Sun07212019

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Displaying items by tag: modi - दिव्य इंडिया न्यूज़

नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्त पड़ी रफ़्तार मोदी सरकार के लिए फजीहत का सबब बन सकती है। 2019 लोकसभा चुनाव सिर पर है और अर्थव्यवस्था पहले से ज्यादा धीमी गति से आगे बढ़ रही है। रॉयटर्स के एक सर्वे के मुताबिक जुलाई-सितंबर क्वार्टर में 7.4 फीसदी का ग्रोथ सालाना विकास दर के पैरामीटर पर कमज़ोर हो सकता है। जैसे-जैसे इलेक्शन की तारीख़ नज़दीक आती जाएगी विकास दर में कमी देखी जा सकती है। हालांकि, वर्तमान विकास दर चीन की तुलना में काफी बेहतर है। मगर, भारतीय अर्थव्यवस्था इससे पहले सितंबर के मुक़ाबले  जून में धाकड़ प्रदर्शन कर चुकी है। पिछले दो सालों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए अर्थव्यवस्था ने जून क्वार्टर में 8.2 फीसदी का आंकड़ा छू लिया था।

इकोनॉमिक्स टाइम्स  के मुताबिक वर्तमान वित्त वर्ष के दूसरे पड़ाव में विकास दर के और कम होने की संभावना है। एक्सपर्ट के हवाले से अख़बार ने बताया है कि यदि इस बीच कोई बड़ी राजनीतिक अनिश्चितता खड़ी होती है, तो यह सीधे-सीधे बाजार और व्यापार पर असर डालेगी।

ऐसा नहीं है कि वर्तमान में विकास दर कोई खराब है। लेकिन, मसला इसके लगातार नीचे गिरते हुए ट्रेंड को लेकर है। क्योंकि, भारत को इस वक्त 8 फीसदी से अधिक के विकास-दर की आवश्यक्ता है। 1 करोड़ 20 लाख के क़रीब युवा वर्ग हर साल नौकरी की मांग कर रहा है। यह मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती रही है। क्योंकि, 2014 लोकसभा चुनाव में भारी जीत हासिल करने के बाद सरकार नौकरियों को लेकर निशाने पर रही। मुंबई स्थित थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडिया इकॉनमी’ (CMIE) के मुताबिक अक्टूबर माह में बेरोजगारी दर 6.9 फीसदी के हिसाब से बढ़ी और यह पिछले दो सालों के मुकाबले ज्यादा थी।

विकास दर में कमी के पीछे कई और भी कारण हैं। इनमें मुख्य रूप से रुपये का कामज़ोर होना और बैंकों की ख़स्ता हालत ने व्यापार को मुंह के बल गिराया है। इन कारणों का निवेश और उपभोग पर बहुत बुरा असर पड़ा। टूरिज्म, गाड़ियों की सेल, इंडस्ट्रीयल प्रॉडक्शन जैसे सेक्टर निराशा करने वाले रहे हैं। हालांकि, विकास दर के संबंध में पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की भविष्यवाणी थोड़ी सुकून देने वाली है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मार्च तक देश की विकास दर 7.4 फीसदी होने की भविष्यवाणी की है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 6.7 फीसदी था।

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नई दिल्ली: करतारपुर साहिब के बाद पाकिस्‍तान का एक और कूटनीतिक दांव आने वाला है। दरअसल पाकिस्तानी से खबर आ रही है कि विदेश मंत्रालय की तरफ से जानकारी दी गई है कि इस साल होने वाले सार्क सम्मेलन में पीएम मोदी को न्योता भेजा जाएगा। 20 वें सार्क सम्मेलन का आयोजन इस बार पाकिस्तान में हो रहा है। आपको बता दें कि इससे पहले हुए 19वें सार्क सम्मेलन का आयोजन पाकिस्तान में किया जाना था लेकिन इसके लिए भारत, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और भूटान ने इसमें हिस्सा लेने से मना कर दिया था। इस वजह से इस सम्मेलन को ही रद्द कर दिया गया था। अब पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और इमरान खान के नेतृत्व में नई सरकार इस बार सभी सदस्य देशों को मनाने की कोशिश कर रही है।

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बेणेश्वर धाम : राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 के मतदान से पहले पीएम मोदी आज राजस्थान में ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं। भीलवाड़ा में कांग्रेस पर जमकर गरजने के बाद बेणेश्वर धाम में राहुल गांधी पर बरसते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज़ादी के इतने सालों तक, जब तक अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार बनी नहीं थी तब तक कांग्रेस को आदिवासियों की याद नहीं आई। आदिवासी मांग करते थे उनके लिए अलग मंत्रालय बने, उनके विकास के लिए योजनाएं बने लेकिन कांग्रेस पार्टी को उनकी कोई चिंता नहीं थी।

पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के इतने सालों बाद अटल जी की सरकार ने अलग आदिवासी मंत्रालय बनाया, अलग मंत्री बनाया, उनके लिए बजट बनाया तब जाकर आदिवासियों के विकास की गाथा शुरू हुई। जो कांग्रेस कभी आदिवासियों को याद भी नहीं करती थी ऐसे कांग्रेस को आप यहां घुसने देंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के इतने सालों तक जब तक अटल जी देश के प्रधानमंत्री नहीं बने थे तब तक कांग्रेस को आदिवासियों की याद नहीं आयी। आदिवासी मांग करते थे कि हमारे लिए अलग मंत्रालय हो, अलग मंत्री हो, अलग बजट हो और हमारे विकास की योजनाएं बने लेकिन कांग्रेस को इसकी परवाह नहीं थी।

पीएम मोदी ने कहा कि जिस नामदार को राजस्थान की कांग्रेस सीरियस नहीं लेती है, उसे जनता क्या सीरियस लेगी। भाजपा का मंत्र है 'सबका साथ-सबका विकास' और हम इसी महान परंपरा को लेकर आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के नेताओं को तो एक परिवार के आगे कुछ दिखता ही नहीं है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस किसानों की बात करती है... नामदार को यह नहीं पता कि चने का पेड़ होता है या पौधा! उनको मूंग और चने में फर्क नहीं पता और ये किसानों के कल्याण की बात करते हैं: पीएम श्री मैं वोट आपके लिए मांगने आया हूं, आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए मांगने आया हूं।

पीएम ने कहा कि जब मैडम सोनिया की सरकार थी तब हिन्दुस्तान में मोबाइल बनाने की 4 कंपनियां थी, आज 125 कंपनिया हैं। कांग्रेस वालों के दिमाग में जातिवाद का जहर भर गया है जो जाता नहीं है। ये जातिवाद के घोर जातिवादियों को अब राजनीति से हमेशा हमेशा के लिए हटा देना चाहिए। 

पीएम ने कहा कि मैं एक बात गर्व के साथ कहना चाहूंगा, देश में जो स्वच्छता अभियान चला है उसमें डूंगरपुर ने कमाल करके दिखाया है। हमारा बांसवाड़ा और डूंगरपुर आज देश में स्वच्छता की मिसाल बन गया। कांग्रेस के लिए सबसे पहले है – नामदार, फिर नामदार का परिवार, उसके बाद परिवार के दरबारी, उसके बाद वोटबैंक के ठेकेदार, उसके बाद जातिवाद, उसके बाद उनको देश याद आता है। 

पीएम मोदी ने कहा कि ये 4 पीढ़ियों तक आराम करने वाली सरकार नहीं है। ये सरकार बिना छुट्टी लिए दिन रात काम करने वाली सरकार है। भाजपा की सरकार बनाने का संकल्प लीजिए और एक भी कांग्रेसी यहां से चुनकर जयपुर नहीं पहुंचना चाहिए, एक भी कांग्रेसी नहीं जीतना चाहिए।

 

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विदिशा : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस द्वारा उनकी मां के बाद पिता को भी राजनीति में ‘‘घसीटे'' जाने पर कहा कि कांग्रेस अब मुद्दों के अभाव में ऐसी ओछी हरकतें कर रही है. मध्य प्रदेश में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के पक्ष में रविवार को यहां एक आमसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बहुत दिक्कत होती है उनको, जब मुद्दे नहीं बचे, तर्क नहीं बचे,जो जनता का विश्वास खो चुके हैं, खुद पर भरोसा उठा चुका है. तब एक ही रास्ता बचा है. गाली गलौज, गाली गलौज. उन्होंने कहा, ‘‘मैं हैरान हूं और ये नामदार कांग्रेस पार्टी के मुखिया. ये जो कुछ भी चल रहा है, उसको वे समर्थन दे रहे हैं''. मोदी ने कहा, ‘‘मैं हैरान था दो दिन पहले कांग्रेस के एक नेता हमारी माताजी को चुनाव में घसीट लाये. हमारी माताजी जिसने बेचारी ने मध्य प्रदेश कहां है, यह भी देखा नहीं, जो राजनीति का ‘‘र'' नहीं जानतीं. अपने छोटे से कमरे में प्रभु पूजा में जीवन बिता रही हैं. क्या मेरी मां को इस प्रकार से घसीटना उचित था. क्या आपके पास यही मुद्दा बचा है''.

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ‘‘मैं सोच रहा था, शायद कांग्रेस पार्टी सबक सीखेगी लेकिन आज मैंने देखा टीवी, सोशल मीडिया में चल रहा है, मेरी मां को घसीटने से कुछ मिला नहीं. आज मेरे पिताजी को घसीटकर ले आये. मेरे पिताजी, जो 30 साल पहले ये दुनिया छोड़कर चले गये. मेरे परिवार की सौ पीढ़ी में भी किसी का राजनीति से संबंध नहीं है. छोटा सा गांव, गरीब परिवार जैसा होता है, वैसी जिंदगी गुजारने वाले हम लोग. क्या कारण है, आज मेरे पिता जी को भी घसीटकर ले आये, जो 30 साल पहले दुनिया छोड़कर चले गये हैं''. उन्होंने कहा, ‘‘और कांग्रेस के नामदार कांग्रेस अध्यक्ष कहते हैं कि मोदी जी भी तो मेरे परिवार के लिये बोलते हैं. अरे नामदार, हम आपके परिवार के किसी भी व्यक्ति के लिये नहीं बोलते हैं. हम देश के भूतपूर्व प्रधानमंत्रियों के लिये बोल रहे हैं. हम देश के भूतपूर्व कांग्रेस नेताओं के खिलाफ बोल रहे हैं. उनके काम का हिसाब मांग रहे हैं. अगर मेरे परिवार का कोई भी व्यक्ति राजनीति में है. सार्वजनिक जीवन में है तो श्रीमान नामदार आपको भी हक है मेरे परिवार के बाल नोंच लेने का. अगर वह राजनीति में है तो, अगर वह सत्ता के गलियारों में है तो.

पीएम मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा कि आपका पूरा परिवार देश के शीर्षस्थ स्थानों पर रहा है, दल के शीर्षस्थ स्थानों पर रहा है, इसलिये जितना मोदी पर आप सवाल पूछ सकते हैं, जितना मोदी जवाबदेह है, उतना ही आपका परिवार भी जवाबदेह है, ये लोकतांत्र है. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष से कहा कि आप ये तर्क देकर गाली गलौज करने वाले अपने साथियों का बचाव मत कीजिये. और आप जनता मुझे बताइये कांग्रेस में कोई ऐसा है जो नामदार की इच्छा के सिवाय बोल सके. कांग्रेस में गली का कार्यकर्ताओं हो या दिल्ली का, वो नामदार की इजाजत के बिना बोल ही नहीं सकता है. उल्लेखनीय है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री विलास मुत्तेमवार ने शनिवार को राजस्थान में कांग्रेस की एक जनसभा के दौरान कहा था, ‘‘आपके (मोदी के) प्रधानमंत्री बनने से पहले आपको जानता कौन था? अब भी आपके पिता का नाम कोई नहीं जानता, लेकिन हर कोई (कांग्रेस अध्यक्ष) राहुल गांधी के पिता का नाम जानता है''. मुत्तेमवार के इस बयान का वीडियो वायरल हो गया. हालांकि विदर्भ क्षेत्र के रहने वाले मुत्तेमवार ने कहा कि सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो से छेड़छाड़ की गई है.

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छतरपुर: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के लिए प्रचार जोरो पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मध्य प्रदेश के छतरपुर में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला।, पीएम मोदी ने कहा कि चुनाव के आखिरी दौर में हम प्रवेश कर रहे हैं, जैसे- जैसे आखिरी दौर निकट आ रहा है भाजपा का उत्साह बढ़ रहा है और कांग्रेस के खेमें में, अब वहां सरकार बनाने के सपने नहीं हैं। वहां कौन किसकी जमानत बचाएगा ये चिंता का विषय है। उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश की जनता राज्य में आए बदलाव की साक्षी है और ये बदलाव ना तो राजा लाए हैं, ना ही महाराजा लाए हैं ये बदलाव तो शिवराज लाए हैं। उन्होंने आगे गहा कि देश के 125 करोड़ हमारे हाईकमान है, हमारी सरकार किसी मैडम के रिमोट कंट्रोल से चलने वाली सरकार नहीं है। हाथ में सोने की चम्मच लेकर पैदा हुए लोगों के दिमाग कंफ्यूज है और उनकी पार्टी फ्यूज है। कांग्रेस पार्टी की मोदी से मुकाबला करने की हिम्मत नहीं रही तो अब कांग्रेस के लोग मोदी की मां को गाली दे रहें है। कांग्रेस पर हमलावर होते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आपकी चार पीढ़ी और चाय वाले के चार साल, हमने देश को कहां से कहां पहुंचा दिया उसकी चर्चा करने को तैयार नहीं हैं। आपने देखा होगा मोहल्ले में जब लड़की होती है और सत्य उसके पक्ष में ना हो तो लड़की के अंदर वो मुद्दे छोड़कर के सीधे तेरी मां मेरी मां पर आ जाता है। पीएम मोदी ने सीपी जोशी के द्वारा दिए गए बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब मुद्दे नहीं होते, कुसानस्कर भरे होते हैं, अंधकार सातवें आसमान पर होता है, तब जाकर किसी की मां को गाली देने की हिम्मत होती है। आजादी के बाद जिसने इतने साल राज किया, उस पार्टी के जिम्मेदार लोग मोदी के साथ भिड़ने के वजाय, मोदी की मां को गाली दे रहे हैं। जिस मां को राजनीति का 'R' मालूम नही है, जो मां अपनी पूजा पाठ, घर में भगवान के समर्ण में अपने समय बिता रही है उस मां को राजनीति में घसीट लिया। कांग्रेस के लोगों में मोदी से मुकाबला करने की ताकत नहीं है।

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भोपाल: मध्य प्रदेश की सभी 230 सीटों के लिए 28 नवंबर को मत डाले जाएंगे। मतदाताओं को लुभाने के लिए राजनीतिक दल एक दूसरे के ऊपर आरोपों की बमबारी कर रहे हैं। इन सबके बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने झाबुआ में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं की आदत है कि वो सवाल पूछते हैं।  ये नहीं बताते की मध्य प्रदेश के लिए क्या किया। दरअसल कांग्रेस के राज में मध्य प्रदेश अंधेरे की तरफ बढ़ा। लोगों में सिर्फ निराशा थी। लेकिन पिछले 15 वर्षों में मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ है।

कांग्रेस के जमाने में सपने दिखाए जाते थे। उनके जमाने में लोन मेले लगते थे। लेकिन आज लोग मुद्रा योजना से आगे बढ़ रहे हैं। हमने विकास और सोचने का रास्ता बदल दिया है। पहले लोग अंधेरे में जीने की आदत थी। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है। क्या आप चाहते हैं कि मध्य प्रदेश में ऐसी सरकार आए जो फिर आप लोगों को अंधेरे की तरफ लेकर जाए। जो पिछले 50 साल में इस राज्य में नहीं हुआ वो पिछले 15 साल में हुआ है।

पीएम मोदी ने कहा कि जो सरकार आप के बच्चों को तकलीफ दे वो सरकार किस काम की है। पीएम ग्राम सड़क योजना से गांवों की तस्वीर बदली है। कांग्रेस की सरकार में गांवों के लोग सड़कों के लिए तरसते थे। लेकिन बीजेपी सरकार की समग्र सोच के बाद एमपी के इस इलाके में बड़े पैमाने पर हुआ है। पहले विकास का मतलब मिट्टी डालो और उसे रोड मान लेना होता था।

 

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश को विश्वबैंक की कारोबार सुगमता रैंकिंग में शीर्ष 50 देशों में पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। साथ ही उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग दोगुना कर 5,000 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं। 

भारतीय उद्योग जगत के साथ कारोबार सुगमता पर चर्चा के लिये बुलाई गई बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि सरकार के स्तर पर नीतिगत अपंगता का दौर खत्म हो चुका है। उनकी सरकार ने नीति आधारित शासन दिया है, जिससे विश्वबैंक की 190 देशों की कारोबार सुगमता रैंकिंग में भारत 142वें से स्थान से ऊपर चढ़कर इस साल 77वें स्थान पर पहुंच गया। 

उन्होंने कहा कि देश में कंपनियों के लिये काम करने को आसान बनाने के लिए सुधार जारी रहेंगे और प्रक्रियाओं को और सरल बनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही देश की अर्थव्यवस्था का आकार भी बढ़ाकर 5,000 अरब डॉलर करने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं। 

वर्ष 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के समय कारोबार सुगमता की सूची में भारत 142वें स्थान पर था। मोदी ने कहा कि उस समय देश लालफीताशाही और नीतिगत अपंगता में जकड़ा हुआ था। चार साल के सुधारों के बाद विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट में कारोबार सुगमता के मामले में भारत 190 देशों की सूची में 77वें स्थान पर पहुंच गया। इससे पिछले साल भारत 100वें स्थान और उससे पिछले साल 130वें स्थान पर था। 

मोदी सरकार के चार साल के कार्यकाल में भारत ने इस रैंकिंग में 65 स्थानों की छलांग लगाई है। विश्व बैंक की इस रैंकिंग में न्यूजीलैंड पहले उसके बाद सिंगापुर, डेनमार्क और हांगकांग का स्थान रहा है। अमेरिका आठवें और चीन को 46वां स्थान मिला है। 

पाकिस्तान इस सूची में 136वें स्थान पर है। विश्व बैंक की यह रिपोर्ट दस मानकों के आधार पर तैयार की जाती है। इसमें कोई भी व्यावसाय शुरू करने, निर्माण अनुमति मिलने, बिजली कनेक्शन पाने, कर्ज मिलने, कर का भुगतान, विदेश व्यापार, अनुबंध का क्रियान्वयन और दिवाला समाधान जैसे मुद्दों पर गौर किया जाता है।

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नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान बिहार में भाजपा और जदयू दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। इस दौरान बिहार के मतदाताओं ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए खुलकर एनडीए गठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान किया था। यही वजह थी कि बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 31 सीटेंएनडीए को मिली थी। भाजपा के 22, लोजपा के 6 और रालोसपा के 3 उम्मीदवार विजयी हुए थे। वोट प्रतिशत की बात करें तो सिर्फ भाजपा को 29.40 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं, सहयोगी दल लोजपा को 6.40 और रालोसपा को 3 प्रतिशत वोट मिले थे। लेकिन अगले साल 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में बिहार की जनता ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में पसंद किया। लेकिन वर्तमान में बिहार की 33 प्रतिशत जनता पीएम मोदी के कार्य से नाखुश हैं। वहीं, नीतीश कुमार 48 फीसदी जनता की पसंद बने हुए हैं। एक्सिस माय इंडिया के हालिया सर्वे के अनुसार, केंद्र के कामकाज से बिहार की 31 प्रतिशत जनता थोड़ी संतुष्ट है। थोड़ा असंतुष्ट वालों की संख्या 6 प्रतिशत है। 33 प्रतिशत जनता असंतुष्ट है। वहीं, 8 प्रतिशत लोग इस सवाल पर अभी ‘पता नहीं’ का जवाब दे रहे हैं। वहीं, 20 प्रतिशत बिहारी ही केंद्र सरकार के कामकाज से खुश हैं। वहीं, बात मुख्यमंत्री की करें तो 48 प्रतिशत जनता अभी भी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है। 25 प्रतिशत जनता तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है। मात्र 6 प्रतिशत लोग ही चाहते हैं कि सुशील मोदी बिहार के मुख्यमंत्री बनें। 1 प्रतिशत जनता एक बार फिर से राबड़ी देवी को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में राज्य में मुख्य रूप से महागठबंधन और एनडीए के बीच मुकाबला था। महागठबंधन में तीन पार्टियां जदयू, राजद और कांग्रेस शामिल थी। वहीं, एनडीए में चार पार्टियां भाजपा, रालोसपा, लोजपा और हम शामिल थी। महागठबंधन का चेहरा नीतीश कुमार थे। वहीं, एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री के तौर पर किसी का चेहरा प्रोजेक्ट नहीं किया गया था। इस चुनाव में ‘बिहार में बहार हो, नीतीशे कुमार हो’ जैसे स्लोगन के माध्यम से चुनावी कैंपेन चलाया गया था। जनता ने भी नीतीश कुमार को एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए महागठबंधन के पक्ष में सर्वाधिक मतदान किया। नतीजा रहा कि महागठबंधन को 178 सीटों पर जीत मिली। वहीं, एनडीए मात्र 58 सीटों पर सिमट गई। अन्य के खाते में 7 सीटें गई। इस चुनाव में राजद 80 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। जदयू को 71 सीटें मिली। कांग्रेस ने भी 27 सीटों जीत दर्ज हासिल की थी। वहीं, एनडीए में भाजपा को 53, रालोसपा को 2, लोजपा को 2 और हम को 1 सीटें मिली थी। हालांकि, 20 महीने बाद ही महागठबंधन टूट गया और नीतीश कुमार ने एक बार फिर भाजपा के साथ मिलकर बिहार में सरकार बना ली।

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नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के महासमंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बीजेपी की चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, ये चुनाव छत्तीसगढ़ का भविष्य तय करेगा। छत्तीसगढ़ विकास की नई ऊंचाइयों पर खड़ा है। सच्चे अर्थों में साढ़े चार साल ही विकास हुआ। विकास कर ब्याज समेत लौटाएंगे। यहां की जनता की तपस्या बेकार नहीं जाएगी। पहले दिल्ली में रिमोट से चलने वाली सरकार थी। 10 साल रिमोट वाली सरकार ने देश को बर्बाद कर दिया। एक परिवार के रिमोट से सरकार चलती थी। कांग्रेस ने 50 साल तक देश की जनता को गुमराह किया। यूपीए ने नक्सलवाद से लड़ने में भी छत्तीसगढ़ की मदद नहीं की। छत्तीसगढ़ को फलने-फूलने का पहला अवसर तब आया जब दिल्ली में बीजेपी की सरकार आई। पीएम ने कहा कांग्रेस छत्तीसगढ़ के भले लोगों की आंखों में धूल झोंक रही है, झूठे वादों कर रही है लेकिन मुद्रा योजना के माध्यम से 14 करोड़ सामान्य लोगों को बैंक से लोन की स्वीकृति मिली है। हमने छतीसगढ़ में 75 लाख किसानों को Soil Health Card पहुंचाने का काम किया है। कांग्रेस के समय तो इंसान का हेल्थ कार्ड भी नहीं पहुंचाया गया। कांग्रेस पर हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा, कर्नाटक में आप लोगों ने कहा था किसानों का कर्ज माफ कर देंगे। आपकी सरकार को एक साल होने को है लेकिन वहां के अखबार कथाएं छाप रहे है कि सैकड़ों की तादात में किसान, जिसके सर में कर्ज था उनके नाम पर वारंट निकल रहे है और गिरफ्तार भी कर रहे है। क्यों झूठ बोल रहे हो, 50 साल तक आपने झूठ बोलकर देश को गुमराह किया। अब तो समझो, देश की जनता ने 440 में से आपको 40 पर लेकर के खड़ा कर दिया है। पीएम ने कहा कि जिन्होंने बैंकों को लूटा है और जिन्होंने लुटवाया है, क्या उनसे पाई-पाई लेना गुनाह है? जो बैंकों को लूट कर देश छोड़ कर भाग गए हैं, दुनिया में कही भी उनकी संपत्ति हो, उसे जब्त करने का कानून हम लेकर आए हैं।

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नई दिल्ली: एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है कि जब वह सत्ता में थे तो उन पर और उनकी पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. लेकिन अब वे (बीजेपी) चार सालों से सत्ता में हैं और इन आरोपों पर कुछ नहीं हुआ. ये सभी आरोप सिर्फ सत्ता पाने के लिए लगाए गए थे. एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में शरद पवार ने यह भी दावा किया 2019 के लोकसभा चुनाव में एक बड़ा परिवर्तन होगा और मोदी दोबारा प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे. गौरतलब है कि एनसीपी, यूपीए सरकार में शामिल थी और इसके नेता प्रफुल पटेल महत्वपूर्ण विभाग में मंत्री थे. इस दौरान उनके ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगा. वहीं शरद पवार पर भी लवासा जमीन मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया. इन दोनों ही मामलों को बीजेपी ने विपक्ष में रहते खूब जोर-शोर से उठाया था. फिलहाल इस बार भी शरद पवार कांग्रेस के साथ ही मिलकर चुनाव लड़ने को तैयार हैं. हालांकि उनको भी पीएम पद का एक बड़ा दावेदार बताया जा रहा है. बीती 12 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और राकांपा प्रमुख शरद पवार ने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र में सीटों के बंटवारे को लेकर विचार विमर्श किया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच यह विचार विमर्श बृहस्पतिवार को दिल्ली में हुआ. इस बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे एवं अशोक गहलोत तथा राकांपा के प्रफुल्ल पटेल भी मौजूद थे. मलिक के अनुसार राकांपा ने राज्य में 50:50 सीट बंटवारे का प्रस्ताव रखा है. उन्होंने कहा कि दोनों दल इस मुद्दे पर यथाशीघ्र अंतिम निर्णय करना चाहते हैं. कांग्रेस ने 2014 लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में 26 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे जिसमें दो की ही चुनावी नैया पार हो पायी थी. राकांपा ने 22 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे जिनमें से चार को ही विजय मिल पाई थी. महाराष्ट्र में 48 लोकसभा सीटें हैं.

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