Tue11122019

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Displaying items by tag: modi - दिव्य इंडिया न्यूज़

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव के मद्देनजर दिल्ली के रामलीला मैदान में चल रहे भाजपा के दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद के अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज हमेशा की तरह कांग्रेस की कमियां और अपनी पीठ थपथपाते रहे । पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब सरकार पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा है। हम इस बात पर गर्व कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार है और देश के 16 राज्यों में हम या तो सरकार चला रहे हैं या सरकार के सहयोगी हैं। इसमें आप सभी का सहयोग मूल्यवान है। पीएम मोदी ने कहा कि जो राजनीतिक दल एक जमाने में कांग्रेस के तौर तरीकों को सही नहीं मानते थे वो आज एकजुट हो रहे हैं। जब कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता जमानत पे हैं, तब ये दल कांग्रेस के सामने सरेंडर कर रहे हैं। ये देश के मतदाताओं को धोखा देने का प्रयास है। सामान्य श्रेणी के गरीब युवाओं को शिक्षा और सरकारी सेवाओं में 10% आरक्षण नए भारत के आत्मविश्वाश को आगे बढ़ाने वाला है । ये सिर्फ आरक्षण नहीं है बल्कि एक नया आयाम देने की कोशिश है। उन्होने कहा कि पहले से जिनको आरक्षण की सुविधा मिल रही थी उनके हक़ को छेड़े बिना, छीने बिना भाजपा सरकार द्वारा सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हमसे पहले की सरकार का जो कार्यकाल था, उसने देश को बहुत अंधेरे में धकेल दिया था। अगर मैं कहूं कि भारत ने 2004 से 2014 के महत्वपूर्ण 10 साल, घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों में गंवा दिए, तो गलत नहीं होगा। अयोध्या विषय में कांग्रेस अपने वकीलों के माध्यम से न्याय प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नहीं चाहती की अयोध्या विषय का हल आए। कांग्रेस का ये रवैया किसी को भूलना नहीं चाहिए। नेशनल हेराल्ड और CBI पर बोले मोदी- पीएम ने कांग्रेस की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज उन्हें सीबीआई स्वीकार नहीं है, कल कोई दूसरी संस्था स्वीकार नहीं होगी। आर्मी, पुलिस, सुप्रीम कोर्ट, इलेक्शन कमीशन, सीएजी, सब गलत हैं, लेकिन एकमात्र वही सही हैं। क्या हम राष्ट्र को उनके भरोसे छोड़ सकते हैं? उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसका नामदार परिवार सिस्टम को कैसे तोड़ता है उसका ये उदाहरण है कि नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस अध्यक्ष व अन्य नेता जमानत पर बाहर हैं। इस केस से पता चलता है कि कांग्रेस के नेता जनता का जमीन व धन भी हड़प लेते हैं। पीएम मोदी ने किसानों पर बोलते हुए कहा कि जब हम किसानों की समस्या के समाधान की बात करते हैं तो पहले की सच्चाइयों को स्वीकार करना जरूरी है। पहले जिनके पास किसानों की समस्याओं का हल निकालने का जिम्मा था, उन्होंने शॉर्टकट निकाले, उन्होंने किसानों को सिर्फ मतदाता बना रखा। हम अन्नदाता को ऊर्जादाता भी बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने अपने आखिरी पांच साल में किसानों से 7 लाख मीट्रिक टन दलहन और तिलहन की खरीद की। हमने बीते साढ़े चार साल में 95 लाख मीट्रिक टन उपज किसान से खरीदी। अब भी हम किसानों के लिए बहुत कुछ करना चाहते हैं। इस दौरान उन्होंने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई को भी याद किया। उन्होंने कहा यह राष्ट्रीय परिषद की पहली बैठक है जो अटलजी के बिना हो रही है। वो आज जहां से भी हमें देख रहे होंगे, उन्हें अपने बच्चों की इस ऊर्जा औ राष्ट्र के प्रति समर्पण को देखकर संतोष हो रहा होगा। उन्होने कहा कि स्वतंत्रता के बाद अगर सरदार बल्लभ भाई पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री बनते तो देश की तस्वीर कुछ और ही होती, वैसे ही 2000 के चुनाव के बाद अगर अटल जी प्रधानमंत्री बने रहते तो आज भारत कहीं और होता। पीएम ने कहा कि विरोधी दलों के लोग आरोप लगाते हैं हमने सिर्फ योजनाओं के नाम बदले हैं। ऐसे लोग ये बताएं कि कितनी योजनाएं नरेन्द्र मोदी के नाम से चल रही है। उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि क्या आयुष्मान भारत योजना के आगे नरेन्द्र मोदी लिखा है, क्या भारत माला, सागर माला के आगे नरेन्द्र मोदी लिखा है, क्या उज्ज्वला योजना मोदी के नाम से जानी जाती है? पहले दाल की कीमतों को लेकर कितना हल्ला मचाया जाता था। अब कितने दिन हो गए कि टीवी पर दाल की कीमतों पर ब्रेकिंग न्यूज नहीं आई। यह संभव हुआ क्योंकि हमारी सरकार ने नई नीतियां बनाई हैं।

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नई दिल्ली : मोदी सरकार ने लोकसभा चुनावों से पहले बड़ा फैसला किया है। केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों के लिए सरकारी नौकरियों एवं शिक्षण संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। सरकार इस आरक्षण को लागू करने के लिए मंगलवार को संसद में संशोधन विधेयक पेश करेगी। केंद्रीय कैबिनेट ने सोमवार को इस प्रस्ताव को पास किया। सरकार के इस फैसले से एससी,एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण की पुरानी व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी। अभी सरकारी नौकरियों में 49.5 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था लागू है। इससे अधिक आरक्षण के लिए सरकार को मौजूदा आरक्षण कानून में संशोधन करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 50 फीसदी से अधिक आरक्षण पर रोक लगाई है। सरकार ने 10 फीसदी ईबीसी कोटा का प्रस्ताव किया है। इस बीच कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस ने सरकार से पूछा है कि वह साढ़े चार साल तक क्या करती रही है और वह संशोधन विधेयक को पारित कैसे कराएगी। कैबिनेट के इस ऐतिहासिक फैसले का लाभ राजपूत, ब्राह्मण, भूमिहार, बनिया सहित आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को मिलेगा। आर्थिक रूप से पिछड़े इन वर्गों को 10 फीसदी आरक्षण का लाभ दाने के लिए सरकार को अनुच्छेद 15 एवं 16 में स्पेशल क्लॉज जोड़कर संवैधानिक संशोधन करने होंगे। मोदी सरकार का यह फैसला 2019 के लोकसभा चुनावों में उसके लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में मिली भाजपा की हार की एक वजह एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ सवर्णों की नाराजगी भी बताई जा रही है। समझा जाता है कि सरकार आरक्षण का मरहम लगा गरीब सवर्णों को अपने पाले में करने का दांव खेला है। भाजपा सांसद एवं दलित नेता उदित राज ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है।

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नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नमो एप (Namo App) के जरिए बूथ लेवल कार्यकर्ताओं से बातचीत की। संवाद के दौरान उन्होंने कांग्रेस और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्र बाबू नायडु पर जमकर निशाना साधा। पीएम ने नमो एप के दौरान कुरनूल, नरसारोपेट, तिरुपति, अनंतपुर और कडपा के कार्यकर्ताओं ने बातचीत के दौरान उन्होंने एनटीआर को याद किया। उन्होंने आगे कहा कि मजबूत बूथ और बूथ की विजय से सरकार बनती है। उन्होने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर जमकर हमला करते हुए कहा कि प्रदेश में सत्ता में बैठे लोगों ने एनटीआर की पीठ में छूरा भोंका। यह एनटीआर ही थे जिन्होंने कांग्रेस मुक्त राष्ट्रीय आंदोलन के बढ़ाया। लेकिन देश का दुर्भाग्य है कि उनके दामाद ने कांग्रेस के सामने सिर झुका दिया है। नटीआर ने तेलुगु गौरव और तेलुगु हितों के साथ विश्वासघात करने के लिए कांग्रेस को कभी माफ नहीं किया. आज आंध्र में सत्ता में बैठे लोग अपनी सत्ता बचाने के लिए इतने बेताब हैं कि उन्होंने तेलुगु हितों के साथ विश्वासघात किया और दूसरी बार NTR को पीछे कर दिया।

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नई दिल्ली: बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए लोकसभा की 543 सीटों में से 257 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाएगी। लोकसभा चुनाव को लेकर इंडिया टीवी और सीएनएक्स के ओपिनियन पोल के मुताबिक एनडीए 272 के जादुई आंकड़े से 15 सीट दूर रह जाएगी। यह ओपिनियन पोल बीते साल 15 दिसंबर से लेकर 25 दिसंबर तक सभी 543 लोकसभा सीट पर कराया गया है। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए (सपा और बसपा को हटाकर) 146 सीटें जीत सकती है जो बहुमत के जादुई आंकड़े से बहुत दूर है। यह सर्वे राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद कराया गया है। सर्वे के अनुसार, सरकार बनाने में 'अन्य' की भूमिका अहम हो सकती है क्योंकि उन्हें 543 लोकसभा सीट में से 140 सीटों पर जीत हासिल कर सकते हैं। 'अन्य' में समाजवादी पार्टी, एआईएडीएमके, टीएमसी, तेलंगाना राष्ट्र समिति, बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, लेफ्ट फ्रंट, महबूबा मुफ्ती की पीडीपी, बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम, आईएनएलडी, आम आदमी पार्टी, जेवीएम(पी), तमिलनाडु की एएमएमके और स्वतंत्र सांसद शामिल हैं। सत्तारूढ़ एनडीए में बीजेपी, शिवसेना, अकाली दल, जद(यू), मिजो नेशनल फ्रंट, अपना दल, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, रामविलास पासवान की लोजपा, मेघालय की एनपीपी, पुदुचेरी की आईएनआरसी, नागालैंड की पीएमके और एनडीपीपी शामिल हैं। वहीं इंडिया टीवी की प्रेस रिलीज के मुताबिक, यूपीए में कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, डीएमके, टीडीपी, शरद पवार की एनसीपी, जेडीएस, अजित सिंह की आरएलडी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, आएसपी, जेएमएम, आईयूएमएल, केरल कांग्रेस (मैनी) और आरएलएसपी शामिल हैं। सर्वे के अनुसार, एनडीए का 37.15 प्रतिशत, यूपीए को 29.92 प्रतिशत और अन्य को 32.93 प्रतिशत वोट मिलेंगे।

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नई दिल्ली: झारखंड में एक सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र करते हुए कहा कि पहले की सरकारों में एक परिवार के नाम पर योजनाएं बनती थीं जिसमें घर की कम, उस परिवार की ज्यादा चिंता होती थी. पीएम मोदी ने कहा हमने आवास योजना को किसी के नाम से नहीं बनाया है, इस योजना में लाभार्थी को बिचौलिए को पैसे नहीं देने पड़ते हैं. कुछ लोग कहते हैं कि आवास योजना तो पहले भी थी इसमें नया क्या है. पीएम मोदी ने पूछा कि अगर आवास योजना पहले से थी तो वो घर किसी को कहीं नजर क्यों नहीं आए. पीएम मोदी ने कहा कि हमने नमो आवास य़ोजना, नरेंद्र मोदी योजना, रघुवर दास आवास योजना नहीं बनाई, बल्कि सिर्फ प्रधानमंत्री आवास योजना बनाई ताकि जो भी प्रधानमंत्री आए वह इस योजना को आगे बढ़ाए. क्योंकि हमें नाम की नहीं बल्कि काम की ज्यादा चिंता है. पहले की योजनाओं में मॉनिटरों की योजना नहीं थी. हमने इसके लिए एक प्रणाली तैयार की है. घर बनाने की योजना की समय-समय पर जांच की जाती है. उनकी फोटो भी रखी जाती हैं, जिन्हें कोई भी देख सकता है. बिजली का कनेक्शन, रसोई का कनेक्शन जैसी सुविधा घर के साथ मिल रहे हैं. पहले घर छोटे बनते थे, अब हमने उनका साइज बढ़ा दिया है, साथ ही डिजाइन भी बदल दिए हैं. मोदी ने कहा, 'जो लोग मुझ पर आज कीचड़ उछाल रहे हैं, उन्होंने गरीबों के लिए कुछ काम नहीं किया. हमने इतने समय में 1 करोड़ 25 लाख घर बना दिए. उनसे इतने काम करने में कई साल लग जाते. पहले घर बनाने में 18 महीने लगते थे. हमने ऐसा काम किया कि 12 महीने में लोग हमारे बनाए घरों में रहने लगे.' उन्होंने कहा, 'जब देश में रिमोट कंट्रोल वाली सरकार थी तो उन्होंने पांच साल में गांवों में सिर्फ 25 लाख कर बनवाये थे और हमनें 5 साल से भी कम समय में 1 करोड़ 25 लाख घर बनवा दिये हैं.' आपको बता दें कि पीएम मोदी लोकसभा चुनाव के ऐलान से पहले 100 रैलियां कर रहे हैं. इसी कड़ी में वह आज झारखंड और ओडिशा के दौरे पर हैं जहां वह रैलियों के साथ-साथ कई परियोजनाओं का भी उद्घाटन करेंगे.

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कालीनगर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के लोगों को शुक्रवार को भरोसा दिलाया कि एनआरसी से कोई भी असल नागरिक नहीं छूटेगा और उन्होंने नागरिकता विधेयक को संसद की जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई. मोदी ने कालीनगर में ‘विजय संकल्प समावेश रैली’ को संबोधित करते हुए कहा, ‘मैं एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) के दौरान कई लोगों को हुई दिक्कतों और मुश्किलों के बारे में जानता हूं लेकिन मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि किसी भी वास्तविक भारतीय नागरिक के साथ अन्याय नहीं होगा.’ उन्होंने पूर्वोत्तर में भाजपा की लोकसभा चुनाव प्रचार मुहिम की शुरूआत करते हुए कहा, ‘सरकार नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर और काम कर रही है. यह लोगों की जिंदगी और भावनाओं से जुड़ा है. यह किसी के फायदे के लिए नहीं है बल्कि अतीत में हुए कई गलत कार्यों एवं अन्याय का प्रायश्चित है.’ मोदी ने 35 साल से ‘लटके’ असम समझौते की धारा छह को लागू करने के सरकार के निर्णय के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा, ‘अब असम की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं भाषायी पहचान की रक्षा का रास्ता साफ है.’ मोदी ने कहा, ‘हालिया पंचायत चुनावों में भाजपा के लिए मतदान करने के कारण मैं असम के लोगों का ऋणी हूं और मैं राज्य का विकास सुनिश्चित करके इस ऋण को चुकाने के लिए प्रतिबद्ध हूं.’ उन्होंने 25 दिसंबर को असम के बोगीबील में देश के सबसे लंबे रेल-सड़क पुल के उद्घाटन का जिक्र करते हुए कहा, ‘मेरा सौभाग्य है कि मुझे पिछले 10 दिन में दूसरी बार असम के लोगों से मिलने का अवसर मिला. बराक और ब्रह्मपुत्र घाटियां केवल राज्य ही नहीं, बल्कि देश के लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं.’ प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार मुहिम के पहले चरण के तहत इम्फाल से सिलचर के कछार जिले पहुंचे. वह आचार संहिता लागू होने से पहले 100 दिनों में 20 राज्यों में रैलियां संबोधित करेंगे. भाजपा और उसके सहयोगियों ने क्षेत्र के आठ राज्यों में 25 संसदीय सीटों में से 21 में जीत का लक्ष्य रखा है. असम में पार्टी को 14 में से कम से कम 11 सीटों पर जीत की उम्मीद है. भाजपा को 2014 लोकसभा चुनाव में असम में 14 में से सात संसदीय सीटों पर जीत मिली थी. इसके अलावा 2016 विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने 61 सीटों पर जीत हासिल की थी.

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नई दिल्ली: वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने पूर्ण बहुमत के साथ देश की कमान संभाली थी तो जनता के साथ ही उद्योग जगत में भी उम्‍मीद जगी थी। मनमोहन सिंह की सरकार पर ‘पॉलिसी पारालिसिस’ (नीतिगत निर्णय लेने में अक्षमता) का आरोप लगाया गया था। देश की आर्थिक स्थिति को लेकर सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनोमी (CMIE) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों से देश की अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर बेहद निराशाजनक तस्‍वीर सामने आई है। दिसंबर तिमाही (वित्‍त वर्ष 2018-19) में निवेश से लेकर नई परियोजनाओं तक में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यह पिछले 14 वर्षों के सबसे न्‍यूनतम स्‍तर तक पहुंच गया है। CMIE की ओर से जारी डेटा के अनुसार, दिसंबर तिमाही (अक्‍टूबर-दिसंबर) में विभिन्‍न कंपनियों (सरकारी और निजी क्षेत्र) ने एक लाख करोड़ रुपए मूल्‍य की नई परियोजनाओं की घोषणा कीं। सितंबर तिमाही के मुकाबले यह 53 फीसद और पिछले साल की इसी तिमाही की तुलना में 55 फीसद तक कम है। मार्च में समाप्‍त हुई तिमाही में कंपनियों ने 4 लाख करोड़ रुपए मूल्‍य की नई परियोजनाओं की घोषणा की थी। यह आंकड़ा जून में 2.95 लाख करोड़ रुपए और सितंबर तिमाही में 2.12 लाख करोड़ रुपए तक था। जून 2013 से दिसंबर 2018 के बीच के आंकड़ों की तुलना करें तो दिसंबर 2014 में संपन्‍न तिमाही में सबसे ज्‍यादा 6.4 लाख करोड़ रुपए मूल्‍य की नई परियोजनाओं की घोषणा की गई थी। दिलचस्‍प है कि 2014 में नरेंद्र मोदी सत्‍ता में आए थे और वर्ष 2018 के अंत में एक बार फिर से जनता के बीच जाने की तैयारी में हैं। नई परियोजनओं की घोषणा और निवेश के मामले में सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियों की हालत कमोबेश एक समान है। CMIE के आंकड़ों के अनुसार, निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा दिसंबर तिमाही में (सितंबर तिमाही की तुलना में) नई परियोजनाओं की घोषणा में 62 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। पिछले साल की इसी तिमाही से तुलना में यह आंकड़ा 64 फीसद है। सरकारी क्षेत्र की कंपनियों में भी नए निवेश को लेकर सुस्‍ती का आलम है। हाल में संपन्‍न दिसंबर तिमाही में सरकारी कंपनियों ने सितंबर तिमाही की तुलना में 37 फीसद तक कम नई पर‍ियोजनाओं की घोषणा की। तकरीबन सभी सेक्‍टर्स में नई परियोजनाओं की घोषणा में बड़ी कमी दर्ज की गई है। CMIE के आंकड़ों में पूर्व में घोषित परियोजनाओं के बीच में ही लटकने की भी बात कही है। इससे सबसे ज्‍यादा पावर और मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सेक्‍टर प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, इसकी सबसे बड़ी वजह फंड की कमी है। पैसे न होने की वजह से कई परियोजनाओं पर बीच में ही काम रुक गया है। दरअसल, जोखिम वाले कर्ज (NPA) को लेकर आरबीआई की सख्‍ती से बैंकों ने भी नया लोन देने को लेकर अतिरिक्‍त सावधानी बरतने लगे हैं। नई परियोजनाओं और निवेश में गिरावट का सीधा असर रोजगार के नए अवसरों पर भी पड़ता है। उद्योग-धंधों की रफ्तार धीमी पड़ने से रोजगार के नए अवसरों पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। कंपनियों द्वारा नई परियोजनाओं की घोषणा में व्‍यापक कमी का प्रभाव रोजगार सृजन पर भी देखने को मिल रहा है।

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गुरदासपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को गुरदासपुर में कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सेना को कमजोर करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि गुरदासपुर की धरती देश, समाज, मानवता के लिए हमेशा से प्रेरणा देने वाली रही है। लिहाज़ा साल 2022 तक न्यू इंडिया के निर्माण के लिए भी सवा सौ करोड़ देशवासियों के संकल्प को सिद्ध करने के लिए यहां से नई ऊर्जा का संचार होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कर्जमाफी की घोषणा की लेकिन माफ नहीं किया। जिनका इतिहास राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ रहा हो और जो आज भी देश के सैनिकों और सेना को कमजोर करने के लिए झूठ फैला रहे हो, जिनका इतिहास सिर्फ एक परिवार के जयगान कर रहा हो और जो आज भी वन्दे मातरम और भारत माता का विरोध कर रहे हो। जिनका इतिहास हज़ारों सिख भाई-बहनों को बेहरहमी से हत्या का हो और जो आज भी दंगों के आरोपियों को मुख्यमंत्री पद का पुरस्कार दे रहे हों। उन लोगों से पंजाब समेत देशवासियों को सतर्क रहने की जरुरत है। एक परिवार के इशारे पर जिन-जिन आरोपियों को ‘सज्जन’ बताकर फाइलें दबा दी गई थीं, NDA सरकार ने उनको बाहर निकाला, SIT का गठन किया और परिणाम सबके सामने हैं। एनडीए की सरकार विकास की पंचधारा - जन-जन की सुनवाई के साथ ही, बच्चों को पढ़ाई, युवा को कमाई, बुज़ुर्गों को दवाई, किसान को सिंचाई के लिए काम कर रही है। सिंचाई और सॉयल हेल्थ कार्ड के साथ-साथ किसान की उपज को सही दाम दिलाने के लिए, उपज में वैल्यू एडिशन के लिए भी अनेक फैसले लिए गए हैं। किसानों का अनाज, फसल-सब्जियां, दूध बर्बाद ना हो, इसके लिए प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत पूरे देश में व्यापक स्तर पर काम हो रहा है।

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गाज़ीपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि कांग्रेस ने सरकार में आते ही कालाबाजारी की। उसने किसानों को कर्जमाफी के नाम पर लॉलीपॉप थमाया। अब ऐसे में क्या लोग इस पर भरोसा करेंगे? पीएम ने ये बातें शनिवार (29 दिसंबर) को यूपी के गाजीपुर में महाराजा सुहेलदेव राजभर का डाक टिकट जारी करने और राजकीय मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास करने के बाद कहीं। पीएम आगे बोले, “कांग्रेस ने कर्नाटक में लाखों किसानों से कर्जमाफी का वादा किया। लेकिन सिर्फ 800 किसानों का ही कर्ज माफ हुआ। ये कैसा खेल, कैसा धोखा है? किसानों से वादा किया गया था कि छह लाख करोड़ रुपए की कर्ज माफी होगी। मगर सिर्फ 60 हजार करोड़ का कर्ज ही माफ हुआ। इतना ही नहीं, जब कैग रिपोर्ट आई तो उसमें से 35 लाख रुपए उन लोगों को मिले जो कि न तो किसान थे और न ही कर्ज माफी के हकदार थे।” 

पीएम के मुताबिक, “आने वाला समय आपका है। आपके बच्चों का है। आपका भविष्य सुधारने के लिए यह चौकीदार बहुत ईमानदारी से काम कर रहा है। यही वजह है कि बहुत सारे चोरों की रातों की नींद उड़ी हुई है। मुझ पर आपका विश्वास और आशीर्वाद ही एक दिन इन चोरों को सही जगह तक लेकर जाएगा।”

बकौल मोदी, “वोट बंटोरने के लिए लुभावने उपायों का हश्र क्या होता है, ये मध्य प्रदेश और राजस्थान में दिख रहा है। सरकार बदलते ही वहां खाद और यूरिया के लिए लाठियां चलने लगीं।” राजकीय मेडिकल कॉलेज को उन्होंने कहा, “इस कॉलेज से क्षेत्र को आधुनिक चिकित्सा सुविधा मिलेगी। साथ ही यहां नए और मेधावी डॉक्टर भी तैयार होंगे। करीब 250 करोड़ की लागत से जब ये कॉलेज बनकर तैयार होगा तो, गाज़ीपुर का जिला अस्पताल 300 बेड का हो जाएगा।”

राजनीतिक जानकारों की मानें तो पीएम द्वारा इस डाक टिकट का जारी करना राजभर और पासी समाज को साधने की कोशिश है। वह पूर्वांचल की राजभर बहुल लोकसभा सीटों पर राजनीतिक समीकरण को साधना चाहती है।

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को असम में डिब्रूगढ़ के निकट बोगीबील में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने देश के सबसे लंबे रेल-सह-सड़क पुल का उद्घाटन किया। नई दिल्ली से दोपहर में डिब्रूगढ़ पहुंचने के बाद मोदी ने एक हेलिकॉप्टर से सीधे बोगीबील के लिए उड़ान भरी और नदी के दक्षिणी किनारे से 4.94 किलोमीटर लंबे डबल-डेकर पुल का उद्घाटन किया। मोदी असम के राज्यपाल जगदीश मुखी और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के साथ पुल पर कुछ मीटर तक चले। हाल ही में बीजेपी के ट्विटर पेज पर पुल के उद्घाटन समारोह की तस्वीरें शेयर की गई हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने इस लंबे पुल से गुजरने वाली पहली पैसेंजर रेलगाड़ी को भी हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। विशाल ब्रह्मपुत्र नदी पर बना, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण यह पुल अरूणाचल प्रदेश के कई जिलों के लिए कई तरह से मददगार होगा। डिब्रूगढ़ से शुरू होकर इस पुल का समापन असम के धेमाजी जिले में होता है। यह पुल अरुणाचल प्रदेश के भागों को सड़क के साथ-साथ रेलवे से जोड़ेगा। जानकारी के लिए आपको बता दें कि असम समझौते का हिस्सा रहे बोगीबील पुल को 1997-98 में मंजूरी दी गई थी। ऐसा माना जा रहा है कि यह पुल अरूणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पास रक्षा गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। ये देश का सबसे लम्बा रेल-रोड ब्रिज है। बता दें कि यह पहला ऐसा पुल है जिसका निर्माण पूरी तरह से स्टील से हुआ है। पुल के उद्घाटन समारोह के दौरान पीएम ने कहा यह पुल सिर्फ एक पुल नहीं है बल्कि इस क्षेत्र के लाखों लोगों के जीवन को जोड़ने वाली लाइफलाइन है। इससे असम और अरुणाचल के बीच की दूरी सिमट गई है। बोगीबील पुल के जरिए हमारी सेना को जरूरत पड़ने पर खासी मदद मिलेगी। पुल का निर्माण अटल बिहारी की सरकार में शुरू हुआ था और 16 साल बाद यह बनकर तैयार हुआ है। पुल की लागत 5920 करोड़ बताई जा रही है। पुल का शिलान्यास 1997 में संयुक्त मोर्चा सरकार के पीएम एचडी देवगौड़ा ने किया था और 2002 से अटल सरकार ने इसका निर्माण कार्य शुरु किया था।

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