प्रमोशन में आरक्षण विरूद्ध कार्यों एवं बिगड़ी कानून व्यवस्था आदि को दरकिनार करके देश व जनहित में सपा के साथ गठबंधन धर्म को पूरी तरह से निभाया।' सपा के साथ नाता तोड़ने का ऐलान करते हुए मायावती ने अपने अंतिम ट्वीट में लिखा, 'लोकसभा आमचुनाव के बाद सपा का व्यवहार बीएसपी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ऐसा करके बीजेपी को आगे हरा पाना संभव होगा? जो संभव नहीं है। अतः पार्टी व मूवमेन्ट के हित में अब बीएसपी आगे होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले अपने बूते पर ही लड़ेगी।' आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन किर मिलकर चुनाव लड़ा था। बसपा ने जहां 38 सीटों पर चुनाव लड़ा था तो वहीं समाजवादी पार्टी ने 37 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को खड़ा किया था। लेकिन चुनाव परिणामों में मायावती से ज्यादा नुकसान अखिलेश यादव को उठाना पड़ा। 2014 में एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत पाने वाली बसपा को 2019 में 10 सीटें मिल गईं जबकि 2014 सपा को 5 सीटे मिली थी जो इस बार भी 5 ही रहीं। लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि इस चुनाव में अखिलेश के परिवार के सदस्यों को हार का मुंह देखना पड़ा। खुद अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव कन्नौज से चुनाव हार गईं जबकि बदायूं में धर्मेन्द्र यादव और फिरोजाबाद में अक्षय यादव हार गए। लोकसभा चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद मायावती ने प्रतिक्रिया दी थी और सपा पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि चुनावों में उनकी पार्टी बसपा को यादवों का वोट नहीं मिला जिस कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा।

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लखनऊ: बी.एस.पी. कार्यालय में आयोजित पार्टी की अखिल भारतीय बैठक में ईवीएम के मार्फत लोकतंत्र व जनमत को हाईजैक करने की राष्ट्रीय चिन्ता पर गहन विचार-विमर्श किया गया तथा यह पाया गया कि ’एक देश, एक चुनाव’ बीजेपी का नया पाखण्ड वास्तव में इनकी चुनावी धांधलियों पर पर्दा डालने व बार-बार चुनाव में गड़बड़ी करके जीतने से बचने का प्रयास है। अगर देश में लोकसभा व सभी राज्यों में विधानसभा का आमचुनाव एक बार में एक साथ होगा तो फिर एक ही धांधली में बीजेपी का षड़यंत्र सफल हो जाएगा व देश पूरी तरह से विपक्ष-मुक्त होकर जातिवाद के अंधकार युग में चला जाएगा। बैठक को सम्बोधित करते हुए बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रिय अध्यक्ष मायावती ने कहा , बीजेपी की जीत में अगर धांधली आदि नहीं है व उसे भारी जनमत प्राप्त है तो फिर बीजेपी एण्ड कम्पनी समय-समय पर जनता के बीच जाने से क्यों डरती है तथा बैलेट पेपर से चुनाव कराने की व्यवस्था से क्यों कतरा रही है? इजराइल मोदी का मित्र देश है जहाँ इस वर्ष संसद का दूसरी बार चुनाव हो रहा है, लेकिन बीजेपी सरकार की तरह इजराइल क्यों नहीं चिन्तित है? ये बातें क्या साबित नहीं करती है कि बीजेपी की जीत के पीछे ईवीएम की धांधली व भारी षड़यंत्र काम कर रहा है तथा दाल में काफी कुछ काला है। मायावती ने कहा केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों से आए बी.एस.पी. प्रतिनिधिमण्डलों ने भी अपने-अपने प्रदेशों मंे ईवीएम में गड़बड़ी के प्रति जन आशंकाओं को आज की बैठक में रखा और इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि ईवीएम पूरी तरह से बीजेपी व पीएम श्री नरेन्द्र मोदी के इशारे पर कैसे काम कर रही है? साथ ही, चुनाव आयोग ने जिस प्रकार से हर स्तर पर तथा कदम-कदम पर खासकर बीजेपी व नरेन्द्र मोदी के आगे घुटने टेके हैं उससे भी चुनाव के स्वतंत्र व निष्पक्ष होने पर गहरी आशंका देशभर में पाई जाती है, जिससे देश में लोकतंत्र कमजोर हुआ है और इसके उपायों के प्रति आमजनता काफी चिन्तित नजर आती है। देश की संवैधानिक संस्थाओं को इसका समाधान जरूर ढूढ़ना होगा। मायावती ने कहा कि आज की बैठक से पहले नई दिल्ली स्थित पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय में आयोजित चुनाव बाद की राज्यवार समीक्षा में भी सभी राज्यों से एक ही आवाज़ आई है कि बीजेपी के पक्ष में जो एकतरफा चुनाव परिणाम आये हैं वे अप्रत्याशित व जनपेक्षा के विपरीत है, जो बिना किसी सुनियोजित गड़बड़ी व धांधली के संभव ही नहीं है। इसीलिए ईवीएम को हटाकार दुनिया के अन्य देशों की तरह ही बैलेट पेपर से चुनाव अपने देश में भी कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही, सत्ताधारी बीजेपी की देश में एक चुनाव के सम्बन्ध में अगर नीयत में खोट व नीति गलत नहीं होती तो इन्होंने बीजेपी शासित हरियाणा, महाराष्ट्र आदि राज्यों के भी चुनाव लोकसभा के आमचुनाव के साथ ही क्यों नहीं कराया जहाँ अब चुनाव होना निर्धारित है। मायावती ने कहा कि देश की लगभग सभी प्रमुख विपक्षी पार्टिंयाँ ईवीएम के बजाए बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर एकमत हैं, लेकिन बीजेपी व चुनाव आयोग इसके खिलाफ हैं जिससे देश में बेचैनी है। इसलिए बीजेपी अगर अपनी हठधर्मी पर अड़ी रही तो विरोध के अन्य उपायों पर भी जनता को विचार करना पड़ सकता है। फिर भी जब तक बीजेपी जनता के इस माँग की परवाह नहीं करती है और ईवीएम से ही चुनाव कराने पर अड़ी रहती है तो आने वाले उपचुनाव व चुनावों के लिए पार्टी के लोगों को उसी के हिसाब से तैयारी करनी है और ईवीएम की गड़बड़ियों का हर प्रकार से डट कर मुकाबला करने के लिए तैयार रहना है। अम्बेडकरवादी बाबा साहेब डा. अम्बेडकर की तरह ही कभी निराश नहीं होते हैं तथा हर कदम पर संघर्ष को तैयार रहते हैं। मायावती ने पार्टी संगठन की मजबूती तथा सन् 2007 की तरह भाईचारा के आधार पर जनाधार को व्यापक बनाने पर जोर दिया। पार्टी संगठन का काम, जो लोकसभा चुनाव के कारण रूक गया था, उसे गति प्रदान करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए तथा अखिल भारतीय बैठक के बाद विभिन्न राज्यों की अलग-अलग बैठक करके उन्हें आगे की तैयारी व संगठन में आवश्यक फेरबदल के निर्देश दिए। विधानसभा आमचुनाव वाले राज्य खासकर हरियाणा व महाराष्ट्र के लिए अलग से बैठक में काफी विस्तार से चर्चा की गई। मायावती ने इस अवसर पर बी.एस.पी. के नवनिर्वाचित सांसदों को निर्देश दिया कि वे व्यापक जनहित व देशहित के मामलों पर संसद में अपनी सार्थक भूमिका निभायें और साथ ही अपने-अपने क्षेत्र की जनता की सेवा में कोई कोर-कसर ना छोडं़े। जनता की सच्ची सेवा को अपनी असली धर्म समझें। यही निर्देश उन्होंने पार्टी विधायकों को भी दिया। मायावती ने कहा कि जनता के अपार प्रेम व संघर्ष पर उन्हें पूरा भरोसा है और यह भरोसा वे किसी भी हाल में कभी टूटने नहीं देंगी। मिशनरी उद्देश्यों वाला ’’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’’ का संघर्ष बेकार जाने वाला नहीं है तथा बीजेपी के पाप का घड़ा, कांग्रेस पार्टी की ही तरह, जरूर फूटेगा। 

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लखनऊ:  बीएसपी सुप्रीमो मायावती  के विधानसभा उप चुनाव में अकेले लड़ने के ऐलान पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि  गठबंधन टूटा है या जो गठबंधन पर कहा गया है उस पर सोच समझ कर विचार करेंगे. समाजवादी पार्टी भी उपचुनाव के लिए तैयार है. सपा अकेली लड़ेगी. गौरतलब है कि  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुछ सीटों के लिये संभावित उपचुनाव अपने बलबूते लड़ने की पुष्टि करते हुये स्पष्ट किया है कि इससे सपा के साथ गठबंधन के भविष्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा, गठबंधन बरकरार रहेगा. मायावती ने मंगलवार को अपने बयान में कहा कि उनकी पार्टी अपने बलबूते उपचुनाव लड़ेगी, लेकिन सपा से गठबंधन बरकरार रहेगा. उन्होंने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव से उनके रिश्ते कभी खत्म नहीं होने वाले हैं. ‘‘ सपा के साथ यादव वोट भी नहीं टिका रहा. अगर सपा प्रमुख अपने राजनीतिक कार्यों के साथ अपने लोगों को मिशनरी बनाने में सफल रहे तो साथ चलने की सोचेंगे. फिलहाल हमने उपचुनावों में अकेले लड़ने का फैसला किया है.''

उल्लेखनीय है कि हाल ही में संपन्न हुये लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से नौ भाजपा विधायकों और सपा, बसपा के एक एक विधायक के सांसद बनने के बाद रिक्त होने वाली 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव संभावित है. इन सीटों पर होने वाले उपचुनाव में बसपा के अपने बलबूते चुनाव लड़ने का फैसला मायावती की अध्यक्षता में सोमवार को हुयी पार्टी नेताओं की बैठक में किया गया था. मायावती ने मंगलवार को अपने बयान के जरिये इसकी आधिकारिक पुष्टि की. लोकसभा चुनाव के परिणाम की समीक्षा के आधार पर बसपा प्रमुख ने चुनाव में हार के लिए सपा को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा कि लोकसभा चुनाव में यादव मतदाताओं ने उत्तर प्रदेश में सपा बसपा का साथ नहीं दिया. हालांकि उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से कोई मनमुटाव नहीं होने की भी बात कही है. 

उत्तर प्रदेश की  गंगोह (सहारनपुर), टूंडला, गोविंदनगर (कानपुर), लखनऊ कैंट, प्रतापगढ़, मानिकपुर चित्रकूट, रामपुर, जैदपुर(सुरक्षित) (बाराबंकी), बलहा(सुरक्षित), बहराइच, इगलास (अलीगढ़), जलालपुर (अंबेडकरनगर) सीटों पर उपचुनाव होना है 

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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के साथ चुनावी गठबंधन पर कुछ समय के लिए विराम लगा दिया है। बसपा सुप्रीमो ने समाजवादी पार्टी के कोर वोट के गठबंधन के उम्मीदवार को ट्रांसफर नहीं होने का आरोप लगाया। मायावती ने कहा कि यादवों और जाटों ने गठबंधन प्रत्याशियों को वोट नहीं दिया। इसलिए कुछ समय के लिए गठबंधन पर विराम लगाना जरूरी हो गया है। अगर सपा नेता आगे कुछ कर पाते हैं, तो गठबंधन पर फिर से विचार किया जा सकता है। अगले 6 महीने में उत्तर प्रदेश में 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। इसमें से आठ सीटें भाजपा के पास हैं, एक सीट बसपा के खाते की है। एक सीट समाजवादी पार्टी की है। वहीं, एक सीट अपना दल की है। अब सबकी निगाहें इसी उपचुनाव पर लगी हुई हैं। 

बसपा ने पिछले लोकसभा उपचुनाव में भाग नहीं लिया था, जहां से गठबंधन की नींव पड़ी थी। लेकिन इस चुनाव में गठबंधन के बल पर बसपा 10 सीटें जीतने में कामयाब हो गई है। जिससे बसपा को जीवनदान मिल गया। पिछले चुनाव में तो बसपा का खाता भी नहीं खुल पाया था। उसके बाद विधानसभा चुनावों में बसपा का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था। उसको महज 19 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था। 

बसपा अपने प्रदर्शन को बेहतर करने के लिए और उत्तर प्रदेश में भाजपा की मजबूती को रोकने के लिए सपा के साथ अपनी वर्षों पुरानी दुश्मनी को भुलाकर गठबंधन किया। लेकिन लोकसभा चुनाव नतीजे गठबंधन के लिए काफी निराशजनक रहे। उत्तर प्रदेश में गठबंधन को भारी हार का सामना करना पड़ा। सपा को केवल पांच और बसपा को दस सीटों पर जीत मिली। लेकिन बसपा दस सीटें जीतकर फिर से जीवित हो गई। वहीं, सपा अपनी परंपरागत सीटें भी हार गई। 

दोनों पार्टियों के एक साथ आने के बाद किसी को भी यह विश्वास नहीं हो रहा था कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन हार भी सकता है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के माइक्रो मैनेजमेंट और जातीय केमिस्ट्री ने गठबंधन के गणित को बिगाड़ करके रख दिया। सपा के अपने गढ़ में हार के बाद लोगों को यह महसूस हुआ कि सपा का कोर वोट बैंक उससे दूर हो गया। 

अब समीक्षा के दौरान इस बात पर चिंतन होना भी जरूरी है। बसपा सुप्रीमो ने इस पर विचार किया कि समाजवादी पार्टी के नेताओं में अगर इतना दम नहीं है कि वो अपने कोर वोट बैंक को अपने साथ रख सकें, तो इस गठबंधन को आगे बढ़ाने से बेहतर है कि हम अपनी राहें अलग कर लें। अगर दोबारा जरूरत पड़ेगी, तो गठबंधन कर लेंगे। इसमें किसी को धोखा देने जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने गठबंधन खत्म नहीं किया है, बल्कि उपचुनावों तक के लिए विराम दिया है। एक तरह से अखिलेश यादव को खुद को मजबूती से खड़ा करने के लिए एक मौका दिया है।  

मायावती ने कहा कि अखिलेश और उनकी पत्नी डिंपल ने उनको बहुत अधिक सम्मान दिया है। जिसकी वजह से वो भी उन दोनों का बहुत सम्मान करती है। हमारा उनके साथ व्यक्तिगत संबंध भविष्य में जारी रहेंगे, लेकिन राजनीतिक संबंधों पर थोड़े समय के लिए विराम देना जरूरी हो गया था। 

बसपा के उपचुनावों में अकेले लड़ने के ऐलान के बाद सपाध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी अकले लड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर गठबंधन टूटता है तो हम उस पर चिंतन करेंगे। जहां तक उपचुनावों में अकेले लड़ने की बात है, तो हम भी उसकी तैयारी शुरू करेंगे। 

 

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नई दिल्ली: बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में यादव वोट बीएसपी के पक्ष में ट्रांसफर नहीं हुए हैं इसलिए बीएसपी अब उत्तर प्रदेश में 11 सीटों पर होने वाले विधानसभा उप चुनाव में अकेले लड़ेगी. हालांकि बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने इस फैसले को लेकर कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया है लेकिन उन्होंने यह बात अपनी पार्टी के नेताओं के साथ बैठक में कही है. वहीं सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव इस समय आजमगढ़ में हैं और वहां रैली को संबोधित कर रहे हैं. इस खबर के बाद माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में महागठबंधन में दरार पड़ गई है. मायावती का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब समाजवादी पार्टी में इस बात की समीक्षा हो रही है कि बीएसपी के साथ गठबंधन पर कितना फायदा या नुकसान हुआ है. गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को मात्र 5 सीटें आई हैं और पिछले चुनाव में एक भी सीटें न जीत पाने वाली बीएसपी को 10 सीटें मिल गईं. इस नतीजे के बाद समाजवादी पार्टी में अंदर ही अंदर इस बात की चर्चा की थी कि बीएसपी का वोट सपा को ट्रांसफर नही हुई है. इस बात की आशंका सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने पहले ही जता दी थी और उनकी बात सही साबित हुई. गौरतलब है कि बसपा के साथ गठबंधन के बावजूद समाजवादी पार्टी को महज पांच सीटें ही मिली हैं. इतना ही नहीं सपा के दुर्ग कहे जाने वाले कन्नौज, बदायूं और फिरोजाबाद में परिवार के सदस्य चुनाव हार गए. कई लोगों का यह भी कहना है कि गठबंधन के सीट बंटवारे में मायावती ने मन मुताबिक सीटें ले लीं. वोटों के अदान-प्रदान के लहजे से देखें तो जिन 10 सीटों पर बसपा ने जीत दर्ज की है, वहां सपा 2014 में दूसरे स्थान पर थी. इसी कारण सपा को असफलता मिली. नगीना, बिजनौर, श्रावस्ती, गाजीपुर सीटों पर सपा के पक्ष में समीकरण था. दूसरा कारण गठबंधन की केमेस्ट्री जमीन तक नहीं पहुंची. सभाओं में भीड़ देखकर इन्हें लगा कि हमारे वोट एक-दूसरे को ट्रान्सफर हो जाएंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं." मायावती को यह मालूम था कि मुस्लिम वोटरों पर मुलायम की वजह से सपा की अच्छी पकड़ है. इसका फायदा मायावती को हुआ. मायावती ने जीतने वाली सीटें अपने खाते में ले ली. कई सीटों पर बसपा उम्मीदवार बहुत मामूली अंतर से हार गए. इसमें मेरठ और मछली शहर शामिल हैं। मछली शहर में मो बसपा उम्मीदवार टी. राम अपने भाजपा प्रतिद्वंद्वी बी.पी. सरोस से मात्र 181 मतों से हार गए. राजनीतिक विश्लेषक राजेन्द्र सिंह के अनुसार, "चुनाव में सपा-बसपा के नेताओं ने तो गठबंधन कर लिया, लेकिन यह जिला और ब्लाक स्तर पर कार्यकर्ताओं को नहीं भाया. आधी सीटें दूसरे दल को देने से उस क्षेत्र विशेष में उस दल के जिला या ब्लाक स्तरीय नेताओं को अपना भविष्य अंधकारमय दिखने लगा." इन सबका परिणाम यह हुआ कि सपा का वोट प्रतिशत 2014 के लोकसभा चुनाव के 22.35 प्रतिशत से घटकर इस बार 17.96 फीसदी रह गया। वोट प्रतितशत बसपा का भी घटा, लेकिन उसके वोट सीटों में बदल गए. 2014 के आम चुनाव में बसपा को 19.77 प्रतिशत मत मिले थे, जो इस बार घटकर 19.26 फीसदी रह गए. कुल मिलाकर समाजवादी पार्टी पहले कोई फैसला कर पाती तो बीएसपी सुप्रीमो ने एक तरह से समाजवादी पार्टी से रिश्ता तोड़ने का ऐलान कर दिया.

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