Sun07212019

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Displaying items by tag: trump - दिव्य इंडिया न्यूज़

वाशिंगटन : ईरान की ओर से अमेरिकी निगरानी ड्रोन मार गिराए जाने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान को तत्काल सबक सिखाना चाहते थे और उन्होंने उस पर सैन्य कार्रवाई की मंजूरी भी दे दी थी लेकिन थोड़ी देर बार उन्होंने अपने इस आदेश को वापस ले लिया। दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ने के बाद ट्रंप ने ह्ववाइट हाउस के उच्चाधिकारियों के साथ गुरुवार रात उच्चस्तरीय एवं गंभीर बैठक की थी। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के रिश्तों में काफी तनाव आ गया है और दोनों देशों टकराव की तरफ बढ़ रहे हैं। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान पर हुई बैठक से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों एवं कांग्रेस के नेताओं के बीच ह्वाइट हाउस में गहन बातचीत हुई। इसके बाद सैन्य एवं कूटनीतिक अधिकारी तेहरान पर हमले की उम्मीद कर रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बैठक में ईरान के रडार एवं मिसाइल बैटरीज जैसे लक्ष्यों को निशाना बनाने की प्रारंभिक मंजूरी दी थी लेकिन यह फैसला अचानक शाम तक के लिए स्थगित कर दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमले के फैसले में बदलाव ट्रंप की अपनी सोच थी या लॉजिस्टिक अथवा रणनीति को देखते हुए कार्रवाई का निर्णय टाला गया, इसके बारे में कुछ स्पष्ट नहीं हो सका। अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप सरकार आगे हमले की अपनी इस योजना पर आगे बढ़ेगी या नहीं इस पर स्थिति कुछ साफ नहीं है। इस घटनाक्रम पर ह्वाइट हाउस और पेंटागन के अधिकारियों ने किसी तरह की टिप्पणी करने से इंकार किया है। ईरान के सैन्य प्रतिष्ठानों अथवा नागरिकों को कम से कम नुकसान पहुंचे इसके लिए शुक्रवार को पौ फटने से पहले हमला करने का समय निश्चित किया गया था। लेकिन थोड़ी समय बाद सैन्य अधिकारियों को हमला टाले जाने का संदेश मिला। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विदेश मंत्री माइक पाम्पिओ, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन और सीआईए के डाइरेक्टर गिना हास्पेल ईरान पर सैन्य प्रतिक्रिया के पक्ष में थे लेकिन पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों ने आगाह किया कि इस कदम से तनाव काफी बढ़ जाएगा और खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों को नुकसान पहुंच सकता है। ह्वाइट हाउस में मौजूद कांग्रेस के नेताओं को इस स्थिति से अवगत कराया गया। गौरतलब है कि खाड़ी में अपने दो तेल टैंकरों को नुकसान पहुंचने के बाद अमेरिका ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। अमेरिका का कहना है कि ईरान ने उसके तेल टैंकरों को नुकसान पहुंचाया जबकि तेहरान ने इससे इंकार किया है। ईरान ने कहा है कि अमेरिका ने यदि उस पर दबाव बनाया तो वह अपना यूरेनियम संवर्धन बढ़ाएगा। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी का कहना है कि अमेरिका यदि दुस्साहस करेगा तो उनका देश इसका जवाब देने में सक्षम है। जिस तरह के हालात बने हैं उससे ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की आशंका बनी हुई है। दोनों देशों के बीच यदि युद्ध होता है तो पूरी दुनिया पर इसका असर होगा। जंग से खाड़ी क्षेत्र के देश प्रभावित होंगे। कच्चे तेल की आपूर्ति न होने पर दुनिया भर में तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ जाएंगी। इससे देशों को अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरा करने में दिक्कत होगी। देशों की अर्थव्यवस्था बिगड़ेगी और उनके सामने महंगाई और रोजगार जैसे संकट खड़े हो जाएंगे।

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नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  का कहना है कि भारत ने भले ही अमेरिकन मोटरसाइकिलों पर आयात टैरिफ 100 से 50 फीसदी कर दिया हो लेकिन यह अब भी ज्यादा और अस्वीकार्य है. ट्रंप ने कहा कि उनकी अगुवाई में अमेरिका को अब और 'बेवकूफ' नहीं बनाया जा सकता है. ट्रंप ने कहा कि 'हम बेवकूफ देश नहीं है जिसे बुरी तरह बनाया गया है. आप भारत को देखो जो हमारा अच्छा दोस्त है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आप देखिए आपने क्या किया, मोटरसाइकिल पर 100 फीसदी टैक्स. हमने उनसे कोई चार्ज नहीं लिया'. आपको बता दें कि ट्रंप ने यह बात सोमवार को सीबीएस न्यूज से इंटरव्यू में कही है. दरअसल ट्रंप भारत में अमेरिकन मोटरसाइकिल हार्ले डिविडसन पर लगाए जा रहे आयात शुल्क की ओर इशारा कर रहे थे. ट्रंप के लिए यह मुद्दा काफी अहम है और वह चाहते हैं कि भारत इस पर लगाए जा रहे सारा टैरिफ खत्म कर दे.

ट्रंप ने बताया कि जब हम यहां से मोटरसाइकिलें भेजते हैं तो 100 फीसदी टैक्स लगता है लेकिन जब वह अपने देश यहां मोटरसाइकिलें भेजते हैं तो हम कोई भी टैक्स नहीं लगाते हैं. ट्रंप ने कहा उन्होंने पीएम मोदी से इस मुद्दे पर बात की है और कहा कि यह एकदम अस्वीकार्य है. ट्रंप ने बताया कि पीएम मोदी ने एक फोन कॉल पर टैक्स 50 फीसदी कर दिया है. लेकिन अब भी यह ज्यादा है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है. ट्रंप ने कहा कि दोनों देश इस मुद्दे को सुलझाने पर काम कर रहे हैं. एक सवाल के जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हम ऐसे बैंक बन गए हैं जिसे हर कोई लूटने पर आमादा है, और वे इसे काफी  लंबे समय से कर रहे हैं. हमारा व्यापार घाटा 800 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है. आप बताइए ऐसे समझौते किसने किए. 

आपको बता दें कि  लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिली जीत के बाद अमेरिका को उम्मीद है कि अपने दूसरे कार्यकाल में आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए उनके पास ज्यादा स्वतंत्रता होगी. इससे एक कारोबार अनुकुल माहौल बनाने में मदद मिलेगे. व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी का यह बयान ऐसे समय आया जब शुक्रवार को मीडिया में यह खबर छाई रही कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अगला निशाना भारत हो सकता है. इसमें भारत के खिलाफ सेक्शन-301 जांच शुरू किया जाना शामिल है.  

अधिकारी ने कहा, ‘‘ बड़ी चिंता ई-वाणिज्य पर भारत सरकार द्वारा हाल में लगाए गए प्रतिबंध और डाटा का स्थानीयकरण करने के नियम है. इससे अमेरिकी कंपनियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. साथ ही निवेश माहौल पर भी असर पड़ा है.''    

उन्होंने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि चुनाव निपट गए हैं और प्रधानमंत्री मोदी के पास कड़े आर्थिक सुधार लाने के लिए अब अधिक स्वतंत्रता होगी. यह नए विदेशी निवेश को आकर्षिक करेगा और कारोबार अनुकूल माहौल बनाने में मदद करेगा.  उल्लेखनीय है कि जापान के ओसाका में जी-20 समूह की बैठक के दौरान इस माह के अंत में मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात होना तय है  

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वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस को भारत के साथ जनरलाइज सिस्टम आफ प्रेफरेंस (GSP) समाप्त करने के अपने इरादे से अवगत कराया। ट्रंप ने सोमवार को कहा कि वह एक कार्यक्रम के तहत भारत के तरजीही व्यापार व्यवहार को समाप्त करने का इरादा रखते हैं, जो 5.6 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात को संयुक्त राज्य अमेरिका में शुल्क मुक्त करने की अनुमति देता है। कांग्रेस नेताओं को एक पत्र में ट्रंप ने कहा, 'मैं यह कदम इसलिए उठा रहा हूं क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत सरकार के बीच गहन जुड़ाव के बाद, मैंने निर्धारित किया है कि भारत ने अमेरिका को आश्वासन नहीं दिया है कि वह भारत के बाजारों में समान और उचित पहुंच प्रदान करेगा।' अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने कहा कि कांग्रेस और भारत सरकार को सूचना देने के कम से कम 60 दिनों तक भारत को जीएसपी कार्यक्रम से हटाना प्रभावी नहीं होगा, और इसे राष्ट्रपति की घोषणा द्वारा अधिनियमित किया जाएगा। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार, 2017 में भारत के साथ अमेरिकी वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार घाटा $ 27.3 बिलियन था। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि ने कहा, 'राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर ने घोषणा की कि अमेरिका भारत और तुर्की से जनरलाइज सिस्टम आफ प्रेफरेंस कार्यक्रम के लाभार्थी का दर्जा वापस लेगा।' भारत जीएसपी कार्यक्रम का दुनिया का सबसे बड़ा लाभार्थी है और इसकी भागीदारी को समाप्त करना भारत के खिलाफ सबसे मजबूत दंडात्मक कार्रवाई होगी। हाल ही में ट्रंप ने भारत को ऊंची दर से शुल्क लगाने वाला देश बताते हुए अपने समर्थकों से कहा था कि वह अमेरिका में आने वाले सामानों पर परस्पर बराबर शुल्क या कम से कम कोई शुल्क लगाना चाहते हैं। ट्रंप ने कहा, 'भारत काफी ऊंची दर से शुल्क लगाने वाला देश है। वे हमसे काफी शुल्क वसूलते हैं।'

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नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद से 8,158 बार झूठे या गुमराह करने वाले दावे कर चुके हैं. एक मीडिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है. यह रिपोर्ट रविवार को ट्रंप के राष्ट्रपति बने हुए दो साल पूरे होने पर आई है. अमेरिकी अखबार 'वॉशिंगटन पोस्ट' की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल के पहले साल हर दिन औसतन करीब छह बार गुमराह करने वाले दावे किए, जबकि दूसरे साल उन्होंने तीन गुना तेजी से हर दिन ऐसे करीब 17 दावे किए. अखबार ने अपनी रिपोर्ट में 'फैक्ट चेकर' के आंकड़ों का हवाला दिया है. यह 'फैक्ट चेकर' राष्ट्रपति द्वारा दिए गए हर संदिग्ध बयान का विश्लेषण, वर्गीकरण और पता लगाने का कार्य करता है. 'फैक्ट चेकर' के आंकड़ों के मुताबिक, ट्रंप राष्ट्रपति बनने से लेकर अब तक 8,158 बार झूठे और गुमराह करने वाले दावे कर चुके हैं. अखबार ने कहा कि इसमें राष्ट्रपति के दूसरे साल किए गए ऐसे 6000 से ज्यादा आश्चर्यजनक दावे शामिल हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने सबसे ज्यादा गुमराह करने वाले दावे इमिग्रेशन (आव्रजन) को लेकर किए हैं. इस बारे में वह अब तक 1,433 दावे कर चुके हैं, जिनमें बीते तीन हफ्तों के दौरान किए गए 300 दावे शामिल हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप विदेश नीति को लेकर 900 दावे कर चुके हैं. इसके बाद व्यापार (854), अर्थव्यवस्था (790) और नौकरियों (755) का नंबर आता है. इसके अलावा अन्य मामलों को लेकर वह 899 बार दावे कर चुके हैं, जिसमें मीडिया और अपने दुश्मन कहे जाने वाले लोगों पर गुमराह करने वाले हमले शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 82 दिन या अपने कार्यकाल के करीब 11 प्रतिशत समय में ही ट्रंप का कोई दावा दर्ज नहीं किया गया. इसमें ज्यादातर वह समय है जिसमें वह गोल्फ खेलने में व्यस्त थे.

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नई दिल्ली : अमेरिका में जन्म लेने वाले प्रवासियों के बच्चों को वहां की नागरिकता आने वाले दिनों में मिल जाएगी, इसके बारे में अब निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी योजना गैर-अमेरिकी नागरिकों के बच्चों की नागरिकता का अधिकार खत्म करने की है। बता दें कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की वहां की नागरिकता मिल जाती है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले से वहां काम करने वाले लाखों भारतीय सहित अन्य देशों के प्रवासी प्रभावित होंगे। वेबसाइट इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक प्रवासी मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार करने वाले ट्रंप ने कहा है कि जन्म लेते ही अमेरिकी नागरिकता पाने के अधिकार को समाप्त करने के लिए वह अपने एक्जीक्यूटिव ऑर्डर का इस्तेमाल करेंगे और इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। समझा जाता है कि ट्रंप अपनी नीति 'अमेरिका फर्स्ट' के तहत इस तरह का फैसला करने जा रहे हैं। इसके अलावा मैक्सिको और लैटिन अमेरिकी देशों से होने वाले अवैध प्रवास का मुद्दा भी उनके इस फैसले के पीछे हो सकता है। अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चे को वहां की नागरिकता मिल जाती रही है लेकिन ट्रंप का यह फैसला यदि कानून बन जाता है तो इससे भारतीय सहित लाखों लोग प्रभावित होंगे। अमेरिका में करीब 20 लाख भारतीय रहते हैं। इनमें से एक बड़ी संख्या ग्रीन कार्ड होल्डर्स और वहां काम करने वालों की है। ट्रंप के इस फैसले का असर इन लाखों लोगों के यहां जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने एचबीसी पर कहा, 'यह कितना हास्यास्पद है। हम दुनिया के एक मात्र ऐसे देश हैं जहां एक व्यक्ति आता है, उसका बच्चा होता है और उस बच्चे को सभी सुविधाओं के साथ हमेशा के लिए 85 साल की नागरिकता मिल जाती है। यह हास्यास्पद है और इसे समाप्त होना है।' हालांकि, कुछ लोग इसे ट्रंप का एक और विभाजनकारी फैसला मान रहे हैं। ट्रंप के इस फैसले का अमेरिका में विरोध भी हो सकता है।

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नई दिल्ली: अमेरिका, भारत के ईरान से 4 नवंबर के बाद तेल आयात जारी रखना और रूस से हवाई रक्षा प्रणाली एस-400 खरीदना के फैसले का "बहुत ही सावधानीपूर्वक" समीक्षा कर रहा है.अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने यह बात कही. उसने कहा कि ये भारत के लिए "फायदेमंद नहीं" रहेगा. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2015 में बहुपक्षीय समझौते से हाथ खींचने के बाद से अमेरिका ईरान से सारा तेल आयात बंद करने की कोशिश कर रहा है. उसने अपने सभी सहयोगी देशों को 4 नंवबर तक ईरान से तेल आयात घटाकर शून्य करने को कहा है. भारत के ईरान से चार नवंबर के बाद भी तेल खरीदना जारी रखने पर विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नोर्ट ने कहा कि यह भारत के लिए फायदमेंद नहीं होगा. उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा, "ईरान से तेल आयात करना जारी रखने वालों पर चार नंवबर से प्रतिबंध प्रभावी होंगे. हम प्रतिबंधों को लेकर दुनिया भर के ईरान के कई भागीदारों और सहयोगियों के साथ बातचीत कर रहे हैं." नोर्ट ने कहा कि उन देशों के लिए हमारी नीति बहुत स्पष्ट है. इस मुद्दे पर हम ईरान सरकार के साथ भी बातचीत कर रहे हैं और संयुक्त व्यापक कार्य योजना के तहत हटाए गए सभी प्रतिबंधों को फिर से लगा रहे हैं. ट्रंप प्रशासन ने सभी देशों को यह संदेश स्पष्ट रूप से दे दिया है और राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका सभी प्रतिबंधों को फिर से लगाने के लिए प्रतिबद्ध है. प्रवक्ता ने कहा, "प्रतिबंध लागू होने के बाद भी भारत के ईरान से तेल खरीदने पर अमेरिका के राष्ट्रपति ने चेताया था. मैं इससे पहले कुछ नहीं कह रही हूं लेकिन उन्होंने कहा था कि हम इसका ध्यान रखेंगे." रूस से एस-400 हवाई रक्षा प्रणाली खरीदने पर काट्सा के तहत दंडात्मक कार्रवाई पर ट्रंप ने कहा था कि भारत को जल्द इस संबंध में पता चल जाएगा. नोर्ट ने कहा, "राष्ट्रपति ने कहा कि हम इसे देखेंगे. इसलिए मैं उनसे पहले कुछ नहीं कह रही हूं लेकिन जैसा मैं तेल और एस-400 प्रणाली खरीदने के बारे में सुन रही हूं. यह भारत के लिये फायदेमंद नहीं होगा."

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वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह भारत और चीन सरीखे विकासशील देशों को दी जा रही सब्सिडी बंद करवा देना चाहते हैं. ट्रंप ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि चीन को 'महान आर्थिक शक्ति' बनाने में विश्व व्यापार संगठन का हाथ है.'

ट्रंप ने कहा, 'हमारे पास कुछ ऐसे देश हैं जो प्रगतिशील अर्थव्यवस्था वाले हैं. कुछ देश अभी परिपक्व नहीं हो सके हैं, ऐसे में हम उन्हें सब्सिडी दे रहे हैं. यह सब मूर्खतापूर्ण हैं. जैसे भारत, जैसे चीन. वह भी वास्तव में प्रगति कर रहे हैं.'  ट्रंप ने कहा कि वे खुद को विकासशील राष्ट्र कहते हैं और 'उस श्रेणी के तहत उन्हें सब्सिडी मिलती है.'

बता दें ट्रंप ने चीन से सभी वस्तुओं के आयात पर टैरिफ लगाने की शुक्रवार को धमकी दी. इससे बीजिंग के साथ वाशिंगटन के व्यापारिक रिश्तों में पहले से चली आ रही तल्खी और बढ़ गयी है. ट्रंप ने कहा कि पहले से 50 अरब डॉलर के वस्तुओं पर दंडात्मक शुल्क लागू है और 200 अरब डॉलर का शुल्क लगाने पर विचार किया जा रहा है तथा'इसे जल्द ही लागू किया जा सकता है.'

ट्रंप ने कहा, 'हम भी एक विकासशील देश हैं, ठीक है? हम हैं. जहां तक मेरा संबंध है, हम एक विकासशील राष्ट्र हैं.  हम किसी के मुकाबले तेजी से बढ़ रहे हैं.' डब्ल्यूटीओ पर हमला करते हुए ट्रम्प ने कहा कि वह सोचते हैं कि विश्व व्यापार संगठन शायद सबसे खराब है. ट्रंप ने कहा, 'डब्ल्यूटीओ ने चीन को महान आर्थिक शक्ति बनने की अनुमति दी.'

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नई दिल्ली: आपका नेता कब झूठ बोल रहा है और कब सच, कभी-कभी ये समझ पाना बहुत मुश्किल हो जाता है. ऐसी स्थिति सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है. इस मामले में विदेशी नेताओं की बात करें, तो सबसे पहले ज़ेहन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम आता है. मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया गया है कि अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अब तक कुल 1929 बार झूठ बोला है.

अमेरिका की वेबसाइट 'वॉशिंगटन पोस्ट' और कनाडा की वेबसाइट 'टोरंटो स्टार' में ऐसी रिपोर्ट पब्लिश हुई है. डिटेल एनालिसिस में कहा गया है कि ट्रंप के ज्यादातर दावे झूठे और भ्रामक निकले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती दिनों में ट्रंप 100 दिन में औसतन 4.9 झूठे दावे करते थे, जो बाद में लगातार बढ़ते गए. वहीं, राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने अपने भाषणों में ज्यादातर झूठ बोला है.

रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 18 महीनों में डोनाल्ड ट्रंप ने कुल 13 लाख 40 हजार 330 शब्द बोले हैं. इनमें से 5.1 फीसदी झूठ था. अगर साल 2017 का औसत देखें, तो ट्रंप ने लगभग रोज 2.1 झूठे दावे किए. इस साल यह औसत बढ़कर 5.1 हो गया है. मतलब ये हुआ कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो भी कहते हैं उनका हर 14 में से एक शब्द झूठा होता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, 'ट्रंप के इस आदत से विदेशी नेताओं को भी दिक्कत होती है. क्योंकि, ट्रंप एक जगह कुछ कहते हैं, दूसरी जगह उसी बयान पर यू-टर्न ले लेते हैं. इससे विश्व राजनीति में एक तरह की कंफ्यूज़न की स्थिति पैदा हो रही है.

हाल ही में फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ऐतिहासिक मुलाकात हुई. इस मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने ज्वॉइंट स्टेटमेंट दिया. जिसमें ट्रंप ने 2016 में हुए अमेरिकी चुनाव में रूस के कथित रूप से दखल न देने के पुतिन के दावे को मान लिया. यही नहीं, ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अमेरिका का फेडरल इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (FBI) ही दोनों देशों के बीच दूरियां लाने की वजह है.

हालांकि, इस बयान पर चौरतफा घिरने और यूएस मीडिया में किरकिरी के बाद ट्रंप अगले ही दिन अपने बयान से पलट गए. उन्होंने सफाई दी कि हेलसिंकी में रूस के बारे में वो सब गलती से बोल गए थे.

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नई दिल्ली: ‘‘परमाणु बटन’’ के आकार की तुलना को खत्म करते हुये  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  ने कहा कि वह उत्तर कोरियाई नेता से बातचीत के लिये तैयार हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि कोरियाई देशों के बीच होने वाली बातचीत का कुछ नतीजा निकलेगा. पिछले साल परमाणु हथियार संपन्न उत्तर कोरिया के साथ वार्ता के हिमायती अपने मुख्य कूटनीतिज्ञ की आलोचना करने वाले ट्रंप ने कैंप डेविड में पत्रकारों को बताया कि किंग जोंग उन के साथ कुछ बातचीत या सीधा संवाद संभावनाओं से परे नहीं है.

ट्रंप ने कहा, ‘‘निश्चित रूप से, मैं हमेशा बातचीत में विश्वास रखता हूं. बिल्कुल मैं वह करूंगा, इससे मुझे कोई समस्या नहीं होगी.’’ हालांकि उन्होंने इतनी ही तेजी से यह भी कहा कि हर बातचीत एक शर्त के साथ होती है. उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस बातचीत के लिये क्या शर्तें होंगी. दो सालों से भी ज्यादा समय में, यह पहला मौका होगा जब मंगलवार को एक सीमावर्ती शहर में उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच कोई औपचारिक वार्ता होगी. इस दौरान दोनों विरोधी पक्ष दक्षिण कोरिया में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक खेलों में सहयोग के तरीकों को तलाशनें और आपसी रिश्तों को सुधारने की दिशा में बातचीत करेंगे. उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर दोनों देशों के बीच खासा तनाव है.

ट्रंप ने संवाददाताओं के साथ सवाल-जवाब सत्र के दौरान कहा, ‘‘अभी वे ओलंपिक पर बात कर रहे हैं. यह एक शुरुआत है, यह एक बड़ी शुरुआत है.

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वाशिंगटन: ट्रंप प्रशासन एक तरफ पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद रोककर भारत के साथ खड़ा होने की दलील पेश कर रहा है तो वहीं अब अमेरिका में नौकरी कर रहे हजारों भारतीयों को घर भेजने का इंतजाम भी कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ने एक प्रस्ताव तैयार किया है, अगर वहां की संसद में वह पास होता है तो भारी संख्या में भारतीयों को स्वदेश वापसी करनी पड़ जाएगी। ट्रंप प्रशासन के इस प्रस्ताव के मुताबिक इसके पास होने पर एच 1 बी वीजा होल्डर प्रभावित होंगे। उनके वीजा रिन्यू नहीं किए जाएंगे। इन लोगों के ग्रीन कार्ड भी अभी सत्यापन की प्रक्रिया में लटके हुए हैं। अमेरिकी कानून के मुताबिक ग्रीन न बनने की सूरत में एच 1 बी वीजा की अवधि 2-3 वर्ष तक ही बढ़ाई जा सकती है। प्रस्ताव के लिए डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्यॉरिटी को दिए गए ज्ञापन में इस बात की बहुत संभावना जताई गई है कि सत्यापन के लिए लंबित ग्रीन वाले एच 1 बी वीजा होल्डरों को अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। इस प्रस्ताव की जद में सबसे ज्यादा अमेरिकी आईटी सेक्टर के लोग आएंगे। यहां के आईटी सेक्टर में भारतीयों का बोलबाला माना जाता है।

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