Fri08232019

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Displaying items by tag: world cup - दिव्य इंडिया न्यूज़

मानचेस्टर:  भारत-पाकिस्तान के बीच 16 जून को विश्व कप-2019 का 22वां मैच मैनचेस्टर में खेला गया, जिसमें भारत ने 89 रन से जीत दर्ज की। ये भारत की विश्व कप में पाकिस्तान पर लगातार 7वीं जीत रही।

मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 5 विकेट खोकर 336 रन बनाए। टारगेट का पीछा करते हुए बारिश आने पर D/L नियम के तहत पाकिस्तान को 40 ओवरों में 302 रन का संशोधित टारगेट दिया गया, जिसके जवाब में पाकिस्तान 6 विकेट के नुकसान पर 212 रन ही बना सका।

मैच की पहली पारी में धीमी शुरुआत के बाद केएल राहुल और रोहित शर्मा ने पहले विकेट के लिए 136 रन जोड़े, जिसने भारत को मजबूत नींव दी। केएल राहुल 78 गेंदों में 57 रन बनाकर आउट हुए। वहीं रोहित शर्मा ने 113 गेंदों में 3 छक्कों और 14 चौकों की मदद से 140 रन बनाए। इसके बाद कोहली ने मोर्चा संभाला। इस दौरान हार्दिक पंड्या ने भी 19 गेंदों में तेजतर्रार 26 रन बनाए। टीम ने 305 रन बना लिए थे, इसी बीच बारिश के चलते मैच को रोक दिया गया। करीब 1 घंटा बाद जब मैच फिर शुरू हुआ, तो गेंदों में कोई कटौती नहीं की गई।

मैच फिर से शुरू हुआ, तो अगले ही ओवर में विराट कोहली पवेलियन लौट गए। कोहली ने 65 गेंदों में 77 रन बनाए। हालांकि विजय शंकर (15) और केदार जाधव (9) ने तेज खेल दिखाते हुए टीम को 336 के स्कोर तक पहुंचा दिया। विपक्षी टीम की ओर से मोहम्मद आमिर को 3, जबकि हसन अली-वहाब रियाज को 1-1 सफलता हाथ लगी।

टारगेट का पीछा करते हुए पाकिस्तान की शुरुआत खराब रही। पांचवें ही ओवर में इमाम उल हक (7) चलते बने। इसके बाद फखर जमां ने बाबर आजम के साथ शतकीय साझेदारी कर टीम को संभालने की कोशिश की।

बाबर 48, जबकि फखर 75 गेंदों में 8 बाउंड्री की मदद से 62 रन बनाकर आउट हुए। यहां से विकेटों का पतझड़ लग गया। मोहम्मद हाफिज 9, शोएब मलिक 0, जबकि सरफराज अहमद 12 रन बनाकर चलते बने। जब मैच में दोबारा बारिश शुरू हुई उस वक्त तक पाकिस्तान को जीत के लिए 95 गेंदों में 171 रन की दरकार थी, लेकिन बारिश के बाद जब खेल शुरू हुआ, तो D/L नियम के तहत पाकिस्तान को 30 गेंदों में 136 रन का संशोधित लक्ष्य मिला।

आखिरी 5 ओवरों में इमाद वसीम (नाबाद 46) और शादाब खान (नाबाद 20) ने टीम के खाते में 46 रन जरूर जोड़े, लेकिन पाकिस्तान को शर्मनाक हार से ना बचा सके। भारत की ओर से विजय शंकर, हार्दिक पंड्या और कुलदीप यादव ने 2-2 शिकार किए।

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टांटन: पाकिस्तान-ऑस्ट्रेलिया के बीच टॉन्टन के काउंटी ग्राउंड में विश्व कप-2019 का 17वां मैच खेला गया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने 41 रन से जीत दर्ज की। मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया 49 ओवर में 307 रन पर सिमट गया। टारगेट का पीछा करते हुए पाकिस्तान 45.4 ओवर में 266  रन बना ही बना सका।

मैच की पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया की ओर से आरोन फिंच और डेविड वॉर्नर ने पहले विकेट के लिए 146 रन की साझेदारी की, जिसने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। फिंच 84 गेंदों में 10 बाउंंड्री की मदद से 82 रन बनाकर आउट हुए। उनके बाद स्टीव स्मिथ 10 और ग्लेन मैक्सवेल 20 रन बनाकर चलते बने। हालांकि वॉर्नर ने दूसरे छोर पर मोर्चा संभाले रखा और अपने वनडे करियर का 15वां शतक पूरा किया। इस बल्लेबाज ने 111 गेंदों में 12 बाउंड्री की मदद से 107 रन बनाए।

वॉर्नर के आउट होते ही ऑस्ट्रेलियाई पारी लड़खड़ा गई, शॉन मार्श 23, उस्मान ख्वाजा 18, जबकि एलेक्स कैरी ने टीम के खाते में 20 रन जरूर जोड़े, लेकिन ऑस्ट्रेलिया 49 ओवर में ही ऑलआउट हो गया। विपक्षी टीम की ओर से मोहम्म आमिर को 5 विकेट मिले। वहीं शाहीन अफरीदी को 2, जबकि हसन अली, वहाब रियाज और मोहम्मद आमिर को 1-1 सफलता हाथ लगी।

टारगेट का पीछा करते हुए पाकिस्तान की शुरुआत खराब रही और इमाम उल हक बगैर खाता खोले पवेलियन लौट गए। इसके बाद इमाम उल हक ने बाबर आजम (30) के साथ अर्धशतकीय साझेदारी कर टीम को संभालने की कोशिश की। बाबर आउट हुए तो मोहम्मद हफीज ने भी तीसरे विकेट के लिए 80 रन जुटाए। इमाम उल हक ने 53, जबकि मोहम्मद हफीज ने 46 रन टीम के खाते में जोड़े। कप्तान सरफराज अहमद पाकिस्तान की ओर से आउट होने वाले आखिरी बल्लेबाज रहे। उन्होंने 48 गेंदों में 40 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया की ओर से पैट कमिंस ने 3 विकेट झटके। वहीं मिचेल स्टार्क, केन रिचर्डसन ने 2-2, जबकि नाथन कुल्टर नाइल और आरोन फिंच ने 1-1 शिकार किए।

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विश्व कप और एशिया कप के लिए टीम इंडिया का एलान 

नई दिल्ली: दिल्ली में शुक्रवार को वर्ल्ड टी-20 और एशिया कप के लिए टीम इंडिया का एलान कर दिया गया। टीम में अजिंक्य रहाणे, हार्दिक पांड्या और पवन नेगी को जगह दी गई है, जबकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी वनडे में शानदार शतक लगाने वाले मनीष पांडे अनलकी रहे।

एशिया कप व वर्ल्ड टी-20 के लिए टीम इंडिया : एमएस धोनी, विराट कोहली, रोहित, रैना, युवराज सिंह, अजिंक्य रहाणे, हार्दिक पांड्या, रवींद्र जडेजा, शिखर धवन, आर अश्विन, जसप्रीत बुमराह, आशीष नेहरा, मोहम्मद शमी, पवन नेगी, हरभजन सिंह।

टीम इंडिया के बल्लेबाज़ इस वक्त उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। बल्लेबाज़ी क्रम पूरी तरह संतुलित नज़र आ रहा है और हर बल्लेबाज़ अपनी बैटिंग पोजिशन में एक मैच विनर खिलाड़ी है। ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर वनडे में हार ज़रूर हुई, लेकिन टी-20 में हमने क्लीन स्वीप कर दिया।

अजिंक्य रहाणे और मनीष पांडे में से किसी एक को ही टीम इंडिया में जगह मिलने की उम्मीद थी। हुा भी ऐसा ही। रहाणे जगह बनाने में कामयाब रहे, जबकि पांडे को जगह नहीं मिल सकी।

टीम का संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है 

रोहित शर्मा : 

ओपनर के रूप में रोहित शर्मा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच वनडे में 441 रन बनाए, जिनमें दो सेंचुरी और एक फिफ्टी लगाई। इसके बाद टी-20 सीरीज के तीन मैचों में 143 रन ठोके, जिसमें दो फिफ्टी शामिल रहीं।

टी-20 रिकॉर्ड - 47 मैच, 1010 रन, बेस्ट - 106*

मजबूत पक्ष- शॉर्ट पिच गेंदों और स्पिन को खेलने में माहिर

कमजोरी- अतिउत्साह में विकेट फेंक देना

शिखर धवन : 

ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले धवन को लेकर कुछ सवाल उठ रहे थे, लेकिन उन्होंने शानदार प्रदर्शन से टीम में जगह पक्की कर ली। उन्होंने सीरीज के पांच वनडे मैचों में 287 रन बनाए, जिनमें उनका औसत 57.40 रहा। इस दौरान उन्होंने एक सेंचुरी और दो फिफ्टी जमाई।

टी-20 रिकॉर्ड - 11 मैच, 188 रन, बेस्ट - 42

मजबूत पक्ष- भारत के कम उछाल वाले विकेट पर कोई परेशानी नहीं

कमजोरी- शॉर्ट पिच और स्विंग गेंदों के सामने कमजोर

विराट कोहली : 

टेस्ट मैचों में तो विराट फॉर्म में थे, लेकिन वनडे में स्कोर नहीं कर पा रहे थे। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्होंने अपना फॉर्म हासिल कर लिया। उन्होंने तीन टी-20 मैचों में 199 रन बनाए, वहीं वनडे में पांच मैचों में 381 रन बनाए।

टी-20 रिकॉर्ड - 33 मैच, 1215 रन, बेस्ट- 90*

मजबूत पक्ष- हर तरह की गेंदों को खेलने में माहिर

कमजोरी- शुरुआत में ऑफ स्टंप से बाहर निकलती गेंदों पर परेशानी

सुरेश रैना : 

 रैना को वनडे टीम से बाहर कर दिया गया था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे टी-20 मैच में उन्होंने 49 रन की नाबाद विजयी पारी खेली थी। उन्होंने इस दौरान अंतरराष्ट्रीय टी-20 में अपने 1,000 रन पूरे कर लिए। अंतरराष्ट्रीय टी-20 में 1000 रन बनाने वाले वह दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं।

टी-20 रिकॉर्ड - 49 मैच, 1073 रन, बेस्ट - 101

मजबूत पक्ष- स्पिन के खिलाफ माहिर, स्ट्राइक रेट में कोई जवाब नहीं

कमजोरी- शॉर्ट पिच गेंदों के सामने लाचार

युवराज सिंह :

एक समय युवराज सिंह मध्यक्रम में टीम इंडिया की जान रहे हैं। हालांकि वे लंबे समय से टीम से बाहर थे, लेकिन घरेलू क्रिकेट और फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी-20 सीरीज के में शानदार पारी खेलकर दिल जीतने में कामयाब रहे।

टी-20 रिकॉर्ड - 43 मैच, 983 रन, बेस्ट - 77*

मजबूत पक्ष - स्ट्राइक रेट, जमने पर हर तरह की गेंदों को खेलने में सक्षम

कमजोरी - शुरुआत में शॉर्ट पिच गेंदों के सामने दिक्कत

अजिंक्‍य रहाणे : 

टीम के भरोसेमंद बल्‍लेबाजों में गिने जाते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर 'गेयर' बदलते हुए विकेट के दोनों ओर शॉट मारने में सक्षम हैं। शानदार फील्‍डर भी हैं।

टी-20 रिकॉर्ड - 13 मैच, 61 रन, औसत 21.00, स्‍ट्राइक रेट - 116.17

मजबूत पक्ष - एक छोर को संभालते में माहिर।

कमजोर पक्ष - स्‍ट्राइक रोटेट करने में नाकामी के लिए आलोचकों के निशाने पर रहे हैं।

पवन नेगी: 

दिल्‍ली के पवन नेगी आईपीएल में अब तक ऑलराउंडर की हैसियत से खेलते रहे हैं। लेग स्पिन गेंदबाजी के अलावा लोअर ऑर्डर में अच्‍छी करने में भी सक्षम हैं।

टी-20 रिकॉर्ड- इंटरनेशनल टी-20 अब तक नहीं खेला है।

मजबूत पक्ष - बाएं हाथ के स्पिनर के रूप में लगातार विकेट लिए हैं।

कमजोर पक्ष - इंटरनेशनल क्रिकेट के लिहाज से नए। देखना होगा कि दबाव किस तरह झेलते हैं।

रविचंद्रन अश्चिन : 

ऑस्‍ट्रेलिया में वनडे और टी-20 सीरीज में गेंदबाजी में भले ही सफल नहीं रहे हों, लेकिन भारत के घूमते विकेटों पर कप्‍तान धोनी के ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं।

टी-20 रिकॉर्ड - 31 मैच, 33 विकेट, औसत 26.45, इकोनॉमी 7:27

मजबूत पक्ष - गेंदों में विविधिता का अच्‍छा मिश्रण करते हैं। कैरम बॉल है खासियत।

कमजोर पक्ष -  टीम के सबसे सुस्‍त क्षेत्ररक्षकों में गिने जाते हैं।

हार्दिक पांड्या : 

आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए खेली गई तूफानी पारियां अब तक प्रशंसकों के दिमाग में ताजा हैं। गेंद को जबर्दस्‍त तरीके से हिट करने में माहिर हैं। ऑलराउंडर के तौर पर टीम में जगह मिली।

टी-20 रिकॉर्ड- तीन मैच, तीन विकेट, औसत 26.00, इकोनॉमी 11.14

मजबूत पक्ष- गेंदों पर बहुत करारे प्रहार करते हैं। खतरनाक बल्‍लेबाजों में गिनती की जाती है।

कमजोर पक्ष - गेंदबाजी के लिहाज से अभी तक औसत ही साबित हुए हैं।

महेंद्र सिंह धोनी: 

अपनी कप्‍तानी में 2006 में टीम को टी-20 वर्ल्‍डकप जिता चुके हैं। डेथ ओवर के बेहद खतरनाक बल्‍लेबाज धोनी मुश्किल के क्षणों में दबाव को हावी नहीं होने देते। विकेट के पीछे भी खासे मुस्‍तैद हैं।

टी-20 - 55 मैच, 899 रन, औसत 33.29, 27 कैच, 13 स्‍टंपिंग

मजबूत पक्ष - दुनिया के सबसे अच्‍छे फिनिशर में शुमार किए जाते हैं।

कमजोर पक्ष - हाल के वर्षों में बल्‍लेबाजी के फॉर्म में गिरावट देखने में आई है।

जसप्रीत बुमराह : 

इंटरनेशनल क्रिकेट में बहुत कम अनुभव होने के बावजूद गुजरात के इस गेंदबाज को ऑस्‍ट्रेलिया दौरे के शानदार प्रदर्शन का 'इनाम' टी-20 वर्ल्‍डकप की टीम के चयन के रूप में मिला।

टी-20 रिकॉर्ड - तीन मैच, छह विकेट, औसत 17.16, इकोनॉमी 8.95

मजबूत पक्ष - यॉर्कर फेंकने में माहिर हैं जो 'डेथ' ओवर में रन रोकने के लिए महत्‍वपूर्ण है।

कमजोर पक्ष - पर्याप्‍त इंटरनेशनल अनुभव नहीं। दबाव के क्षणों में गेंदबाजी की 'सही परीक्षा' होगी।

रवींद्र जडेजा : 

ऑलराउंडर जडेजा भले ही अपनी बल्‍लेबाजी क्षमता से न्‍याय नहीं कर पाए हों, लेकिन कप्‍तान के विश्‍वासपात्र हैं। बल्‍लेबाजी और गेंदबाजी, दोनों में समान रूप से माहिर। टीम के सबसे अच्‍छे क्षेत्ररक्षकों में से एक हैं।

टी-20 रिकॉर्ड - 25 मैच, 19 विकेट, औसत 32 .78, इकोनॉमी 7.35, रन बनाए 84, औसत 9.3

मजबूत पक्ष - गेंदबाजी में बेहद सटीक। इस कारण डेथ ओवर में गेंदबाजी करने में सक्षम हैं।

कमजोर पक्ष - बल्‍लेबाजी में अभी तक कौशल नहीं दिखा।

मोहम्‍मद शमी: 

चोट के बाद टीम में वापसी कर रहे हैं, लेकिन अपनी गेंदों की गति और रिवर्स स्विंग कराने की क्षमता के कारण उपयोगी साबित होते हैं।

टी-20 रिकॉर्ड - चार मैच, पांच विकेट, औसत 25.00, इकोनॉमी 8.92

मजबूत पक्ष - गेंदबाजी में विविधता का इस्‍तेमाल करते हैं। टीम के स्‍ट्राइक बॉलरों में से एक हैं।

कमजोर पक्ष - चोट के बाद टीम में वापसी की है। ऐसे में फिटनेस की सही परीक्षा होगी।

हरभजन सिंह: 

हरभजन भले ही हाल के वर्षों में टीम इंडिया के नियमित सदस्‍य नहीं रहे हैं, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट के लंबे अनुभव के कारण टी-20 में उन्‍हें चुना गया है।

टी-20 रिकॉर्ड - 27 मैच, 24 विकेट, औसत 25.91, इकोनॉमी 6.34

मजबूत पक्ष - दबाव के क्षणों में गेंदबाजी करने में माहिर हैं। 'दूसरा' से खासा परेशान करते हैं।

कमजोर पक्ष - करियर के अंतिम दौर में हैं। लंबे समय से नहीं खेलने के कारण दबाव में रहेंगे।

आशीष नेहरा : 

उनका गेंदबाजी कौशल इसी से समझा जा सकता है कि 36 साल की उम्र होने के बावजूद टीम में रखे गए हैं। न केवल सटीक गेंदें फेंकते हैं, बल्कि विकेट लेने में भी माहिर। बाएं हाथ का तेज गेंदबाज होना प्‍लस पाइंट।

टी-20 रिकॉर्ड - 11 मैच, 15 विकेट, औसत 24.66, इकोनॉमी 8.60

मजबूत पक्ष - डेथ ओवर्स में गेंदबाजी के मामले आगे, गेंद को विकेट के दोनों ओर स्विंग कराते हैं।

कमजोर पक्ष - टीम के सबसे सुस्‍त क्षेत्ररक्षक माने जाते हैं। फिटनेस के मामले में भी कमजोर।

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मेलबर्न : माइकल क्लार्क ने ऑस्ट्रेलिया को पांचवां वर्ल्‍ड कप दिलाकर फाइनल मैच में 74 रन बनाने के बाद एक दिवसीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया और एमसीजी पर इस स्वप्न सरीखी विदाई के साक्षी बने करीब 93000 दर्शकों ने खड़े होकर इस महानायक का अभिवादन किया।

ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को सात विकेट से हराकर खिताब जीता। क्लार्क इसके साथ ही एलेन बार्डर (1987), स्टीव वा (1999) और रिकी पोंटिंग (2003 और 2007) के साथ ऑस्ट्रेलिया के लिये वर्ल्‍ड कप जीतने वाले चौथे कप्तान हो गए।

तीन दिन बाद अपना 34वां जन्मदिन मनाने जा रहे क्लार्क ने 245 वनडे में 7981 रन बनाए जिसमें आठ शतक और 58 अर्धशतक शामिल हैं। वह ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलते रहेंगे।

वनडे टीम में अपनी उपयोगिता को लेकर सवालों का सामना कर रहे क्लार्क ने भारत के खिलाफ सिडनी में सेमीफाइनल जीतने के बाद ही वर्ल्‍ड कप के बाद संन्यास का ऐलान कर दिया था। उन्होंने कहा था कि यह वनडे क्रिकेट को अलविदा कहने का सही समय है।

उन्होंने कहा था, ‘वनडे क्रिकेट को अलविदा कहने का यह सही समय है। मैं टेस्ट क्रिकेट खेलता रहूंगा।’ शेन वार्न से मिली अपनी 23 नंबर की जर्सी के बारे में उन्होंने कहा, ‘मैं इसे वार्न को वापिस दे सकता हूं। अभी इस बारे में सोचा नहीं है।’ पिछले साल नवंबर में एससीजी पर एक घरेलू मैच के दौरान बाउंसर लगने से अपनी जान गंवा बैठे ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर फिल ह्यूज को अपना छोटा भाई मानने वाले क्लार्क ने तभी से काली आर्मबैंड बांधी हुई है और उन्होंने वर्ल्‍ड कप जीत भी ह्यूज को ही समर्पित की।

क्लार्क ने कहा, ‘इस आर्मबैंड पर पीएच लिखा है। मैं जब भी ऑस्ट्रेलिया के लिये खेलूंगा तब इसे पहनूंगा। पिछले कुछ महीने काफी कठिन रहे और हर कोई कहेगा कि हमने यह वर्ल्‍ड कप 16 खिलाड़ियों के साथ खेला। यह जीत हमारे छोटे भाई को समर्पित है।’ उन्होंने कहा, ‘ह्यूज होता तो जरूर जश्न मनाता। हमें इस जीत पर गर्व है। यह बेहतरीन उपलब्धि है कि हमने अपनी सरजमीं पर अपने परिवार और दोस्तों के सामने वर्ल्‍ड कप जीता।’ क्लार्क ने 74 वनडे में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी करके 50 मैच जीते। वहीं 108 टेस्ट खेलकर 50.79 की औसत से 8432 रन बनाए जिसमें 28 शतक और 27 अर्धशतक शामिल हैं।

पिछले कुछ अर्से से फिटनेस समस्याओं से जूझते आए क्लार्क ने पिछले साल दिसंबर में भारत के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला का पहला मैच खेलने के बाद सर्जरी कराई थी।

वर्ल्‍ड कप में भी उनका खेलना संदिग्ध था और चयनकर्ताओं ने उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे ग्रुप मैच तक फिट होने का समय दिया था। वह न सिर्फ फिट हुए बल्कि मोर्चे से टीम की अगुवाई की।

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मेलबर्न। मेलबर्न। मेलबर्न क्रिकेट मैदान (एमसीजी) पर न्यूजीलैंड को 7 विकेट से हराकर ऑस्ट्रेलिया ने पांचवीं बार वर्ल्ड चैंपियन का खिताब अपने नाम कर लिया है। आईसीसी विश्व कप-2015 के फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए महज 184 रन बनाने थे जो उसने 34वें ओवर में तीन विकेट खोकर आसानी से बना लिए। ऑस्ट्रेलिया की ओर से उसके कप्तान माइकल क्लार्क ने सर्वाधिक 74 रन बनाए। डेविन वॉर्नर 45 तो एरॉन फिंच बिना खाता खोले आउट हो गए। स्टीवन स्मिथ 56 और शेन वॉटसन 2 रन बनाकर नाबाद लौटे।

इससे पहले ऑस्ट्रेलियन पेस बैटरी के आगे न्यूजीलैण्ड टीम 45 ओवर में 183 रन पर सिमट गई। उसकी ओर से ग्रांट इलियट ने सबसे ज्यादा 83 रन बनाए। जेम्स फॉक्नर और मिचेल जॉनसन ने सबसे ज्यादा तीन-तीन विकेट लिए।

लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया की शुरूआत खराब रही और केवल दो रन पर उनका पहला विकेट गिर गया। आरोन फिंच बिना खाता खोले आउट हो गए। लेकिन वार्नर और स्मिथ ने 61 रन की साझेदारी कर टीम को जीत की पटरी पर डाल दिया। वार्नर 45 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद तो क्लार्क और स्मिथ ने एकतरफा अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए टीम को जीत की ओर ले गए। क्लार्क जीत से महज 10 रन पहले आउट हो गए। 

इससे पहले न्यूजीलैण्ड ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। उसकी शुरूआत खराब रही है और कप्तान ब्रेंडन मैक्लम बिना खाता खोले पारी की तीसरी गेंद पर बोल्ड हो गए। उन्हें मिचेल स्टार्क ने चलता किया। मार्टिन गुप्टिल और केन विलियम्सन भी ग्लेन मैक्सवेल और मिचेल जॉनसन के शिकार हो गए। तीन जल्दी विकेट गिरने के बाद ग्रांट इलियट और रॉस टेलर ने पारी को संभाला। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 111 रन की शतकीय साझेदारी करते हुए टीम को मुसीबत से उबारा।

जेम्स फॉक्नर ने टेलर को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा। दो गेंद बाद ही उन्होंने कोरे एंडरसन को भी बिना खाता खोले बोल्ड कर दिया। अगले ही ओवर में मिचेल स्टार्क ने ल्यूक रोंची को भी शून्य पर चलता कर दिया। इससे न्यूजीलैण्ड का स्कोर तीन विकेट पर 150 रन से 151 रन पर छह विकेट हो गया। बैटिंग पावरप्ले के दौरान केवल 15 रन बने और तीन विकेट गिर गए। अपना अंतिम वनडे खेल रहे डेनियल वेटोरी भी नौ रन बनाकर मिचेल जॉनसन की गेंद पर बोल्ड हो गए। ग्रांट इलियट भी अपना संयम खो बैठे और 83 रन बनाकर फॉक्नर के तीसरे शिकार बने।

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मेलबर्न, (तौकीर सिद्दीकी)। करीब डेढ़ महीने तक 14 टीमों के बीच चले जद्दोजहद के बाद रविवार को मेजबान टीमें आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड मेलबर्न क्रिकेट मैदान पर विश्व कप-2015 का खिताबी मुकाबला खेलेंगी। न्यूजीलैंड इससे पहले छह बार विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचने में कामयाब रहा था लेकिन यह पहला मौका होगा जब कीवी टीम खिताब के लिए भिड़ेगी। सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका को बेहद रोमांचक मुकाबले में मात देकर न्यूजीलैंड ने फाइनल में प्रवेश किया है। चार बार की चैम्पियन आस्ट्रेलिया सेमीफाइनल में मौजूदा चैम्पियन भारत को हराकर फाइनल में पहुंचा है। देखने वाली बात यह होगी की कि न्यूजीलैंड की टीम इस महाकुम्भ की अजेय टीम बनेगी या फिर कहीं औसत के नियम के अनुसार न्यूजीलैंड को प्रतियोगिता के अंतिम मैच में हार नसीब होगी। अगर ऐसा हुआ तो यकीनन न्यूजीलैंड के लिए बहुत बुरा दिन होगा । 6 प्रयासों के बाद उसे पहली बार खिताबी लड़ाई का मौक़ा मिला है । टीम अच्छा खेल भी रही है, बस कहीं भारत की तरह अंतिम पड़ाव पर टीम लड़खड़ा न जाय। क्योंकि मेलबर्न और आकलैंड में बड़ा अंतर है।  

आस्ट्रेलिया को बड़े मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करने की महारत हासिल है,  ऐसे में उसे मात देना आसान नहीं होगा। इस बार आस्ट्रेलिया अपने प्रशंसकों के बीच फाइनल खेलेगा और निश्चित तौर पर इसका भी फायदा कंगारू टीम को मिलेगा। न्यूजीलैंड को भी हालांकि हल्के में लेना गलत होगा। इस विश्व कप में कीवी अब तक अपने आठों मैच जीतकर फाइनल में पहुंची है। साथ ही पिछले 14 एकदिवसीय में न्यूजीलैंड अब तक 13 मैच जीत चुका है। न्यूजीलैंड इसी टूर्नामेंट के ग्रुप-ए मैच में आस्ट्रेलिया को हरा चुका है और यह आत्मविश्वास कीवी टीम के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

वैसे, न्यूजीलैंड ने टूर्नामेंट के अब तक के सारे मैच अपने घर में खेले हैं और टीम पहली बार आस्ट्रेलिया में खेलगी। आस्ट्रेलिया के कई पूर्व खिलाड़ी यह कहते आए हैं कि न्यूजीलैंड को स्वदेश में छोटे मैदानों में खेलने का फायदा मिला है और एमएसजी जैसे बड़े आकार के मैदान पर उन्हें समस्या का सामना करना पड़ सकता है। एमसीजी की बात करें तो पिछले 11 मैचों में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम आठ बार यहां विजयी रही है।

न्यूजीलैंड टीम के लिए हालांकि एक बात उसका हौसला बढ़ाने वाली है। मौजूदा कीवी टीम के पांच खिलाडियों को एमसीजी पर खेलने का अनुभव है और 2009 में यहां दोनों टीमों के बीच हुए आखिरी एकदिवसीय मुकाबले में न्यूजीलैंड विजयी रहा था। आस्ट्रेलिया यहां खेले पिछले 12 मैचों में दो बार हारा है तथा पिछले छह मैचों से अपराजित है।

आस्ट्रेलिया का सबसे मजबूत पक्ष यह है कि टीम की बल्लेबाजी काफी गहरी है तथा नौंवे, दसवें क्रम तक के खिलाड़ी बल्लेबाजी की क्षमता रखते हैं। डेविड वार्नर, एरॉन फिंच, स्टीवन स्मिथ, कप्तान माइकल क्लार्क, विकेटकीपर ब्रैड हैडिन पर आस्ट्रेलिया को बल्लेबाजी में स्थायित्व रखने की जिम्मेदारी होगी।

दूसरी ओर, न्यूजीलैंड का अब तक का प्रदर्शन देखें तो टूर्नामेंट में अगल-अलग मौकों पर कोई एक खिलाड़ी बड़ी भूमिका निभाता नजर आया है। कप्तान ब्रेंडन मैक्लम, मार्टिन गुप्टिल, केन विलियमसन, रॉस टेलर, ग्रांट इलियट आदि ऎसे नाम हैं जिन पर बल्लेबाजी का दारोमदार होगा।

गेंदबाजी में टिम साउदी, ट्रेंट बाउल्ट, डेनियल विटोरी पर बड़ी जिम्मेदारी होगी। टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में बाउल्ट 21 विकेट के साथ शीर्ष पर हैं। विटोरी के नाम 15 विकेट हैं। वहीं, आस्ट्रेलिया के पास मिशेल जानसन, मिशेल स्टार्क, जेम्स फॉल्कनर जैसे बड़े गेंदबाज हैं। स्टार्क इस टूर्नामेंट में अब तक 20 विकेट चटका चुके हैं।

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दुबई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद्(आईसीसी) ने भारत और बांग्लादेश मैच के दौरान रोहित शर्मा से जुड़ी नोबॉल का रिकॉर्ड अपनी वेबसाइट से हटा दिया है। इसके तहत अब इस गेंद का हॉक आई और बॉल बाई बॉल ट्रेजेक्टरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। गौरतलब है कि वेबसाइट पर वर्ल्ड कप के प्रत्येक मैच की हरेक गेंद देखी जा सकती है। यहां पर गेंद के पिच होेने की जगह और वहां स्टंप पर कहां हिट करती के साथ ही गेंद की रफ्तार को भी देखा जा सकता है। 

लेकिन रूबेल हुसैन की जिस गेंद पर रोहित शर्मा कैच दे बैठे थे जिसे बाद में स्कवेयर लेग पर तैनात अंपायर अलीम दार ने नोबॉल करार दिया गया था। हालांकि टीवी रिप्ले में दिख रहा था कि गेंद नीचे की ओर जा रही थी और कमर से ज्यादा ऊपर नहीं थी। उस समय वे 90 रन पर थे और बाद में उन्होंने 137 रन बनाए। इस गेंद को लेकर काफी हंगामा हुआ था और अब उसे साइट से हटा दिया गया है। 

इस घटना के बाद बांग्लादेश में काफी विरोध-प्रदर्शन हुए थे। बांग्लादेश के रहने वाले आईसीसी के अध्यक्ष मुस्तफा कमाल ने भी अंपायरों पर भारत की मदद करने का आरोप लगाया। हालांकि आईसीसी ने इसे खारिज किया था।

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सिडनी। वर्ल्ड कप 2015 के दूसरे सेमीफाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 95 रन से हराकर फाइनल में जगह बना ली है। 329 रन का पीछा करते हुए भारतीय टीम 46.5 ओवर में 233 रन पर सिमट गई। ऑस्ट्रेलिया ने मैन ऑफ द मैच स्टीवन स्मिथ(105) और आरोन फिंच (81) की पारियों के बूते निर्घारित 50 ओवर में सात विकेट खोकर 328 रन बनाए। भारत की ओर से उमेश यादव ने सबसे ज्यादा चार विकेट लिए। इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया का सेमीफाइनल में जीत का सिलसिला बरकरार रहा।

रोहित शर्मा और शिखर धवन ने भारत को अच्छी शुरूआत दिलाई और पहले विकेट के लिए 76 रन जोड़े। इस दौरान धवन काफी आक्रा मक नजर आए। उन्होंने फॉक्नर को निशाने पर लेते हुए रनगति को बढ़ाया। जॉस हेजलवुड की गेंद को उड़ाने के फेर में वे मैक्सवेल को कैच थमा बैठे। इसके बाद आए विराट कोहली तो पूरी तरह बैरंग नजर आए और 13 गेंद खेलकर मिचेल जॉनसन के शिकार बने। कुछ देर बाद ही जॉनसन ने रोहित शर्मा को भी वापिस भेज दिया। रोहित ने 34 रन बनाए। सुरेश रैना ने भी निराश किया और सात रन बनाकर फॉक्नर के शिकार बने। 

टॉप ऑर्डर के ध्वस्त होने के बाद भारतीय टीम उबर ही नहीं पाई। धोनी और रहाणे ने पांचवें विकेट के लिए 70 रन जोड़े लेकिन रनगति नही बढ़ा पाए। इसके चलते दबाव बनता गया और इसीके चलते रहाणे 44 रन पर आउट हो गए। धोनी भी कमाल नहीं दिखा पाए और 65 रन बनाकर पवैलियन लौट गए। जेम्स फॉक्नर ने सबसे ज्यादा तीन विकेट झटके।

उमेश यादव ने डेविड वार्नर को विराट कोहली के हाथों कैच कराया। वे केवल 12 रन बना पाए। इसके बाद आए स्मिथ ने फिंच के साथ पारी को संभाला। स्मिथ ने रन गति को बढ़ाया जबकि फिंच ने पारी संभालने की भूमिका निभाई। दोनों के बीच 182 रन की साझेदारी हुई। स्मिथ ने 89 गेंद में शतक उड़ाया। वे 11 चौके और दो छक्कों की मदद से 105 रन बनाकर दूसरे विकेट के रूप में आउट हुए। उन्होंने आरोन फिंच के साथ 182 रन की साझेदारी की।

स्मिथ के जाने के बाद भारतीय गेंदबाजों ने वापसी करते हुए दो विकेट और झटक लिए। अश्विन ने मैक्सवेल को और उमेश यादव ने आरोन फिंच को वापिस भेजा। मैक्सवेल 23 और फिंच 81 रन बनाकर वापिस लौटे। कप्तान माइकल क्लार्क भी 10 रन बनाकर मोहित शर्मा की गेंद पर लपके गए। हालांकि अंतिम ओवर्स में शेन वाटसन(28) और जेम्स फॉक्नर(21) की तेज पारियों के बूते ऑस्ट्रेलिया 300 का स्कोर पार करने में कामयाब रहा। मोहित शर्मा ने सबसे ज्यादा 75 रन लुटाए।

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सिडनी। रोहित शर्मा का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय टीम जीत के इरादे से उतरेगी फिर चाहे जैसी पिच स्पिन को मदद करें या फिर तेज गेंदबाजी के। उन्होंने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहाकि, हमें कोई चिंता नहीं है कि किस तरह का विकेट मिलेगा क्योंकि हमें अच्छे खेल का विश्वास है। हमने सात मैचों में 70 विकेट लिए हैं और हर बार विपक्षी टीम को ऑल आउट किया है इसलिए हमें पता है क्या करना है। हमारे तेज गेंदबाजों और स्पिनर्स सबने अच्छा प्रदर्शन किया है। हम हर परिस्थिति के लिए तैयार है। 

ऑस्ट्रेलिया के बारे में पूछे जाने के बारे में रोहित ने कहाकि, उनके पास अच्छा बल्लेबाजी क्रम है लेकिन बढिया गेंदबाजी के आगे उन्हें संघर्ष करना पड़ा है। न्यूजीलैण्ड और पाकिस्तान के खिलाफ गेंदबाजी में सबने देखा है। उन्होंने गेंदबाजी भी अच्छी की है तो हमने भी शानदार बल्लेबाजी की है। हम निसंदेह जीतेंगे और इसमें कोई संदेह नहीं है। स्लेजिंग के बारे में पूछे जाने पर दो दोहरे शतक लगा चुके इस खिलाड़ी ने कहाकि, जब तक मर्यादा पार नहीं होती तब तक थोड़ी बहुत स्लेजिंग ठीक है। भारतीय टीम लाइन क्रॉस नहीं तोड़ेगी लेकिन हम जवाब देने से भी पीछे नहीं हटेंगे। 

गौरतलब है कि मंगलवार को मिचेल जॉनसन ने कहा था कि, सेमीफाइनल मैच में वे स्लेजर इन चीफ की भूमिका निभाने को तैयार है। दोनों टीमों के खिलाडियों के बीच टेस्ट और त्रिकोणीय श्रंखला में काफी गहमागहमी हुई थी। टीम इंडिया के उपकप्तान विराट कोहली ने भी मंगलवार को कहा था कि भारत के पास इस समय जीतने का शानदार मौका है। इस जीत के जरिए वह टेस्ट और ट्राई सीरिज में मिली हार का बदला ले सकता है।

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ऑकलैंड: न्यूजीलैंड ने ईडनपार्क मैदान पर मंगलवार को खेले गए रोमांचक सेमीफाइनल मैच में दक्षिण अफ्रीका को चार विकेट से हराकर आईसीसी विश्व कप 2015 के फाइनल में जगह बना ली है। न्यूजीलैंड की टीम पहली बार फाइनल में पहुंची है। इस तरह दक्षिण अफ्रीका वर्ल्ड कप से बाहर हो गया है। दक्षिण अफरीका ने एकबार फिर सिद्ध कर दिया कि वह वाकई में चोकर्स हैं । न्यूज़ीलैंड की जीत में जितना हाथ उनकी अच्छी बल्लेबाज़ी का है उतना ही हाथ साउथ अफ्रीका की बेहद घटिया फील्डिंग का है । साउथ अफ्रीका ने इस अहम मुकाबले में दो महत्वपूर्ण कैच और दो शर्तिया रन आउट के मौके गंवाकर न्यूज़ीलैंड को मैच जीतने का पूरा अवसर प्रदान किय। शायद इसीलिए मैच ख़त्म होने के बाद सारे दक्षिण अफ़्रीकी खिलाड़ी मैदान में रो रहे थे। 

दक्षिण अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए बारिश से बाधित मैच में 43 ओवरों में पांच विकेट पर 281 रन बनाए। बारिश में दो घंटे जाया होने के बाद मैच को प्रति पारी 43 ओवरों का सीमित किया गया और फि न्यूजीलैंड को 298 रनों का संशोधित लक्ष्य मिला। दक्षिण अफ्रीका के लिए फाफ डू प्लेसी ने 82, कप्तान अब्राहम डिविलियर्स ने नाबाद 65 और डेविड मिलर ने 49 रन बनाए।

जवाब में खेलने उतरी कीवी टीम ने कप्तान ब्रेंडन मैक्लम के तूफानी 59 रनों के बाद ग्रांट इलियट के नाबाद 84 और कोरी एंडरसन के 58 रनों की बदौलत 42.5 ओवरों में छह विकेट पर जीत हासिल कर ली। मार्टिन गप्टिल ने भी 34 तथा रॉस टेलर ने 30 रन बनाए। कीवी टीम सातवें प्रयास में फाइनल में स्थान बना सकी है। वह इस विश्व कप में लगातार आठ मैचों से अजेय है। दूसरी ओर, द. अफ्रीका चौथे प्रयास में भी फइनल में नहीं पहुंच सका। अब फाइनल में न्यूजीलैंड का सामना 26 मार्च को भारत तथा ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल मैच के विजेता से होगा। फाइनल 29 मार्च को मेलबर्न में होगा।

दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पांच विकेट पर 281 रन बनाए लेकिन लक्ष्य को डकवर्थ लुईस के आधार पर दोबारा तय किया गया क्योंकि ईडन पार्क पर बारिश के कारण लगभग दो घंटे खेल रूकने के कारण मैच को 50 ओवर की जगह 43 ओवर का कर दिया गया। मिलर ने अपनी पारी में छह चौके और तीन छक्के मारे। वह विश्व कप में सबसे तेज अर्धशतक के रिकार्ड की बराबरी करने से चूक गए।

कप्तान एबी डिविलियर्स ने भी 45 गेंद में 65 रन की नाबाद पारी खेली जबकि फाफ डु प्लेसिस ने 107 गेंद में सर्वाधिक 82 रन बनाए। मिलर ने हालांकि अंतिम ओवरों में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। दक्षिण अफ्रीका का स्कोर 38 ओवर के बाद तीन विकेट पर 216 रन था लेकिन मिलर की पारी की मदद से टीम ने अंतिम पांच ओवर में 65 रन जोड़े।

इससे पहले दक्षिण अफ्रीका को शुरूआत में परेशानी हुई। तेज गेंदबाज ट्रेंट बोल्ट ने दोनों सलामी बल्लेबाजों हाशिम अमला (10) और क्विंटन डि काक (14) को जल्दी पवेलियन भेजा जबकि टीम का स्कोर आठवें ओवर में 31 रन तक ही पहुंचा था। अमला और डिकाक दोनों को जीवनदान मिला लेकिन वे इसका फायदा नहीं उठा पाए।

बोल्ट इन दो विकेट के साथ किसी एक विश्व कप में न्यूजीलैंड की ओर से सर्वाधिक विकेट हासिल करने वाले गेंदबाज बने। बोल्ट के इस टूर्नामेंट में सर्वाधिक 22 विकेट हो गए हैं। उन्होंेने ज्यौफ एलोट को पीछे छोड़ा जिन्होंने 1999 में 21 विकेट हासिल किए थे। न्यूजीलैंड के कप्तान ब्रैंडन मैकुलम ने आक्रामक रूख अपनाया और एक समय वह पांच स्लिप और एक गली के साथ आक्रमण कर रहे थे। डु प्लेसिस और रिली रोसेसु ने तीसरे विकेट के लिए 83 रन जोड़कर पारी को संभाला। रन बनाना आसान नहीं था लेकिन इन दोनों ने सतर्कता से बल्लेबाजी करते हुए डिविलयर्स और मिलर के लिए शानदार मंच तैयार किया।

कोरी एंडरसन ने रोसेयु को मार्टिन गुप्टिल के हाथों कैच कराके इस साझदेारी को तोड़ा। उन्होंने 53 गेंद की अपनी पारी में दो चौके और एक छक्का मारा। डिविलियर्स इसके बाद क्रीज पर उतरे और उन्होंने जल्द ही अपनी टीम को हावी कर दिया। वह 36वें ओवर में भाग्यशाली भी रही जब एंडरसन की गेंद पर केन विलियमसन ने उनका कैच टपका दिया। दायें हाथ के इस बल्लेबाज ने अगली ही गेंद पर छक्का जड़ा और फिर इसी ओवर में दो और चौके जड़कर अपने इरादे जाहिर कर दिए।

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