Thu06042020

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Displaying items by tag: modi - दिव्य इंडिया न्यूज़

5 अप्रैल को रात के 9 बजे 9 मिनट का वक्त घर की बत्तियां बुझाकर दिया जलाने की अपील की 

 

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देशवासियों को सुबह नौ बजे वीडियो संदेश जारी कर संबोधित किया है। इस वीडियो संदेश में पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस और लॉकडाउन को लेकर कई बातें कहीं। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि लॉकडाउन के नौ दिनों में देश में अनुशासन दिखा है। पीएम मोदी ने कहा, साथियों, आज जब देश के करोड़ों लोग घरों में हैं, तब किसी को भी लग सकता है कि वो अकेला क्या करेगा। कुछ लोग ये भी सोच रहे होंगे कि इतनी बड़ी लड़ाई को, वो अकेले कैसे लड़ पाएंगे। लेकिन हम अकेले नहीं हैं। पीएम मोदी ने कहा, ''130 करोड़ देशवासियों के महासंकल्प को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। 5 अप्रैल को रविवार को, रात 9 बजे मैं आप सबके 9 मिनट चाहता हूं।ध्यान से सुनिएगा, 5 अप्रैल को रात 9 बजे, घर की सभी लाइटें बंद करके, घर के दरवाजे पर या बालकनी में, खड़े रहकर, 9 मिनट के लिए मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाएं। और उस समय यदि घर की सभी लाइटें बंद करेंगे, चारो तरफ जब हर व्यक्ति एक-एक दीया जलाएगा, तब प्रकाश की उस महाशक्ति का ऐहसास होगा, जिसमें एक ही मकसद से हम सब लड़ रहे हैं, ये उजागर होगा।''

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नई दिल्ली: देश के बड़े बड़े शेरोन में काम करने वाले यूपी व बिहार के हजारों मज़दूर सड़कों पर फैले हए हैं, साधन न होने की वजह वह लोग घर नहीं जा पा रहे हैं, इससे पूरे देश में अफरा तफरी का माहौल पैदा है | अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐसे लोगों के अवागमन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे शहरों में लोगों की आवाजाही को अविलंब रोकने का काम करें। इसके साथ ही भारत सरकार ने कहा कि प्रवासी मजदूर जहां काम करते हैं वहां उनको मजदूरी के समय पर भुगतान किया जाए। इसके साथ ही प्रवासी मजदूरों के लिए सभी व्यवस्थाएं की जाएं। राज्य सरकारों को प्रवासी कामगारों/छात्रों के लिए समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिया गया है। साथ ही छात्रों / मजदूरों को खाली करने के लिए कहने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिये लागू किये गये लॉकडाउन से हुयी परेशानी के लिये, लोगों, खासकर श्रमिक एवं अन्य कम आय वर्ग के लोगों से माफी मांगते हुये देशवासियों से कोरोना को परास्त करने के लिये रविवार को चिकित्सकों की सलाह मानने और लॉकडाउन का पालन करने की अपील की। मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों से कहा कि लॉकडाउन लागू करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आप सभी को जो भी कठिनाई हुयी है उसके लिये क्षमा मांगता हूं।’’ उन्होंने कहा कि बीमारी का प्रकोप फैलने से पहले ही उससे निपटना चाहिये वरना बीमारी असाध्य हो जाती है।

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के जरिए देश को संबोधित किया. पीएम मोदी ने महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस व देश में लगे लॉकडाउन पर अपने विचार देश की जनता के साथ साझा किए. साथ ही पीएम ने लॉकडाउन के दौरान जनता को होने वाली परेशानियों पर भी अपनी बात रखी. पीएम मोदी ने 'मन की बात' में कोरोना वायरस को हराने वाले कुछ लोगों व डॉक्टरों से भी बात की. पीएम मोदी ने कार्यक्रम में कहा, 'सबसे पहले मैं देशवासियों से क्षमा मांगता हूं. मुझे विश्वास है कि आप मुझे जरूर क्षमा करेंगे. कुछ ऐसे फैसले लेने पड़े हैं, जिसकी वजह से आपको परेशानी हुई है. गरीब भाई-बहनों से क्षमा मांगता हूं. आपकी परेशानी समझता हूं लेकिन 130 करोड़ देशवासियों को बचाने के लिए इसके सिवा और कोई रास्ता नहीं था, इसलिए ये कठोर कदम उठाना आवश्यक था. दुनिया की हालत देखने के बाद लगा था कि यही एक रास्ता बचा है. कोरोना वायरस ने दुनिया को कैद कर दिया है. ये हर किसी को चुनौती दे रहा है. ये वायरस इंसान को मारने की जिद उठाए हुए है. सभी लोगों को, मानव जाति को एकजुट होकर इस वायरस को खत्म करने का संकल्प लेना ही होगा. ये लॉकडाउन आपके खुद के बचाने के लिए है. आपको खुद को और अपने परिवार को बचाना है. आपको लक्ष्मण रेखा का पालन करना ही है. कोई कानून, कोई नियम नहीं तोड़ना चाहता लेकिन कुछ लोग अभी भी ऐसा कर रहे हैं, वो परिस्थितियों की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं.' पीएम ने आगे कहा, 'आरोग्य ही सबसे बड़ा धन है. नियम तोड़ने वाले अपने व दूसरों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. ऐसा करने से इस वायरस से बचना मुश्किल होगा. इस लड़ाई के योद्धा डॉक्टर, पैरा-मेडिकल व अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोग हैं. मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद देता हूं. धन और किसी खास कामना को लेकर नहीं, बल्कि मरीज की सेवा के लिए, दया भाव रखकर कार्य करता है, वो सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक होता है. जो हमारे फ्रंट लाइन सोल्जर हैं. खासकर के हमारी नर्सेज बहनें हैं, नर्सेज का काम करने वाले भाई हैं, डॉक्टर हैं, पैरा मेडिकल स्टाफ हैं, ऐसे साथी जो कोरोना को पराजित कर चुके हैं. आज हमें उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए. साथियों हमारे यहां तमाम साथी आपको, पूरे देश को इस संकट से बाहर निकालने में जुटे हैं. ये जो बाते हमें बताते हैं उन्हें हमें सुनना ही नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन में उतारना भी है.' प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'मानवता से भरी हुई हर नर्स को आज मैं नमन करता हूं. आप सभी जिस सेवा भाव से कार्य करते हैं वो अतुलनीय है, ये भी संयोग है कि वर्ष 2020 इंटरनेशनल ईयर ऑफ द नर्सेज़ एंड मिडवाइफ के तौर पर मना रहा है. आप जैसे साथी चाहे वो डॉक्टर हों, नर्स हों, पैरा मेडिकल, आशा, एएनएम कार्यकर्ता, सफाई कर्मचारी हो आपके स्वास्थ्य की भी देश को बहुत चिंता है. इसी को देखते हुए ऐसे करीब 20 लाख साथियों के लिए 50 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा की घोषणा सरकार ने की है. जरा आप अपने पड़ोस में मौजूद छोटी परचून की दुकान के बारे में सोचिए, उन ड्राइवरों, उन वर्कर्स के बारे में सोचिए, जो बिना रुके अपने काम में डटे हैं ताकि देशभर में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन में कोई रुकावट ना आए. साथियों हमारे यहां तमाम साथी आपको, पूरे देश को इस संकट से बाहर निकालने में जुटे हैं. ये जो बातें हमें बताते हैं उन्हें हमें सुनना ही नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन में उतारना भी है.' पीएम मोदी ने आगे कहा, 'जरा सोचिये की आप लॉकडाउन के समय भी जो टीवी देख पा रहे हैं, घर में रहते हए जिस फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन सब को सुचारू रखने के लिए कोई न कोई अपनी जिंदगी खपा रहा है. आपने देखा होगा, बैंकिंग सेवाओं को सरकार ने चालू रखा है और बैंकिंग क्षेत्र के हमारे लोग पूरे लगन से, आपकी सेवा में मौजूद हैं. आज के समय, ये सेवा छोटी नहीं है. उन बैंक के लोगों का भी हम जितना धन्यवाद करें, उतना कम है. साथियों, मुझे कुछ ऐसी घटनाओं का पता चला है जिनमें कोरोना वायरस के संदिग्ध या फिर जिन्हें होम क्वारंटाइन में रहने को कहा गया है, उनके साथ कुछ लोग बुरा बर्ताव कर रहे हैं. ऐसी बातें सुनकर मुझे अत्यंत पीड़ा हुई है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. ऐसे लोग कोई अपराधी नहीं हैं बल्कि वायरस के संभावित पीड़ित भर हैं. इन लोगों ने दूसरों को संक्रमण से बचाने के लिए खुद को अलग किया है और क्वारंटाइन में रह रहे हैं. कई जगह पर लोगों ने अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लिया है.'

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को सम्बोधित करते हुए कहा है कि हर भारतीय को सतर्क रहने की जरूरत है. पीएम ने कहा कि पूरा विश्व इस समय संकट के गंभीर दौर से गुजर रहा है. कभी कोई प्राकृतिक संकट आता है तो कोई देश या राज्यों तक सीमित रहता है. यह आपदा दुनिया भर के लोगों को संकट में डाल दिया है. प्रथम विश्व युद्ध के समय भी इतनी परेशानी नहीं हुई थी, जितनी अभी कोरोना की वजह से है. पिछले दो महीने से हम कोरोना की खबरे सुन रहे हैं, देख रहे हैं. देशवासियों ने बचने के लिए कोशिश किया है, फिर भी परेशानी बढ़ रही है. पीएम ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना से निश्चिंत हो जाना सही नहीं है. हमें सजग रहने की जरूरत है. आपसे हमने जब भी जो भी मांगा है, देशवासियों ने निराश नहीं किया है. 130करोड़ देशवासियों से कुछ मांगने आया हूं. प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे आपके आने वाले कुछ सप्ताह चाहिए. आपका आने वाला कुछ समय चाहिए. अभी तक विज्ञान कोरोना महामारी से बचने के लिए कोई उपाय नहीं ढूंढ़ पाया है, न ही कोई वैक्सीन बन पाई है. दुनिया के जिन देशों में कोरोना का प्रभाव जहां कोरोना का संकट सामान्य बात नहीं है, जब बड़े-बड़े और विकसित देश इससे प्रभावित है, तो ऐसे में यह सोचना कि भारत पर इसका असर नहीं पड़ेगा गलता है. दो चीजें जरूरी है-संकल्प और संयम. अपना संकल्प और दृढ़ करना होगा, कि इस वैश्विक महामारी को रोकने के लिए एक नागरिक के नाते हम केंद्र और राज्यों के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन करेंगे. आज हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम स्वयं संक्रमित होने से बचेंगे और दूसरों को भी संक्रमित होने से बचाएगंगे. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उच्चस्ततीय बैठक में हिस्सा लिया और कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर, स्थानीय लोगों, संस्थाओं के माध्यम से इस समस्या निपटने में सहायता ली जानी चाहिए. इसके साथ उन्होंने अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों से और कदम उठाने की भी अपील की. साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य सरकारों, मेडिकल क्षेत्र के लोगों, सेना और सुरक्षा बलों, नगर निगम के कर्मचारियों का आभार जताया जो कि इस समय बीमारी से लड़ने के लिए अग्रिम मोर्चे पर जूझ रहे हैं.

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अपनी हर लाइन पर चुन-चुनकर कांग्रेस पर हमला किया। पीएम मोदी ने डंडे वाले बयान पर जमकर तंज कसते बिना नाम लिए राहुल गांधी को ट्यूबलाइट बता दिया।

दरअसल, दिल्ली विधानसभा चुनाव-2020 की रैली में कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक विवादिय बयान दिया था। राहुल गांधी ने दिल्ली के चुनावी रैली में कहा था, ''ये दो नरेंद्र मोदी भाषण दे रहे हैं, छह महीने बाद ये घर से नहीं निकल पाएंगे। हिन्दुस्तान के युवा इनको ऐसा डंडा मारेंगे, इनको समझ में आ जाएगा कि हिन्दुस्तान के युवा को रोजगार दिए बिना ये देश आगे नहीं बढ़ सकता।'' 

इसपर संसद में पलटवार करते हुए पीएम मोदीने कहा, ''मैंने सुना है कि कांग्रेस नेता ने कहा कि 6 महीने में मोदी को डंडे पड़ेंगे। मैं इन छह महीनों में और ज्यादा सूर्य नमस्कार करूंगा, उसकी संख्या बढ़ाऊंगा। ताकि मेरी पीठ को भी हर डंडा झेलने की आदत हो जाए। मैनें ऐसे भी पिछले कुछ सालों में इतनी गाली सुनी है कि मैं गाली प्रफू बन गया हूं...अब छह महीने का वक्त मिला है तो गाली प्रफू पीठ को भी डंडा प्रफू बन लूंगा।'' संसद के बजट सत्र का आज छठा दिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में जवाब देते हुए राहुल गांधी पर पलटवार किया है।

पीएम मोदी ने कहा, 20 साल से मैंने जिस प्रकार से गंदी गाली सुनकर खुद को गाली प्रूफ बना दिया है तो, 6 महीने ऐसी मेहनत करूंगा की मेरी पीठ को हर डंडा सहने की ताकत मिले। 

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी सरकार के प्रति उद्यमियों के मन में पैदा हो रहे संशय को दूर करते हुये सोमवार को कहा कि कुछ बेईमान और भ्रष्टाचारी लोगों पर कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि उनकी सरकार उद्योगपतियों के खिलाफ है।

पीएम मोदी ने कहा कि पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य इस दशक का महज एक पड़ाव, हमारे लक्ष्य और बड़े हैं। 2014 के बाद लिए गए हर निर्णय में यह ध्यान रखा गया कि उद्यमियों को होने वाली परेशानी दूर हो।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आईबीसी ईमानदार उद्यमियों का भविष्य बचाने का कानून, इससे इंस्पेक्टर राज खत्म हुआ। प्रस्तावित श्रम संहिता से मजदूरों, उद्योगपतियों दोनों को लाभ होगा। कुछ बेईमान और भ्रष्टाचारी लोगों पर कार्रवाई को लेकर सरकार को उद्योगपतियों के खिलाफ बताना दुष्प्रचार है। 

भारतीय उद्यमियों की क्षमता को कम करके आंकना सही नहीं। जीरो इफेक्ट, जीरो डिफेक्ट पर अमल करते हुए उत्पाद बनाने होंगे तभी हमारा निर्यात बढ़ सकता है। वित्त वर्ष 2018-19 में यूपीआई से हुआ करीब नौ लाख करोड़ रुपये का लेनदेन, इस वित्त वर्ष में दिसंबर तक ही यह आंकड़ा 15 लाख करोड़ रुपये।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य महज एक पड़ाव है। हमारे लक्ष्य और इससे भी बड़े हैं। उन्होंने उद्योगपतियों का हौसला बढ़ाते हुये कहा कि यह दशक भारतीय उद्यमियों का होगा। देश के विकास के लिए भारतीय उद्योगपति अधीर हैं।

मोदी ने कहा कि 2014 के बाद लिए गए हर निर्णय में यह ध्यान रखा गया कि उद्यमियों को होने वाली परेशानी दूर हो। आईबीसी ईमानदार उद्यमियों का भविष्य बचाने का कानून है। इसने इंस्पेक्टर राज को खत्म किया है। श्रम संहिता को लेकर हो रही आलोचनाओं के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित श्रम संहिता से मजदूरों और उद्योगपतियों दोनों को लाभ होगा।

उन्होंने कहा कि आज देश में कॉरपोरेट कर की दरें सबसे कम हैं ताकि कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। मोदी ने कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 में यूपीआई के जरिये करीब नौ लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। इस वित्त वर्ष में दिसंबर तक ही यह आंकड़ा 15 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।

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बैंकाक: भारत ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। सूत्रों के हवाले से ये जानकारी सामने आई है। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि अभी समझौते को लेकर भारत की जरूरी चिंताएं अपनी जगह पर बनी हुई हैं। आरसीईपी समझौता इसकी मूल मंशा को नहीं दर्शाता है। इसका परिणाम उचित या संतुलित नहीं नजर आ रहा है।

सूत्रों के अनुसार आरसीईपी के मुख्य मुद्दों में जिस पर भारत ने चिंता जताई है, उनमें - आयात वृद्धि के खिलाफ अपर्याप्त संरक्षण, चीन के साथ अपर्याप्त अंतर, आधार वर्ष को 2014 के रूप में रखना और बाजार पहुंच और गैर-टैरिफ बाधाओं पर कोई विश्वसनीय भरोसा नहीं होना शामिल है। भारत का कहना है कि इस समझौते में चीन की प्रधानता नहीं होनी चाहिए। इससे भारत को व्यापारिक घाटा होने की आशंका है।

सरकार के सूत्रों के अनुसार, 'भारत का रुख व्यावहारिकता का मिश्रण है, जो गरीबों के हितों की रक्षा करने और भारत के सेवा क्षेत्र को लाभ देने के प्रयास की बात करता है न कि वह सेक्टरों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा से दूर जाना चाहता हैं।' 

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि लोगों ने महाराष्ट्र, हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में विश्वास को दोहराया है। सामान्य ट्रेंड पांच साल बाद सरकार बदलने का रहा है। मौजूदा वातावरण में पांच साल काम करके दोबारा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर विश्वास और आशीर्वाद प्राप्त करके आना बहुत बड़ी बात है। पीएम मोदी ने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा की जनता ने पार्टी के प्रति जो विश्वास जताया है। इसके लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं। दिवाली से पहले जनता ने आशीर्वाद दिया। दोनों राज्यों के सभी पदाधिकारी, सभी कार्यकर्ता ने भी जनता का विश्वास जीतने में अथाह प्रयास किया, लोगों के आशीर्वाद प्राप्त किए, उनका भी बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। उन्होंने कहा कि जो लोग हरियाणा की राजनीति जानते हैं उनको पता है कि किसी भी दल के साथ हमें समझौता अगर करना होता था तो ज्यादातर उन दलों की टर्म एंड कंडीशन पर कभी 5 तो कभी 10 सीटों पर और वो भी जो वो कहें उन सीटों पर लड़ना पड़ता था। पीएम मोदी ने कहा कि हरियाणा अपने आप में एक अभूतपूर्व विजय है क्योंकि इन दिनों एक सरकार 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करके दोबारा जीतने की घटनाएं बहुत कम होती है और ऐसे वातावरण में दोबारा सबसे बड़े दल के रूप में विश्वास और आशीर्वाद प्राप्त करके आना बहुत बड़ी बात है। पीएम ने कहा कि महाराष्ट्र देश की आर्थिक राजधानी है। यहां पिछले 50 वर्ष में एक भी मुख्यमंत्री लगातार पूरे 5 वर्ष तक सेवा नहीं कर पाया। 5 वर्ष तक मुख्यमंत्री के रूप में लगातार कार्य करने का काम 50 वर्ष बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस ने किया। उन्होंने कहा कि फिर से सत्ता सौंपने पर जिम्मेदारियां बढ़ती हैं। दोनों राज्यों में पार्टी फिर से ज्यादा मेहनत करेगी और लोगों के विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश करेगी। इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र और हरियाणा की जनता का धन्यवाद दिया।

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अपने बांग्लादेशी समकक्ष के साथ सुरक्षा, कारोबार, सम्पर्क सहित दोनों देशों के संबंधों के विविध आयामों पर व्यापक चर्चा की और संबंधों को गहरा बनाने पर जोर दिया। सरकारी सूत्रों ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत में मुख्य रूप से सहयोग के क्षेत्रों को विस्तार देने पर जोर दिया गया। नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई, जहां तीन परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष रक्षा, सुरक्षा, कारोबार और सम्पर्क जैसे क्षेत्रों में संबंधों को मजबूती प्रदान करना चाहते हैं। इससे पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हसीना से भेंट की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया, ''विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से चर्चा की। उन्होंने बांग्लादेश के साथ संबंधों को भारत द्वारा उच्च प्राथमिकता देने की फिर से पुष्टि की। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना गुरुवार को चार दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंची। बांग्लादेश और भारत में संसदीय चुनाव होने के बाद हसीना की यह पहली भारत यात्रा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शनिवार को कहा कि वार्ता का मुख्य जोर द्विपक्षीय संबंधों को अगले स्तर तक ले जाने पर होगा, खासतौर पर कारोबार और सम्पर्क बढ़ाने पर। हसीना ने गुरुवार (3 अक्टूबर) तथा शुक्रवार (4 अक्टूबर) को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में हिस्सा लिया था।

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नई दिल्ली: देश में बढ़ रहे मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या) के मामलों पर चिंता जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला खत लिखने वाले रामचंद्र गुहा, मणि रत्नम और अपर्णा सेन समेत करीब 50 लोगों के खिलाफ बिहार के मुजफ्फरपुर में गुरुवार को प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। स्थानीय वकील सुधीर कुमार ओझा की ओर से दो महीने पहले दायर की गई एक याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सूर्य कांत तिवारी के आदेश के बाद यह प्राथमिकी दर्ज हुई है। ओझा ने कहा कि सीजेएम ने 20 अगस्त को उनकी याचिका स्वीकार कर ली थी। इसके बाद बृहस्पतिवार को सदर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज हुई। ओझा का आरोप है कि इन हस्तियों ने देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को कथित तौर पर धूमिल किया। पुलिस ने बताया कि प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गयी है। इसमें राजद्रोह, उपद्रव करने, शांति भंग करने के इरादे से धार्मिक भावनाओं को आहत करने से संबंधित धाराएं लगाई गईं हैं।

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